बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एसजेपीयू की मासिक समीक्षा बैठक, सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत देवरिया में विशेष किशोर पुलिस इकाई की मासिक समीक्षा बैठक के दौरान शपथ लेते अधिकारी।



इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर संचालित 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम के तहत जनपद देवरिया में विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) की जनवरी माह की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक पुलिस लाइन देवरिया स्थित प्रेक्षागृह में शुक्रवार को संपन्न हुई, जिसमें बाल विवाह उन्मूलन को लेकर प्रशासनिक, सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों पर गहन विमर्श किया गया। बैठक का उद्देश्य केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक सामूहिक सामाजिक संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें हर विभाग और नागरिक की भूमिका को रेखांकित किया गया।

100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत यह 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम 27 नवम्बर 2025 से प्रारंभ होकर 08 मार्च 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल कानून के भय से बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में ऐसी जागरूकता पैदा करना है, जिससे लोग स्वयं इस कुप्रथा के खिलाफ खड़े हों। देवरिया में आयोजित यह मासिक समीक्षा बैठक इसी व्यापक सोच का हिस्सा रही, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह का उन्मूलन तभी संभव है जब इसे प्रशासनिक अभियान के साथ-साथ सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दिया जाए।

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अपर पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट संदेश

बैठक की अध्यक्षता अपर पुलिस अधीक्षक एवं प्रभारी विशेष किशोर पुलिस इकाई आनंद कुमार पाण्डेय ने की। अपने संबोधन में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बाल विवाह उन्मूलन केवल पुलिस या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद के सभी थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियमित रूप से गांवों, स्कूलों, पंचायतों और सामुदायिक स्थलों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक समाज स्वयं बाल विवाह को अपराध के रूप में नहीं देखेगा, तब तक केवल कार्रवाई से स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने सभी पुलिस कर्मियों से ऑनलाइन प्रतिज्ञा पत्र डाउनलोड कर बाल विवाह न होने देने की शपथ लेने की अपील की, ताकि यह अभियान कागजों तक सीमित न रहे।

कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा

बैठक में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। उपस्थित अधिकारियों और प्रतिभागियों को बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका अथवा 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कराना कानूनन दंडनीय अपराध है। इस अपराध के लिए एक लाख रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

इस दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

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स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलू

जिला परिवीक्षा अधिकारी अनिल कुमार सोनकर ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कम उम्र में विवाह से बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने बच्चों की आयु और स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रियाओं की जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर बाल विवाह को रोका जा सकता है।

वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रबंधक नीतू भारती, मनोवैज्ञानिक मीनू जायसवाल और सपोर्ट पर्सन विभा पाण्डेय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बाल विवाह की शिकार कई किशोरियां मानसिक अवसाद, भय और सामाजिक दबाव से जूझती हैं, जिन्हें समय रहते सहायता और परामर्श की आवश्यकता होती है।

बाल कल्याण समिति और प्रशासन की संयुक्त भूमिका

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सावित्री राय ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए केवल सरकारी आदेश पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जन-जन की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने धार्मिक प्रतिनिधियों, विवाह स्थल प्रबंधकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे ऐसे किसी भी आयोजन की सूचना तत्काल प्रशासन को दें, जिसमें बाल विवाह की आशंका हो।

राजकीय बाल गृह (बालक) के अधीक्षक श्री राम कृपाल ने बाल विवाह को एक गंभीर सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि यह न केवल दंडनीय अपराध है, बल्कि यह पूरे समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर करता है।

जिला संचालन समिति और व्यापक नेटवर्क

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन के नेतृत्व में एक व्यापक जिला संचालन समिति का गठन किया गया है। इस समिति में पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, आईसीडीएस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड हेल्पलाइन, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, स्वैच्छिक संगठन, सिविल सोसाइटी, धार्मिक प्रतिनिधि और विवाह स्थल प्रबंधकों को शामिल किया गया है।

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इस समन्वित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाल विवाह की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई हो और पीड़ित बच्चों को संरक्षण एवं पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

‘बाल विवाह रोकथाम योद्धा’ के रूप में शपथ

बैठक के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को ‘बाल विवाह रोकथाम योद्धा’ के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ दिलाई गई। साथ ही आपात स्थिति में सहायता के लिए 181 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 112 पुलिस हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में श्रम प्रवर्तन अधिकारी दिनेश कुमार, बाल कल्याण समिति सदस्य विवेकानन्द मिश्र, प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार वर्मा, श्रम विभाग के पंकज मिश्रा, चाइल्ड हेल्पलाइन के अमित उपाध्याय, महिला कल्याण विभाग के अरबिन्द यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और सभी थानों के नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, देवरिया में आयोजित यह बैठक बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकल्प के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

जी एम एकेडमी सलेमपुर में आयोजित सरस्वती पूजन समारोह के दौरान पूजा-अर्चना, हवन, प्रसाद वितरण और शिक्षक-छात्र सहभागिता के दृश्य।
सलेमपुर स्थित जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित सरस्वती पूजन समारोह के दौरान पूजा, हवन और शिक्षकों-छात्रों की सामूहिक सहभागिता का दृश्य।

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