
26 जनवरी नीवा ग्राम पंचायत बंथरा लखनऊ में 77वां गणतंत्र दिवस पारंपरिक गरिमा, वैदिक अनुशासन और सामाजिक एकता के भाव के साथ मनाया गया। ग्राम पंचायत परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रध्वज फहराया गया, जिसके उपरांत राष्ट्रगान गाया गया और सैकड़ों ब्राह्मणों ने एक साथ वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, संविधान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सामूहिक सम्मान का जीवंत उदाहरण बना।
वैदिक परंपरा और राष्ट्रभाव का अनूठा संगम
कार्यक्रम का नेतृत्व मनीराम विश्वकर्मा ने किया, जिनके मार्गदर्शन में संपूर्ण आयोजन अनुशासन और मर्यादा के साथ संपन्न हुआ। राष्ट्रध्वज फहराने के बाद जब राष्ट्रगान की स्वर-लहरियाँ गूंजीं, तब उपस्थित जनसमूह ने एक साथ खड़े होकर तिरंगे को नमन किया। इसके बाद सैकड़ों ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार किया गया, जिससे पूरा परिसर वैदिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के भाव से ओत-प्रोत हो गया।
यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि भारतीय लोकतंत्र केवल संवैधानिक व्यवस्था नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा हुआ जीवन-दर्शन भी है। ग्राम पंचायत नीवा में आयोजित यह समारोह आधुनिक भारत और सनातन परंपरा के समन्वय का प्रतीक बनकर सामने आया।
ग्रामवासियों की सक्रिय सहभागिता
इस अवसर पर ग्रामवासी राहुल गोतम, भूपेंद्र शुक्ला, आश्रम वेदाचार्य रुद्र त्रिपाठी तथा उनके अन्य शिष्यगण विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही राजकुमार, छेदीलाल चौरसिया, पिंकू चौरसिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया। सभी ने एक स्वर में राष्ट्रगान गाकर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती में प्रत्येक नागरिक की भूमिका अहम है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने संविधान की मूल भावना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है—जहाँ नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी स्मरण करते हैं।
संविधान और गणतंत्र दिवस का महत्व
गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास का वह दिन है, जब देश ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। ग्राम पंचायत नीवा में आयोजित यह कार्यक्रम उसी ऐतिहासिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास था। वक्ताओं ने बताया कि संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है, लेकिन इन मूल्यों की रक्षा तभी संभव है, जब समाज जागरूक और संगठित हो।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मनाया गया यह समारोह इस बात का प्रतीक रहा कि भारतीय संस्कृति में राष्ट्र और धर्म, दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। संविधान और परंपरा—दोनों मिलकर ही भारत की आत्मा का निर्माण करते हैं।
युवाओं को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने का संदेश
कार्यक्रम में युवाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, सेवा और सदाचार के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है और उन्हें संविधान के मूल्यों को आत्मसात कर आगे बढ़ना होगा।
ग्राम पंचायत नीवा में आयोजित यह आयोजन ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने का सशक्त उदाहरण बना। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प लिया।
लोकतंत्र, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश
कुल मिलाकर, 26 जनवरी नीवा ग्राम पंचायत बंथरा लखनऊ में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब परंपरा, संस्कृति और संविधान एक साथ खड़े होते हैं, तब लोकतंत्र और अधिक सशक्त बनता है। वैदिक मंत्रों की गूंज, राष्ट्रगान की गरिमा और ग्रामवासियों की एकजुटता ने इस कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
ऐसे आयोजन न केवल राष्ट्रीय पर्व की सार्थकता को मजबूत करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह सिखाते हैं कि राष्ट्रभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण और सहभागिता में निहित होती है।










