मुख्य बिंदु: कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए परिजनों की तहरीर पर नामजद एफआईआर दर्ज की। सीडीओ की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच टीम गठित, आरोपित पटल सहायक तत्काल प्रभाव से निलंबित।
देवरिया जनपद में कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े प्रकरण ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। परिजनों की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर संबंधित थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी।
डीएम के निर्देश पर जांच टीम गठित
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर मामले की गहन जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की गई है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में गठित इस जांच समिति में एसडीएम सदर और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को भी शामिल किया गया है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करे।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच टीम यह स्पष्ट करेगी कि आत्महत्या के पीछे किन परिस्थितियों और तथ्यों की भूमिका रही। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, दबाव या अनियमितता तो नहीं हुई।
नामजद एफआईआर दर्ज
परिजनों की शिकायत को आधार बनाते हुए संबंधित थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला पंजीकृत कर विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस विभाग का दावा है कि मामले की जांच निष्पक्ष ढंग से की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर भी इस प्रकरण को संवेदनशील माना जा रहा है।
आरोपित पटल सहायक निलंबित
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आरोपित पटल सहायक संजीव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारी को दायित्वों से मुक्त रखा जाएगा ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।
यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से ले रहा है और प्रारंभिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध है तथा पूरे प्रकरण में कानून सम्मत प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। किसी भी प्रकार की अटकलों से बचते हुए प्रशासन ने जनता से संयम बनाए रखने की अपील की है।
जनता की नजर जांच पर
कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की निगाहें अब जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों ने इस दुखद घटना को जन्म दिया और क्या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को प्रारंभिक स्तर पर सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। पारदर्शी और समयबद्ध जांच ही इस मामले में विश्वास बहाली का आधार बन सकती है।
निष्कर्ष
देवरिया का यह प्रकरण केवल एक आपराधिक या प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि जवाबदेही की परीक्षा भी है। एफआईआर दर्ज होना, जांच टीम का गठन और निलंबन जैसे कदम प्रशासन की तत्परता को दर्शाते हैं। अब आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि सत्य सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो सके।








