दर्जनों आधार कार्ड कूड़े में मिलने से हड़कंप, डाक विभाग की भूमिका जांच के घेरे में

कूड़े के ढेर और कुएं में पड़े आधार कार्ड, मौके पर जांच करते पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी।

रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
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दर्जनों आधार कार्ड कूड़े में मिलने से हड़कंप मच गया है और यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित न रहकर डाक व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कुएं, झाड़ियों और कूड़े के ढेर से बड़ी संख्या में आधार कार्ड और डाक पार्सल मिलने के बाद पुलिस व प्रशासन संयुक्त रूप से जांच में जुटे हैं। प्राथमिक तथ्यों से यह स्पष्ट है कि ये ऐसे संवेदनशील दस्तावेज हैं, जिन्हें संशोधन के बाद डाक के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों तक पहुंचाया जाना था, लेकिन किसी स्तर पर गंभीर चूक या लापरवाही हुई।

सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन

आधार कार्ड मिलने की सूचना सामने आते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र की गहन तलाशी ली गई। जांच के दौरान कुएं और झाड़ियों से कुल 56 आधार कार्ड और आठ डाक पार्सल बरामद किए गए, जिन्हें सुरक्षित कब्जे में लेकर सूचीबद्ध किया गया।

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संशोधित आधार कार्ड: डाक प्रणाली पर सवाल

प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि अधिकांश आधार कार्ड संशोधित श्रेणी के हैं। नियमों के अनुसार संशोधित आधार कार्ड सीधे डाक के माध्यम से लाभार्थियों के पते पर भेजे जाते हैं। ऐसे में इन दस्तावेज़ों का खुले में मिलना यह संकेत देता है कि डाक वितरण की प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है, या फिर किसी स्तर पर जानबूझकर इन्हें फेंका गया।

पहले से लंबित शिकायतों ने बढ़ाया शक

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन लोगों के आधार कार्ड बरामद हुए हैं, उनमें से कई ने पहले ही संबंधित विभागों में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें संशोधित आधार कार्ड प्राप्त नहीं हुए। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि आधार कार्ड वितरण में व्यवस्थित स्तर पर गड़बड़ी हो सकती है।

स्थानीय जांच और पूछताछ तेज

स्थानीय स्तर पर राजस्व और पुलिस अधिकारियों ने गांव के लोगों से पूछताछ की और डाक वितरण से जुड़े संभावित मार्गों की जानकारी जुटाई। इसके साथ ही संबंधित डाकघर के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आधार कार्ड किस चरण पर गायब हुए और किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

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डाक विभाग का पक्ष

डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराई जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि आधार कार्ड और पार्सल किस स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर फेंके गए। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नागरिक पहचान और निजता पर खतरा

आधार कार्ड केवल पहचान पत्र नहीं, बल्कि बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे दस्तावेज़ों का खुले में मिलना नागरिकों की निजता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यदि ये दस्तावेज़ गलत हाथों में चले जाएं, तो पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

फिलहाल पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की तह तक जाने में जुटे हैं। चुनौती केवल दोषियों की पहचान करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए डाक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। यह मामला प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी की तरह सामने आया है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कितने आधार कार्ड बरामद हुए हैं?

जांच के दौरान कुल 56 आधार कार्ड और आठ डाक पार्सल बरामद किए गए हैं।

क्या ये आधार कार्ड डाक के जरिए भेजे जाने थे?

हां, अधिकांश आधार कार्ड संशोधित श्रेणी के थे और डाक के माध्यम से लाभार्थियों तक भेजे जाने थे।

डाक विभाग ने क्या कार्रवाई की बात कही है?

डाक विभाग ने विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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