इंटर की मान्यता नहीं, फिर भी 12वीं में दाखिला
छात्रा का भविष्य दांव पर, डीएम के आदेश पर दो प्रधानाचार्यों पर केस

देवरिया में शिक्षा अनियमितता पर कार्रवाई की प्रतीकात्मक तस्वीर, डीएम निरीक्षण और कक्षा में बैठे छात्र

⚠️ शिक्षा में गंभीर अनियमितता ⚠️
इंटर की मान्यता न होने के बावजूद 12वीं में दाखिला, बोर्ड से प्रवेश पत्र नहीं आया—छात्रा का साल बर्बाद। डीएम के आदेश पर दो प्रधानाचार्यों पर मुकदमा।
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✍️ इरफान अली लारी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। हाईस्कूल तक मान्यता प्राप्त दो विद्यालयों में इंटरमीडिएट की कक्षाएं संचालित कर छात्र-छात्राओं का दाखिला लिया जा रहा था। इसी अनियमितता का शिकार बनी एक छात्रा, जिसका पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो गया। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

🔶 जनता दर्शन में पहुंची पीड़ित छात्रा

बीते 17 फरवरी को जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के जनता दर्शन कार्यक्रम में एक छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई। छात्रा का आरोप था कि श्री जगरनाथ राव श्री कृष्ण प्रताप राव उच्च माध्यमिक विद्यालय, सवरेजी खरग महुआडीह में इंटरमीडिएट की मान्यता न होने के बावजूद उसका 12वीं कक्षा में प्रवेश लिया गया। इसके बाद उसका बोर्ड परीक्षा फॉर्म मंजूर अली इंटर कॉलेज, करजहां से भरवाया गया, जिसकी मान्यता भी केवल हाईस्कूल तक ही है।

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🔶 प्रवेश पत्र नहीं आया, साल हुआ बर्बाद

विद्यालयों की मान्यता इंटरमीडिएट तक न होने के कारण बोर्ड ने छात्रा का प्रवेश पत्र जारी नहीं किया। परीक्षा के समय प्रवेश पत्र न मिलने से वह इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप उसका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष व्यर्थ चला गया। छात्रा के मुताबिक, उसे इस अनियमितता की जानकारी प्रवेश पत्र न आने के बाद हुई।

🔶 डीएम ने सौंपी जांच, शिकायत पाई गई सही

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को सौंपी। डीआईओएस ने एडीआईओएस के नेतृत्व में जांच समिति गठित की। जांच में स्पष्ट हुआ कि बिना मान्यता इंटर कक्षाएं संचालित की जा रही थीं और विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों की परीक्षाएं दूसरे विद्यालय से संबद्ध कराकर कराई जा रही थीं। यह नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया।

🔶 दोनों प्रधानाचार्यों पर मुकदमा

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि क्यों न विद्यालयों की मान्यता निरस्त कर दी जाए। प्रशासन की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है।

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🔶 शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक छात्रा का नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की निगरानी पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते कार्रवाई न होती, तो और भी विद्यार्थी प्रभावित हो सकते थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त निगरानी रखी जाएगी।

फिलहाल दोनों प्रधानाचार्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है। छात्रा को न्याय दिलाने के साथ-साथ यह कार्रवाई अन्य विद्यालयों के लिए भी चेतावनी मानी जा रही है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या दोनों विद्यालयों के पास इंटरमीडिएट की मान्यता थी?

नहीं, दोनों विद्यालयों की मान्यता केवल हाईस्कूल तक थी।

छात्रा का प्रवेश पत्र क्यों नहीं आया?

मान्यता न होने के कारण बोर्ड ने उसका प्रवेश पत्र जारी नहीं किया।

प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?

डीएम के निर्देश पर जांच कराई गई और दोनों प्रधानाचार्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

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कार्यालय कक्ष में बैठी जिलाधिकारी दिव्या मित्तल आधिकारिक बयान देते हुए
कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में कार्रवाई को लेकर जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का दृश्य।

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