वसंत पंचमी आजमगढ़ में ज्ञान, विद्या और वाणी की देवी माँ सरस्वती की आराधना का पर्व पूरे जनपद में अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के प्रतिष्ठित वेदांता हॉस्पिटल तथा सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में आयोजित कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा, सेवा और संस्कार जब एक साथ चलते हैं, तभी समाज का संतुलित विकास संभव होता है। इन आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ शैक्षणिक चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
वेदांता हॉस्पिटल में विद्या और सेवा का संगम
वेदांता हॉस्पिटल परिसर में वसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं प्रख्यात न्यूरो सर्जन डॉ. शिशिर जायसवाल तथा वेदांता ग्रुप के डायरेक्टर ऋत्विक जायसवाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन कर माँ सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की। पूजा स्थल को पारंपरिक पुष्प सज्जा और पीले रंग की थीम से सजाया गया, जो वसंत पंचमी के सांस्कृतिक भाव को और भी सशक्त बना रहा।
कार्यक्रम के दौरान वेदांता नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मधुर स्वर और संयमित प्रस्तुति ने यह स्पष्ट किया कि नर्सिंग जैसी सेवा-प्रधान शिक्षा में भी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का विशेष महत्व है। छात्राओं ने अपनी शैक्षणिक पुस्तकों और अध्ययन सामग्री का भी पूजन किया, जो ज्ञान के प्रति समर्पण का प्रतीक माना गया।
शिक्षा, अनुशासन और सेवा भाव पर दिया गया संदेश
पूजन उपरांत अपने संक्षिप्त संदेश में डॉ. शिशिर जायसवाल ने कहा कि माँ सरस्वती केवल पुस्तकों तक सीमित ज्ञान की प्रतीक नहीं हैं, बल्कि विवेक, अनुशासन और करुणा की भी अधिष्ठात्री देवी हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले विद्यार्थियों के लिए विद्या के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएं अत्यंत आवश्यक हैं। जब ज्ञान सेवा से जुड़ता है, तब उसका प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है।
वेदांता ग्रुप के डायरेक्टर ऋत्विक जायसवाल ने भी इस अवसर पर शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि वसंत पंचमी जैसे पर्व विद्यार्थियों को आत्ममंथन और लक्ष्य निर्धारण का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने नर्सिंग छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने अध्ययन को केवल परीक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज सेवा का माध्यम बनाएं।
सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में संस्कारों के साथ वसंतोत्सव
दूसरी ओर, शहर के प्रतिष्ठित सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल में भी वसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में माँ सरस्वती की प्रतिमा को आकर्षक रूप से सजाया गया, जहां संस्था के डायरेक्टर एवं समाजसेवी आलोक जायसवाल ने विधिवत माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ विद्यालय की प्रिंसिपल सूसन इत्ती भी उपस्थित रहीं।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने पीले वस्त्र धारण कर सांस्कृतिक अनुशासन का परिचय दिया। पूजा के पश्चात विद्यार्थियों के बीच प्रसाद वितरण किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य, बौद्धिक विकास तथा नैतिक उत्थान की कामना की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण शांत, अनुशासित और ज्ञानमयी बना रहा।
छात्रों में दिखा उत्साह, शिक्षकों ने बताया पर्व का महत्व
जयपुरिया स्कूल की प्रिंसिपल सूसन इत्ती ने कहा कि वसंत पंचमी विद्यार्थियों के लिए केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह सीखने, सृजन और आत्मविकास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सामूहिकता की भावना को मजबूत करते हैं। शिक्षक वर्ग ने भी विद्यार्थियों को ज्ञानार्जन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
सामूहिक सहभागिता ने बनाया आयोजन को विशेष
वसंत पंचमी के इन आयोजनों में वेदांता हॉस्पिटल और जयपुरिया स्कूल के नर्सिंग छात्र-छात्राएं, शिक्षक, हॉस्पिटल स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से माँ सरस्वती की आराधना कर यह संदेश दिया कि शिक्षा और सेवा किसी एक संस्था तक सीमित नहीं, बल्कि यह सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व है।
इस अवसर पर विशेष रूप से संस्था के संस्थापक डॉ. शिशिर जायसवाल, जयपुरिया स्कूल के डायरेक्टर आलोक जायसवाल, डायरेक्टर ऋत्विक जायसवाल, वेदांता नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल रीना पांडेय, जयपुरिया स्कूल की प्रिंसिपल सूसन इत्ती, विपुल सिंह सहित छात्र-छात्राएं और पूरा स्टाफ मौजूद रहा। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल और स्मरणीय बनाया।
वसंत पंचमी ने दिया सकारात्मक ऊर्जा का संदेश
कुल मिलाकर, वसंत पंचमी आजमगढ़ में आयोजित ये कार्यक्रम केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने शिक्षा, सेवा, अनुशासन और सामाजिक चेतना का व्यापक संदेश दिया। ऐसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि जब शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव पड़ती है। माँ सरस्वती की आराधना के साथ संपन्न हुए इन कार्यक्रमों ने जनपद में ज्ञान, शांति और सद्भाव का वातावरण निर्मित किया।










