डीग जिले के कामां में साइबर ठग गैंग का पर्दाफाश एक बार फिर यह दिखाता है कि किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर संगठित गिरोह आम लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। राजस्थान के डीग जिले के कामां क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो सोशल मीडिया पर सस्ते दामों का लालच देकर लोगों को ठगने का काम कर रहा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने जहां तीन शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, वहीं पांच नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है। यह मामला केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साइबर अपराध के बदलते तरीकों और समाज पर पड़ते उसके गहरे प्रभाव को भी उजागर करता है।
सोशल मीडिया बना ठगी का सबसे आसान हथियार
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी और आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करता था। इन विज्ञापनों में गाय, भैंस और अन्य घरेलू सामान बेहद सस्ते दामों में बेचने का दावा किया जाता था। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोग, जो ऐसे सौदों को लाभकारी समझते हैं, इनके जाल में आसानी से फंस जाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति संपर्क करता, ठग खुद को विश्वसनीय विक्रेता बताकर सौदे की बात पक्की करते और फिर कूरियर या ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर अग्रिम राशि मंगवा लेते थे।
चार्ज लेते ही संपर्क खत्म, यही था ठगी का पैटर्न
पुलिस के अनुसार, जैसे ही पीड़ित व्यक्ति ट्रांसपोर्ट या कूरियर चार्ज के नाम पर पैसे भेजता, उसके बाद न तो कोई सामान भेजा जाता था और न ही फोन कॉल या मैसेज का जवाब दिया जाता था। कई मामलों में तो पीड़ितों को सोशल मीडिया और कॉलिंग प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक कर दिया जाता था। इस तरह यह गिरोह प्रतिदिन कई लोगों को निशाना बनाकर महीनों में लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था।
भुड़ाका गांव की पहाड़ियों में पुलिस की दबिश
थाना अधिकारी भरत सिंह ने बताया कि साइबर पोर्टल के माध्यम से लगातार मिल रही शिकायतों और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई। सूचना के अनुसार, गिरोह भुड़ाका गांव की पहाड़ियों में सक्रिय था। पुलिस टीम ने सुनियोजित तरीके से दबिश दी और मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि पांच नाबालिगों को बाल अपचारी होने के चलते निरुद्ध किया गया।
आठ मोबाइल फोन, जिनमें छिपा था पूरा ठगी नेटवर्क
पुलिस ने आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल फोनों की गैलरी, कॉल डिटेल्स और इंस्टॉल ऐप्स की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, अलग-अलग नामों से बनाए गए प्रोफाइल, डिजिटल वॉलेट और बैंकिंग ऐप्स के माध्यम से पैसे मंगाने की पूरी रणनीति साफ दिखाई दी। यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
नाबालिगों की संलिप्तता ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू पांच नाबालिगों की संलिप्तता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन बच्चों को आसान पैसे का लालच देकर साइबर ठगी जैसे अपराध में शामिल किया गया। नाबालिगों से मोबाइल चलवाना, अकाउंट ऑपरेट कराना और पीड़ितों से बातचीत करवाना गिरोह की रणनीति का हिस्सा था। यह स्थिति समाज के लिए गंभीर चेतावनी है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक समस्या भी बनता जा रहा है।
पुलिस की पूछताछ में हो सकते हैं और बड़े खुलासे
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पुलिस गहन पूछताछ कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों और राज्यों तक फैला हो सकता है। ठगी से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और संपर्क सूत्रों की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।
साइबर ठगी का बदलता चेहरा और आम जनता की भूमिका
डीग जिले के कामां में साइबर ठग गैंग का पर्दाफाश यह साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां ईमेल या फोन कॉल के जरिए ठगी होती थी, अब सोशल मीडिया सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। आम जनता की जागरूकता ही ऐसे अपराधों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी अनजान व्यक्ति या प्रोफाइल द्वारा दिए गए सस्ते ऑफर पर आंख मूंदकर भरोसा करना आज के दौर में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
कैसे बचें सोशल मीडिया साइबर ठगी से
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के लेन-देन से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है। बिना सत्यापन के अग्रिम भुगतान न करें, अनजान लिंक या क्यूआर कोड से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत करें। समय पर की गई शिकायत न केवल आपकी रकम बचा सकती है, बल्कि ऐसे गिरोहों को पकड़ने में भी मददगार साबित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
डीग जिले के कामां में साइबर ठग गैंग का पर्दाफाश कैसे हुआ?
साइबर पोर्टल पर मिली शिकायतों और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने जांच की और भुड़ाका गांव की पहाड़ियों में दबिश देकर गिरोह का पर्दाफाश किया।
साइबर ठग किस तरीके से लोगों को ठग रहे थे?
ये ठग सोशल मीडिया पर सस्ते दामों में गाय, भैंस और अन्य सामान बेचने के फर्जी विज्ञापन डालते थे और ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठते थे।
क्या इस मामले में नाबालिग भी शामिल थे?
हां, पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पांच नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या सावधानी जरूरी है?
अनजान प्रोफाइल से लेन-देन न करें, अग्रिम भुगतान से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।










