दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव धूमधाम से शुरू: लगगम गाँव में भक्ति और उल्लास का संगम

नवरात्रि उत्सव के दौरान ग्रामीण महिलाएँ और युवा पारंपरिक परिधानों में गरबा और डांडिया करते हुए।

दादा गंगाराम की रिपोर्ट

 

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दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव की धूम

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव का इंतज़ार पूरे वर्ष भक्तों को रहता है। इस वर्ष भी दहेगाम मंडल के लगगम गाँव स्थित श्री उमा चंद्रशेखर स्वामी मंदिर में यह पावन पर्व धूमधाम से आरंभ हो चुका है। जैसे ही मंदिर प्रांगण में पूजन और मंत्रोच्चार की गूंज फैली, वैसे ही श्रद्धालु आस्था के सागर में डूब गए।

मुख्य पुजारी श्री मोडेपेल्ली श्रीकंठाचार्युलु ने बताया कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में दुर्गादेवी नौ स्वरूपों में प्रकट होती हैं। हर दिन उनके अलग-अलग रूप की पूजा का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु यदि नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, तो उनके जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और शांति का आगमन निश्चित होता है।

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव और लगगम गाँव की परंपरा

लगगम गाँव की यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण हर साल इस वार्षिक उत्सव में पूरे मनोयोग से भाग लेते हैं। न केवल गाँव के लोग बल्कि आस-पास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं।

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लगगम गाँव स्थित श्री उमा चंद्रशेखर स्वामी मंदिर में दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव की सजावट और भक्ति माहौल।
लगगम गाँव का श्री उमा चंद्रशेखर स्वामी मंदिर नवरात्रि उत्सव में रोशनी और श्रद्धा से आलोकित।

इस दौरान मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनियों और फूलों से सजाया जाता है। हर शाम देवी की आरती और भजन संध्या का आयोजन होता है, जिसमें भक्तजन उल्लासपूर्वक हिस्सा लेते हैं। नवरात्रि की यह धूम गाँव में उत्साह, एकता और भक्ति का अनोखा वातावरण रच देती है।

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव का धार्मिक महत्व

नवरात्रि का अर्थ है— “नौ रातें”। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है।

1. शैलपुत्री

2. ब्रह्मचारिणी

3. चंद्रघंटा

4. कूष्मांडा

5. स्कंदमाता

6. कात्यायनी

7. कालरात्रि

8. महागौरी

9. सिद्धिदात्री

पुजारी श्रीकंठाचार्युलु ने बताया कि जो भक्त दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव में पूरे नियम और श्रद्धा से शामिल होते हैं, वे न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं बल्कि उनके जीवन की कठिनाइयाँ भी दूर होती हैं।

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम

लगगम गाँव के इस आयोजन को खास बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है। गाँव की महिलाएँ और युवा पारंपरिक परिधान पहनकर गरबा और डांडिया में भाग लेते हैं। बच्चे माता दुर्गा की झांकियाँ और नाटक प्रस्तुत करते हैं।

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ये सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव की मूल भावना— “भक्ति और आनंद” को जीवंत करती हैं।

ग्रामीणों की आस्था और सहभागिता

गाँव के श्रद्धालु मानते हैं कि दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। हर परिवार मंदिर के लिए कुछ न कुछ अर्पण करता है— कोई प्रसाद चढ़ाता है, तो कोई भंडारे की व्यवस्था करता है।

ग्रामीण महिलाओं का योगदान भी उल्लेखनीय है। वे प्रतिदिन मंदिर की साफ-सफाई, सजावट और भक्ति गीतों की प्रस्तुति में सक्रिय रहती हैं।

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव और आध्यात्मिक वातावरण

नवरात्रि के इन नौ दिनों में मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक हो जाता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज, मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि भक्तों को भक्ति रस में डूबो देती है।

भक्तों का मानना है कि दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव में शामिल होकर मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। देवी दुर्गा की कृपा से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

उत्सव के दौरान विशेष आयोजन

प्रतिदिन सुबह और शाम की आरती

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देवी के नौ स्वरूपों की पूजा

अखंड ज्योति प्रज्वलन

भजन संध्या और गरबा नृत्य

भक्तों के लिए सामूहिक भंडारा

इन सभी आयोजनों ने दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव को और अधिक भव्य बना दिया है।

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव: आस्था और ऊर्जा का संगम

लगगम गाँव का यह उत्सव इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार परंपराएँ समाज को जोड़ती हैं। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि यह सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

ग्रामीणों का विश्वास है कि जो भी भक्त पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव में शामिल होता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

दुर्गादेवी नवरात्रि उत्सव का शुभारंभ लगगम गाँव के श्री उमा चंद्रशेखर स्वामी मंदिर में बड़ी धूमधाम से हुआ है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा, भक्ति संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामूहिक सहभागिता इसे अद्वितीय बना देते हैं।

यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आस्था, एकता और उल्लास का उत्सव है।

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