सीतापुर में अतिक्रमण नोटिस विवाद एक बार फिर प्रशासन और व्यापारियों के बीच तनाव का कारण बनता दिख रहा है।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ दवा व्यापारियों व अन्य दुकानदारों ने जिला प्रशासन से नगर पालिका परिषद द्वारा जारी किए गए नोटिसों पर पुनर्विचार की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि जिन दुकानों को हटाने की बात कही जा रही है, वे वर्षों पहले स्वयं नगर पालिका द्वारा आवंटित की गई थीं और उनका नियमित टैक्स भी नगर पालिका के खाते में जमा होता रहा है।
नगर पालिका के नोटिस पर व्यापारियों की आपत्ति
लालबाग से जिला अस्पताल मार्ग पर स्थित दवा दुकानों और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को हटाने के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा हाल ही में नोटिस जारी किए गए हैं। इसी के विरोध में व्यापारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
व्यापारियों का तर्क है कि जिन दुकानों को अतिक्रमण बताया जा रहा है, उन्हें वर्षों पूर्व विधिवत रूप से आवंटित किया गया था।
भयंकर गलन और धुंध से ठप होता जन-जीवन
दवा व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे न केवल नियमित रूप से टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, बल्कि प्रशासन के निर्देश पर पहले ही टिनशेड और अस्थायी ढांचे हटा चुके हैं।
इसके बावजूद अब पूरी दुकान हटाने की बात कही जा रही है, जो न केवल अनुचित है बल्कि व्यापारिक स्थिरता पर भी सीधा प्रहार है।
जिला अस्पताल मार्ग पर जरूरी सेवाओं का सवाल
सीतापुर में अतिक्रमण नोटिस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि जिला अस्पताल मार्ग पर बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़ी दुकानें संचालित हैं।
दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि इन दुकानों को हटाया गया, तो इसका सीधा असर आम जनता, मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ेगा।
अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए यह मार्ग जीवन रेखा की तरह है। ऐसे में दवा दुकानों का एक साथ हटाया जाना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को प्रभावित कर सकता है, जिसका सामाजिक असर भी गंभीर हो सकता है।
व्यापार मंडल ने उठाए प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष भगवती गुप्ता ने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर की जा रही कार्रवाई पर प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आंख अस्पताल मार्ग से पटरी दुकानदारों को हटाया गया, लेकिन उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसी तरह अब जिला अस्पताल मार्ग पर दवा और अन्य दुकानदारों को नोटिस दिए जा रहे हैं, जबकि दुकानदार पहले ही अपने स्तर से अतिक्रमण हटा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें बार-बार परेशान किया जाना व्यापारिक वातावरण को अस्थिर करता है।
प्रशासन से संवाद और समाधान की मांग
व्यापारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि दुकानों को अतिक्रमण घोषित करने से पहले
उनके आवंटन से जुड़े दस्तावेजों और वर्षों से चल रहे टैक्स रिकॉर्ड की जांच की जाए।
व्यापारियों का कहना है कि वे प्रशासन के विरोधी नहीं हैं,
बल्कि नियमों के दायरे में रहकर ही व्यवसाय करना चाहते हैं।
इस दौरान अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महासचिव शोभित टंडन, हर्षल जायसवाल, मयंक शंकर गुप्ता, प्रेमू वाजपेई, सहज गुप्ता, बृजेश रस्तोगी, नरेंद्र अस्थापना, अनवारुल हक, राम लखन कश्यप सहित कई अन्य व्यापारी मौजूद रहे।
सीतापुर में अतिक्रमण नीति पर उठते व्यापक सवाल
सीतापुर में अतिक्रमण नोटिस विवाद केवल कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगर प्रशासन की अतिक्रमण नीति पर भी सवाल खड़े करता है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रशासन विकास और सुगम यातायात के नाम पर दुकानों को हटाना चाहता है,
तो इसके लिए पारदर्शी नीति और वैकल्पिक व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।
बिना पुनर्वास योजना के की गई कार्रवाई न केवल आजीविका को प्रभावित करती है, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के बीच अविश्वास भी बढ़ाती है। इसी कारण व्यापारी वर्ग संवाद और संतुलित समाधान की मांग कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सीतापुर में अतिक्रमण नोटिस विवाद क्यों हुआ?
नगर पालिका परिषद द्वारा जिला अस्पताल मार्ग की दुकानों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए,
जबकि व्यापारी दावा कर रहे हैं कि ये दुकानें वर्षों पहले नगर पालिका द्वारा ही आवंटित की गई थीं।
दवा दुकानों के हटने से क्या असर पड़ेगा?
दवा दुकानों के हटने से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों और आम जनता को
दवाइयों और जरूरी सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारियों की मुख्य मांग क्या है?
व्यापारी चाहते हैं कि प्रशासन आवंटन और टैक्स रिकॉर्ड की जांच करे
और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को न हटाया जाए।










