बुजुर्ग महिला की तीन बीघा जमीन, फसल नष्ट और अवैध बाउंड्री वॉल—कानून के सामने दबंगई की यह तस्वीर कई सवाल छोड़ती है।
लखनऊ भूमि विवाद अवैध कब्जा का यह मामला एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा करता है कि जब किसी विवाद पर न्यायालय में सुनवाई चल रही हो, तब क्या दबंग और भूमाफिया खुलेआम कानून को चुनौती दे सकते हैं। थाना मोहनलालगंज क्षेत्र के ग्राम पंचायत राजा खेड़ा में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की पुश्तैनी भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध कब्जे और बाउंड्री वॉल निर्माण का गंभीर आरोप सामने आया है।
कहां और किस जमीन को लेकर है विवाद
मामला थाना मोहनलालगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत राजा खेड़ा से जुड़ा है। पीड़ित महिला शैल कुमारी पुत्री स्वर्गीय लोकनाथ की लगभग तीन बीघा भूमि पर कब्जे का आरोप है। आरोप है कि सोनू नामक व्यक्ति ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भूमि पर नवनिर्मित बाउंड्री वॉल बनाकर कब्जा करने का प्रयास किया।
पीड़ित महिला की स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि
पीड़िता शैल कुमारी पत्नी स्वर्गीय प्रेमकुमार, उम्र लगभग 70 वर्ष है। वह वर्तमान में अपने बच्चों के साथ ग्राम लुधपुरवा, मलिहाबाद, जिला लखनऊ में निवास कर रही हैं। शैल कुमारी ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय लोकनाथ की केवल दो बेटियां थीं और कोई पुत्र नहीं था।
वसीयतनामा के आधार पर भूमि स्वामित्व का दावा
पीड़िता के अनुसार उनके पिता लोकनाथ ने अपने जीवनकाल में ही अपनी चल व अचल संपत्ति का विधिवत वसीयतनामा उनके नाम कर दिया था। इसी वसीयत के आधार पर वह स्वयं को भूमि की वैधानिक स्वामिनी मानती हैं। इसके बावजूद उनके चचेरे भाई सोनू द्वारा फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने का आरोप लगाया गया है।
न्यायालय में पहले से लंबित है मामला
इस भूमि विवाद को लेकर माननीय सिविल जज (जू० डि०), साउथ लखनऊ की अदालत में वाद संख्या 156/2014 विचाराधीन है। इस वाद में 22 जनवरी 2026 की तिथि नियत थी। पीड़िता का आरोप है कि इसी दिन न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
न्यायालय की अवहेलना का गंभीर आरोप
शैल कुमारी का कहना है कि सोनू और उसके सहयोगियों ने न केवल अदालत के निर्देशों की अनदेखी की, बल्कि दबंगई दिखाते हुए जबरन कब्जे की कोशिश की। उनके अनुसार यह कार्य संगठित रूप से गुर्गों की मौजूदगी में किया गया, जिससे वह और उनका परिवार भयभीत हो गया।
पुलिस को दी गई तहरीर और फसल नष्ट होने का आरोप
पीड़िता अपने अधिवक्ता के साथ थाना प्रभारी मोहनलालगंज को लिखित तहरीर देने पहुंचीं। आरोप है कि इसके बाद भी स्थिति नियंत्रण में नहीं आई। गाटा संख्या 4025, 4026 और 3973 पर खड़ी गेहूं की फसल को ट्रैक्टर चलवाकर नष्ट कर दिया गया, जबकि पीड़िता ने इसका विरोध भी किया।
प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस प्रकरण में नायब तहसीलदार और उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज को भी पीड़ित के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में पक्षकार बनाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला अब केवल आपसी विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ चुका है।
भूमाफिया संस्कृति पर फिर उठे सवाल
लखनऊ भूमि विवाद अवैध कब्जा का यह प्रकरण प्रदेश में सक्रिय भूमाफियाओं और कमजोर कानून प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषकर बुजुर्ग और असहाय महिलाओं के मामलों में ऐसी घटनाएं प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
अब निगाहें न्यायालय और प्रशासन पर
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और प्रशासन पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए कितनी तत्परता दिखाता है। पीड़िता को उम्मीद है कि कानून का राज कायम होगा और उनकी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त हो सकेगी।










