बड़ा सवाल: लखनऊ के बन्थरा नगर पंचायत में बजट आवंटन के बावजूद विकास कार्यों की स्थिति पर स्थानीय लोगों ने उठाए गंभीर प्रश्न। क्या जांच होगी?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत बन्थरा इन दिनों कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में करोड़ों रुपये का बजट आवंटित होने के बावजूद क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे। शिकायतों के अनुसार, सड़कों, नालियों और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अब भी वर्षों पुरानी तस्वीर प्रस्तुत कर रही है।
शिकायतों की लंबी सूची, समाधान की प्रतीक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर अनेक लिखित शिकायतें दर्ज कराई गईं, तहसील समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिए गए और सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से जवाब मांगा गया। हालांकि आरोप है कि जवाब या तो अस्पष्ट मिले या संबंधित विभागों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, स्पष्ट और संतोषजनक कार्रवाई अब तक दिखाई नहीं दी है।
विकास बनाम जमीनी हकीकत
स्थानीय प्रतिनिधियों ने मीडिया के समक्ष बयान देते हुए कहा कि नगर पंचायत बन्थरा में क्षेत्रीय विकास के लिए पर्याप्त बजट आया था। इसके बावजूद आज भी कई मोहल्लों में सड़क और नाली निर्माण अधूरा या अस्तित्वहीन बताया जा रहा है। कुछ लोगों का दावा है कि गांव की स्थिति वर्षों पूर्व जैसी ही बनी हुई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच आवश्यक है।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में कथित अनियमितताओं के भी आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पात्र लाभार्थियों के स्थान पर अपात्र लोगों के नाम शामिल किए गए। संबंधित कार्यदाई संस्था और डूडा परियोजना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। RTI के माध्यम से मांगे गए जवाब में कथित तौर पर जिम्मेदारी डूडा और अन्य कर्मचारियों पर डाली गई, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न
ग्रामीणों का आरोप है कि उच्चाधिकारियों और स्थानीय स्तर के प्रभावशाली लोगों के बीच सांठगांठ के कारण शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक नगर पंचायत का मामला नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता का प्रश्न बन सकता है।
सरकार की मंशा बनाम क्रियान्वयन
राज्य सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि यदि बजट आवंटन और योजनाएं कागजों में प्रभावी हैं, तो उनका लाभ जमीनी स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा? यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शी जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
क्या होगी निष्पक्ष जांच?
स्थानीय लोगों की मांग है कि किसी स्वतंत्र और सक्षम अधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यदि आरोप निराधार हैं, तो स्पष्ट रिपोर्ट से भ्रम दूर होगा। और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से प्रशासनिक विश्वास बहाल हो सकता है।
निष्कर्ष: सवाल कायम है
बन्थरा नगर पंचायत का यह मामला केवल स्थानीय असंतोष नहीं, बल्कि विकास और जवाबदेही के बीच की खाई को दर्शाता है। जब तक स्पष्ट जांच और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि करोड़ों के बजट के बावजूद जमीन पर बदलाव क्यों नहीं दिख रहा।
FAQ
बन्थरा नगर पंचायत में मुख्य आरोप क्या हैं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये के बजट आवंटन के बावजूद विकास कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे और योजनाओं में अनियमितताएं हुई हैं।
क्या इस मामले की जांच हुई है?
अब तक स्वतंत्र जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में क्या आरोप हैं?
आरोप है कि पात्रों की जगह अपात्रों के नाम शामिल किए गए। संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।








