गढ़चिरौली में गुप्त सूचना पर 08 गाय-बछड़ों को बचाया गया:सनातन रक्षा दल की टीम ने जंगल में कार्रवाई की

गढ़चिरौली जिले के मारिगुडम गांव के जंगल में सनातन रक्षा दल की टीम ने तस्करों के बंधन से 08 गाय-बछड़ों को मुक्त कराया


सदानंद इंगिली की रिपोर्ट,

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स्थान: मारिगुडम, सिरोंचा — तारीख: 21 अक्टूबर 2025 | घटना समय: लगभग 02:00 PM

गढ़चिरौली जिले के मारिगुडम गांव के पास के जंगल में मिली गुप्त सूचना के आधार पर सनातन रक्षा दल की टीम ने गौ-सेवापशु-रक्षा के लिये एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार तस्करों द्वारा दो दिनों से बंधक रखे गए कुल 08 गाय-बछड़े सुरक्षित रूप से मुक्त कराये गए और उन्हें तत्काल पानी व चारा उपलब्ध कराया गया। यह घटना जंगल में पशु तस्करी और स्थानीय सामाजिक संगठन की सक्रियता को उजागर करती है।

घटना का अवलोकन

21 अक्टूबर 2025 को दोपहर लगभग 02:00 बजे, सिरोंचा-तालुका के मारिगुडम गांव के पास जंगल से एक अहम सूचना मिली कि तस्करों ने वहां गाय-बछड़े बांधकर रखे हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन सनातन रक्षा दल की टीम मौके पर पहुंची और वहां से कुल 08 पशुओं को मुक्त कराया गया। रेस्क्यू के बाद पशुओं को पानी व चारा दिया गया तथा उनकी स्थिति का तुरंत ध्यान रखा गया।

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कार्रवाई में शामिल प्रमुख सदस्य

  • जिला अध्यक्ष — नरसिंहराव सिलवेरी री
  • जिला उपाध्यक्ष — सदानंद इंगिली
  • सिरोंचा तालुका सचिव — वेणुगोपाल श्रीकोंडा
  • नागभूषणम चेकिनारपु, दामोदर अरिगेला
  • श्री राम मंदिर सेवा समिति, नारायणपुर — अध्यक्ष वेंकट रापेली व सदस्य पोचम चेम्मकारी, वेंकन्ना भीमकरी, सुजल कमलवार, प्रशांत मार्गोनी, संदीप घंटावर, साईकिरण कोल्लुरी

कार्रवाई की रूपरेखा

  1. गुप्त सूचना प्राप्ति: स्थानीय सूत्रों से मिली रिपोर्ट के आधार पर टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
  2. स्थल पर पहुँच: सिरोंचा से लगभग 12 किलोमीटर दूर मारिगुडम जंगल में पहुंचकर स्थिति का पता लगाया गया।
  3. पशुओं का रेस्क्यू: त्वरित कार्रवाई में 08 गाय-बछड़ों को मुक्त कर सुरक्षित स्थान पर लाया गया।
  4. प्राथमिक देखभाल: पशुओं को तुरंत पानी व चारा प्रदान किया गया; आवश्यक होने पर पशु-चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था सुझायी गई।
  5. सामुदायिक समन्वय: स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग किया — यह सामुदायिक-जिम्मेदारी का उदाहरण है।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?

यह घटना केवल एक रेस्क्यू तक सीमित नहीं है — यह जंगल में पशु तस्करी, स्थानीय सुरक्षा चुनौतियों और सामाजिक संगठन की सक्रियता से जुड़ी व्यापक समस्या को उजागर करती है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए वन विभाग, पुलिस और समाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय आवश्यक है। साथ ही, स्थानीय जागरूकता बढ़ाकर ऐसे कृत्यों को रोका जा सकता है।

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आगे की सम्भावित कार्रवाई

तस्करों की पहचान और कानूनी कार्रवाई: घटना की विस्तृत जांच कर तस्करों के नेटवर्क का पता लगाया जाना चाहिए।
पशु-सुरक्षा एवं इलाज: बचाये गए पशुओं को सुरक्षित आश्रय, टीकाकरण और आवश्यक पशु-चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए।
स्थानीय जागरूकता अभियान: आस-पास के गांवों में लोगों को ऐसे संदिग्ध मामलों की सूचना देने के बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
समन्वय: वन विभाग, स्थानीय पुलिस और सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त पेट्रोलिंग और सूचना-शेयरिंग पर जोर दिया जाना चाहिए।

कीवर्ड:
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या बचाये गए पशुओं की वर्तमान स्थिति सुरक्षित है?
स्थानीय टीम ने बचाये गए 08 पशुओं को तुरंत पानी व चारा दिया और प्राथमिक देखभाल सुनिश्चित की। आगे आवश्यक पशु-चिकित्सा जांच और सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था सुझायी गयी है।
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2. क्या पुलिस या वन विभाग ने घटना पर कोई आधिकारिक बयान दिया?
घटना की सूचना स्थानीय स्तर पर संबंधित विभागों को देने के साथ ही जांच के लिए पहल की जा रही है। आधिकारिक बयान मिलने पर उसे यहाँ अपडेट किया जाएगा।
3. तस्करी रोकने के लिए स्थानीय लोग क्या कर सकते हैं?
संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत स्थानीय प्रशासन, वन विभाग या किसी सामाजिक संगठन को सूचित करें; सामुदायिक निगरानी और सूचना-नेटवर्क मजबूत करें; रात्री पहरे और पेट्रोलिंग बढ़ाने का सुझाव दें।
4. आप इस खबर के लिए किसे संपर्क कर सकते हैं?
रिपोर्ट में नामित संगठन—सनातन रक्षा दल व श्री राम मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारी इस मामले के प्राथमिक संपर्क हैं। विस्तृत जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन या वन विभाग से संपर्क करें।

रिपोर्टर: सदानंद इंगिली

नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय सूत्रों और मौके पर मौजूद टीम के बयानों पर आधारित है। आगे की आधिकारिक जानकारी मिलने पर लेख अपडेट किया जाएगा।

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