महारास महोत्सव 2025 : लायंस क्लब भरतपुर कोहिनूर का भव्य पारिवारिक मिलन और सांस्कृतिक आयोजन

लायंस क्लब भरतपुर कोहिनूर के महारास महोत्सव 2025 में डांडिया और पारिवारिक मिलन कार्यक्रम के दौरान समूह फोटो और सम्मान समारोह

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

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महारास महोत्सव 2025 का रंगारंग आगाज़

महारास महोत्सव 2025, लायंस क्लब भरतपुर कोहिनूर ने रविवार, 22 सितंबर 2025 को पारिवारिक मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भरतपुर के एक निजी होटल ईगल नेस्ट में किया। यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें परंपरा, भक्ति और आधुनिकता का अद्भुत संगम भी देखने को मिला।

नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य था – परिवारों को एकजुट करना, भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को प्रदर्शित करना और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ

महारास महोत्सव 2025 की शुरुआत मां भगवती, राधा-कृष्ण और गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस पावन क्षण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

कार्यक्रम का संयोजन लायनेस शालिनी तांबी, अंशु मंघा, श्वेता मेहरवाल, सीमा खंडेलवाल और प्राची सिंह ने किया। उन्होंने नवरात्रि के महत्व और महारास की परंपरा को समझाते हुए बताया कि डांडिया और गरबा सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि सामूहिकता और भक्ति का प्रतीक हैं।

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महारास महोत्सव 2025 : डांडिया और गरबा ने बाँधा समां

जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, डांडिया और गरबा की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और जीवंत कर दिया। पति-पत्नी की संयुक्त नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

महारास महोत्सव 2025 में लायंस क्लब भरतपुर कोहिनूर के सभी सदस्य और परिवार एक साथ समूह फोटो में
महारास महोत्सव 2025 में सांस्कृतिक आयोजन के बाद खिंचवाई गई सामूहिक तस्वीर।

गीतों और भजनों पर झूमते हुए सभी उपस्थित जनों ने इस महोत्सव को अविस्मरणीय बना दिया। राधा-कृष्ण के भजनों पर सजीव नृत्य ने सभी को अध्यात्म और आनंद का अनुभव कराया।

खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनोखा मेल

महारास महोत्सव 2025 सिर्फ नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं रहा। इसमें कई रोचक खेल और प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं। खास तौर पर “राधा और दुर्गा के नामों की पहचान” जैसे खेलों ने दर्शकों को ज्ञान और मनोरंजन दोनों प्रदान किया।

इसी क्रम में “एकाग्रचित्त खेल” ने लोगों को ध्यान और मानसिक एकाग्रता के महत्व का संदेश दिया। इस तरह महोत्सव ने मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी दी।

पुरस्कार और सम्मान

प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख नाम रहे। 

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कपल डांस में लायन जीतेश पटेल

राधे नाम पर्याय प्रतियोगिता में प्रवेश फौजदार

डांडिया समूह में पूर्विका

एकाग्रचित्त खेल में लायन प्रेमपाल

साथ ही गायक अमरनाथ मेहतो की संगीतमय प्रस्तुति ने माहौल को और अधिक मनोरम बना दिया।

लायंस क्लब की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में लायंस क्लब भरतपुर कोहिनूर के अनेक पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। इनमें प्रमुख रहे –

प्रोफेसर लायन डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, पीएमजेएफ लायन प्रेमपाल, एमजेएफ लायन प्रवीण फौजदार, लायन अशोक तांबी, विजय सिंह, अजय मंघा, लायन ओ.पी. गुप्ता, सचिव रूपेंद्र फौजदार, कोषाध्यक्ष संजय खंडेलवाल, लायन प्रो. डॉ. संतोष गुप्ता, डॉ. गुंजन, सेवानिवृत्त प्रो. लायन डॉ. मगन प्रसाद, लायन अनिल अरोड़ा, मोहन मंगलानी, कमल कपूर, कोमल सिंह, डॉ. अजय मेहरवाल, प्रमोद शर्मा, दीपक गोयल, रामवीर डागुर, गोविंद खंडेलवाल, अजय शर्मा, लायन प्रमोद खंडेलवाल सहित अनेक सदस्य।

महिला सदस्यों जैसे – श्रीमती शशि वाला खंडेलवाल, विमलेश, नेहा गोयल, सीमा शर्मा, सीमा लोहिया, सविता सिंह और आशा सिंह की भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी सशक्त बनाया।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम जीवन को बनाते हैं गतिशील

क्लब अध्यक्ष प्रो. डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि –

“सांस्कृतिक कार्यक्रम जीवन को गतिशील और तनावमुक्त बनाते हैं। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बनते हैं।”

उनके इस विचार ने उपस्थित सभी जनों के दिलों को छू लिया।

धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम का समापन लायनेस सुमन प्रेमपाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी आगंतुकों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में ऐसे और भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।

महारास महोत्सव 2025 ने भरतपुर में भारतीय संस्कृति, भक्ति और आधुनिकता का संगम प्रस्तुत किया। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकजुटता और आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रतीक बनकर सामने आया।

लायंस क्लब भरतपुर कोहिनूर द्वारा आयोजित यह सांस्कृतिक महोत्सव निश्चित ही आने वाले वर्षों के लिए एक आदर्श और अनुकरणीय पहल के रूप में याद किया जाएगा।

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