27 मार्च को मनाई जाएगी रामनवमी, आचार्य अजय शुक्ल का मत
सलेमपुर, देवरिया। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में नवरात्रि और रामनवमी का विशेष स्थान है। यह केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और आस्था का समन्वित उत्सव है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के अंतर्गत महाअष्टमी और रामनवमी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच जो जिज्ञासा बनी हुई है, उस पर आचार्य अजय शुक्ल ने स्पष्ट जानकारी देते हुए बताया कि महाअष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी, जबकि रामनवमी 27 मार्च को मनाना अधिक श्रेयस्कर होगा।
आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार तिथि गणना के आधार पर महाअष्टमी का आरंभ 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट से हो रहा है और इसका समापन 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 49 मिनट पर होगा। किंतु चूंकि उदया तिथि 26 मार्च को पड़ रही है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से उसी दिन महागौरी पूजन और कन्या पूजन का विधान पूर्ण रूप से फलदायी माना जाएगा।
महागौरी पूजन और कन्या पूजन का महत्व
महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन माता की उपासना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। विशेष रूप से कन्या पूजन को इस दिन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। छोटे-छोटे बालिकाओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करना और उन्हें भोजन कराना भारतीय संस्कृति की गहरी आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है।
आचार्य शुक्ल ने बताया कि कन्या पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह उस शक्ति का सम्मान है, जिसे सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
27 मार्च को रामनवमी मनाना क्यों है श्रेयस्कर
आचार्य अजय शुक्ल ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष रामनवमी का पर्व 27 मार्च को मनाना अधिक उपयुक्त रहेगा। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होंगे।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ व्रत का समापन होता है। इसी दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाना धार्मिक दृष्टि से अधिक शुभ और फलदायी होता है।
नवरात्रि में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
आचार्य अजय शुक्ल ने नवरात्रि के दौरान पूजा में शुद्धता और नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मां दुर्गा की पूजा में कुछ वस्तुओं का निषेध माना गया है, जिनका ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि में माता रानी को भूलकर भी नींबू, इमली, सूखा नारियल, नाशपाती, अंजीर और अन्य खट्टे फल अर्पित नहीं करने चाहिए। इसी प्रकार केतकी, कनेर, धतूरा और मदार के पुष्प भी मां दुर्गा को नहीं चढ़ाए जाते हैं।
आचार्य शुक्ल ने यह भी स्पष्ट किया कि मां दुर्गा के पूजन में तुलसी पत्र अर्पित करना वर्जित है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार का कटा हुआ फल माता को अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अशुद्ध माना जाता है।
भक्ति में शुद्धता और श्रद्धा का महत्व
उन्होंने कहा कि पूजा-अर्चना का वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है, जब वह पूरी श्रद्धा और पवित्र मन से की जाए। केवल बाहरी दिखावे या औपचारिकता से पूजा करने से वह फल नहीं मिलता, जिसकी अपेक्षा की जाती है।
सनातन परंपरा में भक्ति का मूल आधार मन की शुद्धता है। जब भक्त पूरी आस्था और समर्पण के साथ मां की आराधना करता है, तब उसे आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
श्रद्धालुओं में उत्साह, मंदिरों में तैयारियां
महाअष्टमी और रामनवमी को लेकर क्षेत्र के मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालु भी पूरे उत्साह के साथ इन पर्वों की तैयारी में जुटे हुए हैं। घर-घर में पूजन की व्यवस्था की जा रही है और बाजारों में भी पूजा सामग्री की खरीदारी बढ़ गई है।
मंदिरों में विशेष सजावट की जा रही है और भजन-कीर्तन के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। पूरे क्षेत्र में एक धार्मिक और उत्सवमय वातावरण देखने को मिल रहा है, जो नवरात्रि की भक्ति भावना को और भी प्रबल बना रहा है।
निष्कर्ष: आस्था, नियम और श्रद्धा का संगम
अंततः यह स्पष्ट है कि नवरात्रि और रामनवमी केवल पर्व नहीं, बल्कि आस्था, नियम और श्रद्धा का संगम हैं। महाअष्टमी के दिन महागौरी पूजन और कन्या पूजन जहां भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं रामनवमी का पर्व भगवान श्रीराम के आदर्शों को स्मरण कराने का अवसर देता है।
आचार्य अजय शुक्ल द्वारा दी गई जानकारी श्रद्धालुओं के लिए मार्गदर्शक है, जिससे वे सही तिथि और विधि के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकें और अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकें।
❓ महाअष्टमी कब मनाई जाएगी?
महाअष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी, क्योंकि इसी दिन उदया तिथि है।
❓ रामनवमी किस दिन मनाना श्रेयस्कर है?
रामनवमी 27 मार्च को मनाना अधिक शुभ और फलदायी माना गया है।
❓ नवरात्रि में किन चीजों का निषेध है?
नींबू, इमली, खट्टे फल, तुलसी पत्र और कुछ विशेष पुष्प मां दुर्गा को अर्पित नहीं किए जाते हैं।
❓ कन्या पूजन का क्या महत्व है?
कन्या पूजन में बालिकाओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, जिससे पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है।




