आज यूपी के बड़े हिस्से में वर्षा का स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा—अर्थात मौसम “शुष्क” रहने की प्रवृत्ति प्रमुख है; लेकिन चुनौती बारिश नहीं, दृश्यता और ठंड का संयुक्त प्रभाव है। पिछले कुछ दिनों की नमी, रात का तापमान, और हवा की कम गति—ये तीनों मिलकर कोहरे की परतें बना रहे हैं। राष्ट्रीय मौसम बुलेटिन ने खास तौर पर यह भी बताया है कि कोहरा परिवहन/हाईवे/रेल रूट पर जोखिम बढ़ा सकता है और सावधानी न बरतने पर सड़क हादसों की आशंका रहती है।
आज का “राज्य-स्तरीय निष्कर्ष” (IMD संकेतों के आधार पर)
- कोहरा: रात/सुबह के समय कई इलाकों में घना/बहुत घना कोहरा बनने की संभावना—खासकर तराई, पूर्वांचल और अवध के हिस्सों में। 3
- ठंड: न्यूनतम तापमान में गिरावट/ठिठुरन का असर, दिन में धूप निकलने पर कुछ राहत; कुछ स्थानों पर “कोल्ड-डे” जैसा अहसास (स्थानीय परिस्थिति पर निर्भर)। 4
- यातायात जोखिम: एक्सप्रेसवे/हाईवे पर विजिबिलिटी घटने से स्पीड, ब्रेकिंग-डिस्टेंस और लेन-डिसिप्लिन सबसे निर्णायक कारक। 5
अब सवाल यह है कि “जिलेवार” स्तर पर आम जनजीवन क्या देखेगा? यूपी का मौसम एक जैसा नहीं चलता—पश्चिम यूपी में रात का कोहरा हाईवे और औद्योगिक ट्रैफिक को ज्यादा प्रभावित करता है, अवध में नमी और निचले तापमान के कारण सुबह लंबी खिंच सकती है, जबकि बुंदेलखंड में धूप तेज़ होने पर दिन के तापमान में अपेक्षाकृत उछाल दिख जाता है। नीचे इन्हीं रुझानों को जिलों/क्षेत्रों के हिसाब से संक्षेप नहीं, बल्कि काम की जानकारी के रूप में रखा गया है।
पश्चिम यूपी: कोहरा + हाईवे-घनत्व वाला जोखिम (मेरठ–गाजियाबाद–नोएडा बेल्ट)
जिले: मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर आदि। इस पट्टी में सुबह के समय धुंध/कोहरा दृश्यता घटा सकता है—और चूंकि यहां एनसीआर, एक्सप्रेसवे, ट्रक-कॉरिडोर और कमर्शियल मूवमेंट ज्यादा है, इसलिए “कम विजिबिलिटी” सीधे ट्रैफिक-सेफ्टी से जुड़ जाती है। मेरठ क्षेत्र के लिए आने वाले दिनों में दिन का तापमान मध्यम और सुबह/रात अपेक्षाकृत ठंडी रहने की प्रवृत्ति दिखती है।
आगरा मंडल/ब्रज: धूप की वापसी, पर सुबह सतर्कता जरूरी
जिले: आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, हाथरस, अलीगढ़ आदि। यहां दिन में धूप निकलने/निकालने की संभावना अपेक्षाकृत बेहतर रहती है, लेकिन सुबह का कोहरा खासकर यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और शहर के आउटर रिंग पर असर दिखा सकता है। आगरा के मौसम पूर्वानुमान में आज बादल के बाद धूप लौटने और अगले दिनों में धूप/हल्की धुंध का संकेत दिखता है।
अवध: (लखनऊ–बाराबंकी–सीतापुर–रायबरेली–उन्नाव) ठंड का “स्थायी असर”
जिले: लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, लखीमपुर खीरी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अम्बेडकर नगर आदि। अवध में कोहरा अक्सर “लंबा” खिंचता है—सुबह देर से धूप निकलने की स्थिति बनती है और यही ठंड को चिपकाए रखती है। लखनऊ के लिए अगले कुछ दिनों में धूप/धुंधले सूरज और रात में ठंडे तापमान का संकेत दिख रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में भी क्रिसमस के आसपास ठंड/कोहरे के असर बढ़ने की चर्चा सामने आई है और बाराबंकी जैसे जिलों में ठंड का उल्लेख किया गया है। 9
पूर्वांचल: (प्रयागराज–वाराणसी–गोरखपुर) सुबह की धुंध, दिन में आंशिक राहत
जिले (मुख्य पट्टी): प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर, प्रतापगढ़; वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र; गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज आदि। यहां तापमान “बहुत नीचे” जाने से ज्यादा समस्या कई बार दृश्यता और नमी-भरी ठंड होती है—जो सुबह के आवागमन और नदी/जलाशय के आसपास के इलाकों में ज्यादा महसूस होती है। वाराणसी और प्रयागराज के पूर्वानुमान में धुंधला सूरज/धूप का मिश्रण और रात में ठंड का संकेत दिखता है।
गोरखपुर क्षेत्र में भी दिन में धूप के साथ आंशिक बादल और रात में ठंडे तापमान की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
तराई/देवीपाटन–बरेली मंडल: कोहरा “घना” होने की अधिक संभावना
जिले: बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा; पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, बरेली; साथ में लखीमपुर खीरी का बड़ा हिस्सा। तराई में नमी और खेतिहर भूभाग के कारण कोहरा जल्दी बैठता है और देर से उठता है—यही वजह है कि सुबह स्कूल-टाइम, बस/टेम्पो रूट और ग्रामीण सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत पड़ती है। बरेली के पूर्वानुमान में धुंध/आंशिक धूप का संकेत और रात में ठंड का असर दिखता है।
बुंदेलखंड: (झांसी–जालौन–ललितपुर) धूप तेज, पर सुबह-रात ठिठुरन बनी रह सकती है
जिले: झांसी, जालौन, ललितपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट आदि। बुंदेलखंड में दिन के समय धूप निकलते ही तापमान ऊपर चढ़ता है, लेकिन सुबह और रात का ठंडा दौर शरीर पर असर करता है—खासकर खुले खेत/निर्माण-स्थलों पर काम करने वालों के लिए। झांसी के पूर्वानुमान में आने वाले दिनों में तेज धूप/धुंधले सूरज का संकेत दिखता है।
कोहरे में “सुरक्षा-सूत्र” (आम लोगों के लिए, बिना अनावश्यक डर के)
आईएमडी के बुलेटिन में स्पष्ट है कि घना/बहुत घना कोहरा परिवहन और मानव-स्वास्थ्य—दोनों पर असर डाल सकता है। इसलिए आज और अगले कुछ दिनों तक सुबह के समय ड्राइविंग में कम स्पीड, फॉग-लाइट/डिपर का सही उपयोग, पर्याप्त दूरी और अचानक ब्रेक से बचना सबसे जरूरी है। एक्सप्रेसवे पर “ओवर-स्पीड + कम विजिबिलिटी” सबसे खतरनाक संयोजन बनता है—जिसकी झलक हाल की दुर्घटना रिपोर्टों में भी दिखती है। 14
कुल मिलाकर यूपी में आज का मौसम “बारिश” नहीं, बल्कि “दृश्यता” का मौसम है—और दृश्यता का मतलब सीधे-सीधे सड़क सुरक्षा, स्कूल-रूटीन, किसान की सुबह की गतिविधि और स्वास्थ्य-सावधानी से है। यदि धूप निकले तो दिन में राहत मिलेगी, लेकिन सुबह-रात की ठंड और धुंध को हल्के में लेना ठीक नहीं। राष्ट्रीय बुलेटिन ने भी इसी पैटर्न के साथ “कोहरा-आधारित प्रभाव” और जरूरी सावधानियां रेखांकित की हैं। 15
क्लिक करें: सवाल–जवाब (FAQ)
आज यूपी में सबसे बड़ा मौसम-जोखिम क्या है—ठंड या कोहरा?
कौन से इलाके कोहरे से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं?
सुबह ड्राइविंग के लिए 3 सबसे जरूरी सावधानियां क्या हों?
अगले कुछ दिनों का ट्रेंड क्या संकेत देता है?










