घर के भीतर हाईटेक अवैध डीजल पंप: मुरादाबाद में आपूर्ति विभाग की कार्रवाई से उजागर हुआ खतरनाक फर्जीवाड़ा

ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद से सामने आया यह मामला केवल अवैध डीजल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और विभागीय सतर्कता—तीनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। घनी आबादी वाले गांव में बिना किसी लाइसेंस, एनओसी या वैधानिक अनुमति के संचालित यह अवैध डीजल पंप किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रहा था।

मुरादाबाद जनपद के मूंढापांडे थाना क्षेत्र अंतर्गत भैयानगला गांव में आपूर्ति विभाग की कार्रवाई ने एक ऐसे हाईटेक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है, जिसने न केवल प्रशासन को चौंका दिया बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। यहां एक व्यक्ति अपने ही घर के अंदर पूरी तरह से पेट्रोल पंप की तर्ज पर अवैध डीजल पंप संचालित कर रहा था। न तो उसके पास किसी प्रकार का लाइसेंस था, न जिलाधिकारी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र और न ही किसी सुरक्षा एजेंसी की अनुमति।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह अवैध पंप किसी अस्थायी या कच्चे ढांचे पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक से लैस एक व्यवस्थित सेटअप के रूप में चलाया जा रहा था। डीजल भरने के लिए बाकायदा डिस्पेंसिंग मशीन, नोजल, पाइप लाइन और स्टोरेज टैंक लगाए गए थे। इतना ही नहीं, ग्राहकों को कंप्यूटर जनित रसीदें भी प्रदान की जा रही थीं, जिससे यह अवैध कारोबार पूरी तरह वैध पेट्रोल पंप जैसा दिखाई देता था।

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गोपनीय सूचना से खुला राज

जिला आपूर्ति अधिकारी को इस अवैध गतिविधि की गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने पहले सतर्कता के साथ जांच की रणनीति बनाई। सीधे छापेमारी करने के बजाय एक डमी ग्राहक को भेजा गया, जिसने मौके से डीजल खरीदा और विधिवत रसीद भी प्राप्त की। इस प्रारंभिक पुष्टि के बाद आपूर्ति विभाग की टीम ने पुलिस को साथ लेकर मौके पर छापा मारा।

जैसे ही अधिकारी आरोपी के घर के भीतर पहुंचे, वहां का दृश्य देखकर सभी दंग रह गए। घर के अंदर 950-950 लीटर क्षमता के दो बड़े टैंक स्थापित थे। डीजल भरने के लिए आधुनिक डिस्पेंसिंग यूनिट लगी थी, जिससे पाइप और नोजल के जरिए केन और वाहनों में सीधे ईंधन भरा जा रहा था। यह पूरा सेटअप किसी अधिकृत पेट्रोल पंप से कम नहीं था।

बिना लाइसेंस, बिना एनओसी — खुला सुरक्षा खतरा

जब विभागीय अधिकारियों ने संचालक से वैध दस्तावेज मांगे, तो वह कोई भी लाइसेंस, एनओसी या सुरक्षा संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। न अग्निशमन विभाग की अनुमति, न विस्फोटक अधिनियम के तहत कोई मंजूरी और न ही तेल विपणन से जुड़ा कोई वैधानिक पंजीकरण।

घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में इस प्रकार भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ का भंडारण किसी भी दृष्टि से अत्यंत खतरनाक था। विशेषज्ञों के अनुसार, जरा सी चिंगारी या तकनीकी खराबी पूरे गांव को आग के हवाले कर सकती थी। इस लिहाज से यह अवैध डीजल पंप किसी ‘टाइम बम’ से कम नहीं था।

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950 लीटर डीजल बरामद, मशीन सीज

आपूर्ति विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डिस्पेंसिंग मशीन को सीज कर दिया और मौके से करीब 950 लीटर डीजल जब्त किया। साथ ही बिक्री से जुड़ी कंप्यूटर जनित पर्चियां भी कब्जे में ली गईं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि यह अवैध धंधा लंबे समय से और बड़े पैमाने पर चल रहा था।

मामले में मुख्य आरोपी तनवीर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस और आपूर्ति विभाग की संयुक्त टीम अब इस नेटवर्क के पीछे के स्रोतों की जांच में जुटी है।

डीजल कहां से आता था? मिलावट की भी आशंका

सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपी इतनी बड़ी मात्रा में डीजल आखिर कहां से प्राप्त करता था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह डीजल किसी संगठित नेटवर्क के जरिए लाया जा रहा था। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि अधिक मुनाफे के लालच में डीजल में मिलावट की जा रही हो।

इसी को ध्यान में रखते हुए डीजल के नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए हैं। यदि मिलावट की पुष्टि होती है, तो आरोपी के खिलाफ और भी कड़ी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।

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प्रशासनिक निगरानी पर उठते सवाल

यह मामला प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक रिहायशी इलाके में यह अवैध पंप कैसे संचालित होता रहा और स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी। क्या यह लापरवाही थी या कहीं न कहीं मिलीभगत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई न होती, तो यह मामला किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकता था। ऐसे मामलों में केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि व्यापक समीक्षा और सतत निगरानी भी आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अवैध डीजल पंप चलाना कितना खतरनाक है?

बिना लाइसेंस और सुरक्षा मानकों के डीजल का भंडारण और बिक्री अत्यंत खतरनाक है। इससे आग, विस्फोट और जान-माल के भारी नुकसान की आशंका रहती है।

क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?

जांच एजेंसियां डीजल के स्रोत और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही हैं। साक्ष्य मिलने पर अन्य लोगों की गिरफ्तारी से इनकार नहीं किया जा सकता।

डीजल में मिलावट साबित होने पर क्या सजा हो सकती है?

मिलावट की पुष्टि होने पर आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारी जुर्माना और लंबी जेल सजा तक का प्रावधान है।

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