मुख्य बिंदु: 27 अप्रैल 2026 को देशभर की कथित 5000 तहसीलों और 872 जिलों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का आह्वान। गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर विभिन्न राज्यों के गौसेवकों ने समर्थन जताया।
27 अप्रैल 2026 को देशभर में एक व्यापक अभियान चलाने की घोषणा की गई है, जिसमें गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का आह्वान किया गया है। इस अभियान को ‘गौसेवा आह्वान अभियान’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसमें आयोजकों का दावा है कि देश की 5000 तहसीलों और 872 जिलों में एक साथ ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
किसके नेतृत्व में आह्वान?
अभियान में ‘बृज बिहारी सरकार’ का उल्लेख किया गया है, जिनके नाम से यह आह्वान प्रसारित हो रहा है। वीडियो संदेशों और सोशल मीडिया पोस्टों के माध्यम से समर्थकों से अपील की गई है कि वे 27 अप्रैल को अपनी-अपनी तहसीलों में एकत्र होकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपें। हालांकि इस आह्वान की आधिकारिक पुष्टि किसी केंद्रीय प्राधिकरण की ओर से नहीं की गई है।
हरियाणा से समर्थन का दावा
आह्वान के समर्थन में हरियाणा के कुछ गौसेवकों के नाम भी सामने आए हैं। झज्जर जिले की छारा बस्ती से जोगिंदर उर्फ कालू छारा तथा रोहतक के खरकरा से मनदीप सिंह खरकरा ने इस अभियान के समर्थन की पुष्टि की है। स्थानीय स्तर पर इन नामों का उल्लेख वीडियो और संदेशों में किया गया है। हालांकि इन बयानों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
मांग क्या है?
आयोजकों की मुख्य मांग है कि गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का आधिकारिक दर्जा दिया जाए। उनका तर्क है कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में गौ को विशेष स्थान प्राप्त है और उसे संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, इस मांग के संवैधानिक और विधिक आयामों पर अभी तक किसी आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक तैयारी और संभावित प्रतिक्रिया
यदि 27 अप्रैल को देशभर की बड़ी संख्या में तहसीलों में ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो स्थानीय प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहना होगा। फिलहाल, संबंधित जिलों से किसी व्यापक सुरक्षा या प्रशासनिक निर्देश की औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ
गौ संरक्षण और उससे जुड़े मुद्दे समय-समय पर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। इस नए आह्वान को भी उसी व्यापक सामाजिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। जहां समर्थक इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं आलोचकों का मानना है कि किसी भी मांग पर संवैधानिक प्रक्रिया और व्यापक सहमति आवश्यक है।
निष्कर्ष: 27 अप्रैल पर टिकी नजरें
27 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित यह अभियान कितना व्यापक रूप लेता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल यह स्पष्ट है कि विभिन्न राज्यों के समर्थकों द्वारा इसे लेकर तैयारी और प्रचार किया जा रहा है। सरकार या संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इस मांग की दिशा और प्रभाव का स्पष्ट आकलन संभव होगा।
FAQ
27 अप्रैल 2026 को क्या कार्यक्रम प्रस्तावित है?
देशभर की कथित 5000 तहसीलों और 872 जिलों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग का आह्वान किया गया है।
इस अभियान का नेतृत्व कौन कर रहा है?
आह्वान में ‘बृज बिहारी सरकार’ का नाम सामने आया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी केंद्रीय संस्था से नहीं हुई है।
क्या प्रशासन ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है?
अब तक इस संबंध में किसी व्यापक प्रशासनिक निर्देश या आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।








