पौष अमावस्या पर चित्रकूट में आस्था का महासंगम
मंदाकिनी स्नान से कामदगिरि परिक्रमा तक उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब




संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
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खोही (चित्रकूट) की धर्मनगरी ने पौष माह की अमावस्या पर एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे न मौसम की मार टिकती है और न ही कठिनाइयों की बाधा। शुक्रवार को अलसुबह से ही रामघाट सहित मंदाकिनी नदी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग दिया। शीतलहर की तीव्रता के बावजूद श्रद्धालु श्रद्धा के साथ मंदाकिनी में डुबकी लगाते नजर आए और सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। यही कारण रहा कि भोर होते ही रामघाट, भरतकूप क्षेत्र, जानकीकुंड और अन्य पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। पुरोहितों के अनुसार इस अमावस्या पर्व पर तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में स्नान किया।

एक दिन पहले से ही उमड़ने लगी थी भीड़

अमावस्या पर्व को लेकर गुरुवार से ही धर्मनगरी में आस्था का प्रवाह तेज हो गया था। रात होते-होते चित्रकूट का हर प्रमुख मार्ग श्रद्धालुओं से भर गया। शुक्रवार तड़के यह दृश्य और भी अलौकिक हो उठा, जब हजारों दीपों, जयकारों और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के बीच श्रद्धालु स्नान के लिए घाटों की ओर बढ़ते दिखे। ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।

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स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने पुरोहितों को दान-दक्षिणा दी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद रामघाट स्थित मतगजेंद्र नाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। शिवालयों में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। इसके पश्चात श्रद्धालु भगवान कामदगिरि के दर्शन के लिए रवाना हुए।

कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। परिक्रमा करते हुए ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं ने अच्छी फसल, परिवार की खुशहाली और रोगों से मुक्ति के लिए प्रार्थना की। रबी की फसल में अच्छी उपज हो, इसके लिए विशेष रूप से किसानों ने कामना की।

प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी रही भारी भीड़

कामदगिरि परिक्रमा के साथ ही श्रद्धालुओं ने जानकीकुंड, सती अनुसूया आश्रम, हनुमानधारा और लक्ष्मण पहाड़ी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। हमीरपुर से आए सोहन तिवारी और कानपुर के श्याम नगर निवासी केशव शुक्ला ने बताया कि चित्रकूट में आकर उन्हें अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई। हनुमानधारा के दर्शन के बाद मन को विशेष संतोष मिला।

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मेले के दौरान कई सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह प्रसाद वितरण किया गया। पुलिस विभाग की ओर से भी मानवता का उदाहरण पेश करते हुए श्रद्धालुओं को पूड़ी-सब्जी वितरित की गई। समाजसेवी राजेश सिंह ने भरत मंदिर के पास तथा रमेश तिवारी ने लक्ष्मण पहाड़ी के समीप प्रसाद वितरण कर पुण्य अर्जित किया।

ठंड के प्रकोप को देखते हुए नगर पालिका परिषद चित्रकूट द्वारा रामघाट, परिक्रमा मार्ग और जिला मुख्यालय के प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई थी। इससे श्रद्धालुओं को काफी राहत मिली। हालांकि अमावस्या के चलते कुछ स्थानों पर ऑटो चालकों की मनमानी भी देखने को मिली, जिससे श्रद्धालुओं और चालकों के बीच हल्की नोकझोंक की स्थिति भी बनी।

सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

मेले की व्यापकता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक सत्यपाल ने मेला क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एलआईयू की टीम भी पूरे समय क्षेत्र में सक्रिय रही। प्रमुख घाटों, परिक्रमा मार्ग और मंदिर परिसरों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे श्रद्धालुओं ने खुद को सुरक्षित महसूस किया।

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कुल मिलाकर पौष अमावस्या पर चित्रकूट में आयोजित यह धार्मिक आयोजन आस्था, व्यवस्था और सामाजिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। मंदाकिनी की लहरों में डूबती-उतराती श्रद्धा, कामदगिरि की परिक्रमा में गूंजते जयकारे और सेवा कार्यों में जुटे हाथ—इन सबने मिलकर इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।

पौष अमावस्या से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व क्या है?

पौष अमावस्या पर स्नान, दान और पूजन करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

चित्रकूट में अमावस्या पर सबसे प्रमुख आयोजन क्या होता है?

मंदाकिनी नदी में स्नान और कामदगिरि की परिक्रमा अमावस्या के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान माने जाते हैं।

मेले में प्रशासन की क्या भूमिका रहती है?

प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, अलाव और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की जाती है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

क्या परिवार के साथ आना सुरक्षित रहता है?

हाँ, पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक निगरानी के कारण परिवार सहित आना सुरक्षित माना जाता है।

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