मुख्य बिंदु: 14 अगस्त 2021 के कथित एक्सीडेंट प्रकरण और 2025 में मिली धमकी की शिकायतों पर अब तक ठोस कार्रवाई न होने से उठे सवाल। पुलिस प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर पीड़ित पत्रकार ने जवाब मांगा।
चित्रकूट में एक पत्रकार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकार संजय सिंह राणा का कहना है कि 14 अगस्त 2021 को उनके साथ कथित रूप से साजिशन कराया गया एक्सीडेंट आज तक जांच के नाम पर लंबित पड़ा है। साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बावजूद आरोपियों के विरुद्ध न तो मुकदमा दर्ज किया गया और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की गई।
2021 का कथित एक्सीडेंट मामला
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि वर्ष 2021 में हुए दुर्घटना प्रकरण में उन्होंने पुलिस अधीक्षक चित्रकूट और थाना प्रभारी रैपुरा को कई बार शिकायती पत्र दिए। क्षेत्राधिकारी राजापुर के कार्यालय में जाकर बयान भी दर्ज कराया गया। इसके बावजूद आज तक मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई और जांच आगे नहीं बढ़ी।
2025 में मिली कथित धमकी
इसके अलावा 29 सितंबर 2025 को अशोक कुमार गुप्ता और प्रतीक गुप्ता द्वारा फोन पर गाली-गलौज और जान से मारने की कथित धमकी दिए जाने की शिकायत भी 2 अक्टूबर 2025 को कोतवाली कर्वी में दर्ज कराई गई। पत्रकार का कहना है कि इस शिकायत पर भी अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
फर्जी शिकायत और दर्ज मुकदमा
पीड़ित पत्रकार का यह भी आरोप है कि दूसरी ओर उनके विरुद्ध की गई शिकायत पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त जांच के उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि उनकी ओर से की गई शिकायतों पर चुप्पी साध ली गई।
पुलिस कार्यशैली पर सवाल
संजय सिंह राणा ने पुलिस प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर उनके मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच क्यों नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि यदि शिकायतें और बयान दर्ज हैं तो फिर कार्रवाई में देरी का कारण क्या है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रभाव और रसूख के आधार पर जांच की दिशा तय की जा रही है।
सरकारी नीतियों का हवाला
पत्रकार ने प्रदेश सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आम नागरिक और पत्रकार की शिकायतों पर सुनवाई नहीं होगी तो यह नीति धरातल पर कैसे लागू होगी। उनका कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया और पारदर्शी जांच पर भरोसा है, लेकिन कार्रवाई में हो रही देरी चिंता का विषय है।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
मामले को लेकर अब स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी, या फिर प्रकरण इसी तरह लंबित रहेगा। फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
निष्कर्ष
चित्रकूट का यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समयबद्ध और पारदर्शी जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है। न्याय प्रक्रिया में देरी अक्सर विश्वास की कमी को जन्म देती है। अब देखना यह है कि संबंधित प्रकरणों में पुलिस प्रशासन किस प्रकार आगे बढ़ता है और क्या साढ़े चार साल से लंबित जांच को दिशा मिल पाती है।
FAQ
मामला किस वर्ष से लंबित बताया जा रहा है?
पत्रकार के अनुसार, 14 अगस्त 2021 से संबंधित कथित एक्सीडेंट प्रकरण अब तक लंबित है।
क्या धमकी मामले में एफआईआर दर्ज हुई है?
पत्रकार का दावा है कि 2025 में दी गई कथित धमकी की शिकायत पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या है?
समाचार लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।








