जातिसूचक गालियों व जानलेवा हमले का आरोप,
पत्रकार ने एसपी से की FIR दर्ज करने की मांग

चित्रकूट के पत्रकार संजय सिंह राणा अस्पताल में घायल अवस्था, पासपोर्ट साइज फोटो और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए
✍️चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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समाचार सार: चित्रकूट में एक पत्रकार ने कुछ लोगों पर जातिसूचक गालियों और सुनसान सड़क पर जीप से कुचलकर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। घायल पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना-पत्र देकर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पांच वर्ष बाद भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चित्रकूट की एक शांत प्रतीत होने वाली सांझ ने उस दिन जैसे भीतर छिपी चीख को बाहर ला दिया था। रामनगर क्षेत्र से समाचार संकलन कर लौट रहे एक पत्रकार की मोटरसाइकिल राष्ट्रीय राजमार्ग पर आगे बढ़ रही थी। सड़क अपेक्षाकृत सुनसान थी, रोशनी ढलान पर थी और वातावरण में वह सामान्य थकान थी जो दिन भर के काम के बाद घर लौटते व्यक्ति के चेहरे पर उतर आती है। तभी सामने से आती एक जीप ने कथित रूप से अचानक रफ्तार और दिशा बदली। शिकायतकर्ता के अनुसार, टक्कर इतनी तीव्र थी कि वह सड़क पर दूर तक घिसट गया और गंभीर रूप से घायल हो गया।

सुनसान सड़क, एक टक्कर और कई सवाल

घायल पत्रकार संजय सिंह राणा का आरोप है कि यह महज दुर्घटना नहीं थी, बल्कि सुनियोजित हमला था। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को दिए अपने प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया है कि घटना के दौरान कुछ लोगों ने कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। लंबे समय तक इलाज चला और शारीरिक क्षति ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

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एक साधारण पृष्ठभूमि, असाधारण सवाल

संजय सिंह राणा कोई बड़े मीडिया संस्थान से जुड़े चर्चित नाम नहीं हैं। वे स्वयं को समाज के हाशिये पर खड़े वर्गों की आवाज बताते रहे हैं। उनके लेखन में प्रशासनिक अनियमितताओं, अवैध खनन और स्थानीय स्तर पर कथित भ्रष्टाचार से जुड़े विषय प्रमुख रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि उनकी लेखनी बेबाक रही है, जबकि आलोचकों की राय अलग हो सकती है। परंतु इस घटना ने एक व्यापक प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या एक पत्रकार, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त है?

पांच साल का संघर्ष और न्याय की प्रतीक्षा

घटना को लेकर अब पांच वर्ष बीत चुके हैं। राणा का कहना है कि वे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संघर्ष से गुजर रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। उनका दावा है कि उन्होंने बार-बार प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई की सूचना सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। हालांकि, अंतिम निर्णय और निष्कर्ष जांच एजेंसियों के अधीन हैं।

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हादसा या साजिश? प्रशासन के सामने प्रश्न

यदि यह सामान्य सड़क दुर्घटना थी, तो जांच की प्रगति क्या है? यदि आरोप गंभीर हैं, तो संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या साक्ष्य अपर्याप्त थे, या प्रक्रिया लंबित है? प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और समयबद्धता को लेकर ये प्रश्न स्थानीय पत्रकार समुदाय और नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

आवेदन में नामित आरोपी

शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना-पत्र में लवलेश मिश्रा पुत्र रमेश मिश्रा निवासी बरिया, अतुल कुमार मिश्रा पुत्र द्वारिका प्रसाद मिश्रा निवासी देवहटा/गोबरौल सनत कुमार (तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी, रामनगर), जितेंद्र प्रताप सिंह (वन दरोगा, संबंधित रेंज), विजय मोहन उर्फ पिंटू बाबू (रयपुरा रेंज) तथा राज करन एवं आर. के. दीक्षित (उप प्रभागीय वनाधिकारी, चित्रकूट) सहित अन्य व्यक्तियों को नामजद करते हुए आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने कथित रूप से वाहन संख्या यूपी 96 टी 8703 के माध्यम से टक्कर मारकर जानलेवा हमला किया तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। आवेदन में इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है।

लोकतंत्र में असुविधाजनक आवाज की जगह

लोकतंत्र में पत्रकारिता का दायित्व सत्ता से प्रश्न पूछना है। किंतु जब प्रश्न पूछने वाला स्वयं असुरक्षित महसूस करे, तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस वातावरण का संकेत है जिसमें स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकार काम करते हैं। सरकारें और प्रशासन अक्सर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकार सुरक्षा की प्रतिबद्धता दोहराते हैं; ऐसे में अपेक्षा यही है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो।

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एक जुगनू की लौ

संजय सिंह राणा स्वयं को टूटा हुआ नहीं मानते। उनका कहना है कि उन्होंने अपने उद्देश्य से समझौता नहीं किया। सीमित साधनों के बावजूद वे सामाजिक मुद्दों पर लिखना जारी रखना चाहते हैं। यह संकल्प उनकी व्यक्तिगत जिजीविषा का प्रमाण हो सकता है, किंतु न्यायिक और प्रशासनिक निष्कर्ष ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने ला पाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

➤ मामला क्या है?

पत्रकार संजय सिंह राणा ने आरोप लगाया है कि उन्हें जातिसूचक गालियां देते हुए जीप से कुचलकर जानलेवा हमला किया गया। उन्होंने एसपी से एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

➤ घटना कब और कहां हुई?

घटना रामनगर क्षेत्र के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर शाम के समय हुई बताई गई है।

➤ वर्तमान स्थिति क्या है?

शिकायतकर्ता के अनुसार वे अभी भी उपचार और न्याय की प्रतीक्षा में हैं। प्रशासनिक जांच की आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।


समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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