सलेमपुर में शिक्षा का सितारा बुझा : संजीव दूबे का निधन

संजीव दूबे की तस्वीर के साथ मानवस्थली पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं का समूह फोटो








संजीव दूबे का निधन – सलेमपुर में शिक्षा जगत शोकाकुल


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सर्वेश द्विवेदी की रिपोर्ट

सलेमपुर, देवरिया: शिक्षा जगत और समाज सेवा के क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया। मानवस्थली पब्लिक स्कूल, सलेमपुर के प्रबंधक संजीव दूबे का 21 अक्तूबर 2025 को लखनऊ में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से पूरे सलेमपुर सहित देवरिया जिले में शोक की लहर दौड़ गई।

शिक्षा और समाज सेवा के प्रति समर्पण

संजीव दूबे का जीवन शिक्षा और अनुशासन का प्रतीक था। वे मानते थे कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान देने का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और समाज को दिशा देने का सबसे बड़ा माध्यम है।

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा मानवस्थली पब्लिक स्कूल सलेमपुर के विकास में समर्पित कर दी। उनके नेतृत्व में स्कूल ने उत्कृष्ट शैक्षणिक मानकों और अनुशासन के लिए विशेष पहचान बनाई।

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शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उन्हें एक मार्गदर्शक, प्रेरक और पिता समान गुरु के रूप में याद किया।

लंबी बीमारी और अंतिम यात्रा

संजीव दूबे कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन 21 अक्तूबर को उन्होंने अंतिम सांस ली।

22 अक्तूबर को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार पुत्र और परिवार के अन्य सदस्यों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। वातावरण शोक और मौन से भरा हुआ था।

श्रद्धांजलि समारोह में उमड़ा शिक्षा जगत

उनकी स्मृति में आर. एल. एकेडमी, सलेमपुर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इसमें शिक्षा क्षेत्र और समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित हुए।

मुख्य अतिथि रूप में उपस्थित थे:

  • मोहन द्विवेदी, प्रधानाचार्य, जी. एम. एकेडमी
  • विनोद कुमार मिश्र, प्रबंधक, सेंट पाल पब्लिक स्कूल
  • वी. के. शुक्ला, प्रधानाचार्य, सेंट जेवियर्स स्कूल
  • संतोष चौरसिया, प्रधानाचार्य, बापू इ. का.
  • संजय सिंह, प्रधानाचार्य, मदर टेरेसा
  • रत्नेश मिश्र, प्रबंधक, सेंट जॉन्स
  • सुनील पांडेय, स्कालर्स स्कूल
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दो मिनट का मौन रखकर सभी ने उनके योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

परिवार और समाज में गहरा शोक

चार भाइयों में दूसरे नंबर पर रहे संजीव दूबे के निधन से उनका परिवार स्तब्ध है। उनकी माता जी अभी जीवित हैं और यह दुखद समाचार सुनकर गांव में शोक व्याप्त हो गया।

सलेमपुर के सभी निजी विद्यालयों ने 24 अक्तूबर को शोक में बंद रखकर अपने प्रिय शिक्षाविद् को श्रद्धांजलि दी।

शिक्षा जगत में अमिट योगदान

संजीव दूबे ने शिक्षा के माध्यम से समाज में अनुशासन, सादगी और नैतिकता की मिसाल कायम की। वे कहा करते थे कि शिक्षा नौकरी का साधन नहीं, जीवन का दर्पण है।

उनकी विचारधारा आज भी अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रेरित कर रही है।

मेमोरियल योजना की घोषणा

श्रद्धांजलि सभा में निर्णय लिया गया कि “संजीव दूबे मेमोरियल स्कॉलरशिप” प्रारंभ की जाएगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

संजीव दूबे अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षा-दृष्टि, मुस्कान और प्रेरणा सदा जीवित रहेगी।

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सामान्य सवाल-जवाब (FAQ)

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