उत्तर प्रदेश बिजली विभाग की मनमानी एक बार फिर ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। राजधानी लखनऊ से सटे ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग के अधिकारियों पर मनमानी, फर्जी वसूली और सरकार की घोषित छूट योजनाओं से उपभोक्ताओं को वंचित करने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश बिजली विभाग की मनमानी ने उन उपभोक्ताओं को भी परेशान कर दिया है, जो समय से बिल भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
सरकार के निर्देश, ज़मीन पर उलटी तस्वीर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से बिजली बिल में छूट की योजना लागू की। सरकार के स्पष्ट निर्देश थे कि 01 दिसंबर से 28 फरवरी तक उपभोक्ताओं को विद्युत बिलों में राहत दी जाएगी, ताकि सर्दियों के मौसम में आर्थिक दबाव कम हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार की घोषित फ्री और छूट योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। विभागीय अधिकारी न तो सही जानकारी दे रहे हैं और न ही समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। नतीजा यह है कि उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
नीवा बन्थरा ग्राम पंचायत का मामला
मामला राजधानी लखनऊ के अंतर्गत ग्राम पंचायत नीवा बन्थरा का है, जहां एक उपभोक्ता बीते कई महीनों से बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। उपभोक्ता के पास 2 किलोवाट का वैध बिजली कनेक्शन है, जिसका कनेक्शन नंबर 1920798000 बताया गया है। उपभोक्ता का कहना है कि वह 22 दिसंबर 2025 से लगातार बिजली बिल भुगतान और छूट के लिए लिखित शिकायतें दे रहा है।
दिनांक 09 जनवरी 2026 तक अधिशासी अभियंता से लेकर उपखंड अधिकारी तक को कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय उपभोक्ता को और अधिक परेशान किया गया।
बिल पर रोक और फिर बिना अनुमति लोड बढ़ोतरी
शिकायत के बाद पहले उपखंड अधिकारी द्वारा उपभोक्ता का बिजली बिल रोक दिया गया। उपभोक्ता को लगा कि शायद अब समस्या का समाधान होगा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद 02 जनवरी 2026 को बिना किसी लिखित अनुमति या सहमति के कनेक्शन का लोड 2 किलोवाट से बढ़ाकर 3 किलोवाट कर दिया गया।
जब उपभोक्ता ने इसका विरोध किया, तो कथित तौर पर उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता ने कहा— “जाओ, तुम्हें छूट नहीं दी जाएगी।” उपभोक्ताओं का आरोप है कि इसी तरह का दबाव बनाकर लाखों ग्रामीण उपभोक्ताओं को सरकारी छूट योजनाओं से वंचित किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में अवैध वसूली का आरोप
ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग में अवैध वसूली खुलेआम जारी है। अधिकारियों द्वारा तकनीकी भाषा और नियमों का डर दिखाकर ग्रामीणों को भ्रमित किया जाता है। कई उपभोक्ता यह भी कहते हैं कि उन्हें जानबूझकर विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगवाए जाते हैं ताकि वे थक-हारकर अतिरिक्त भुगतान करने को मजबूर हो जाएं।
बन्थरा गैहरू पावरहाउस से जुड़े सैकड़ों ग्राम पंचायतों के उपभोक्ता इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों में दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में ग्रामीण उपभोक्ता उनसे वंचित हैं।
प्रशासनिक चुप्पी और बढ़ता आक्रोश
स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक है कि उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली विभाग के अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगाया गया और उपभोक्ताओं को उनका अधिकार नहीं मिला, तो आने वाले समय में इसका व्यापक विरोध देखने को मिल सकता है।
यह सिर्फ एक उपभोक्ता की कहानी नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों की सच्चाई है, जहां योजनाएं हैं लेकिन उनका लाभ नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या सरकार ने बिजली बिल में छूट की योजना घोषित की है?
हाँ, प्रदेश सरकार ने 01 दिसंबर से 28 फरवरी तक बिजली बिल में छूट देने के निर्देश जारी किए हैं।
ग्रामीण उपभोक्ताओं को छूट क्यों नहीं मिल पा रही?
ग्रामीण उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मनमानी, लापरवाही और अवैध वसूली के कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
बिना अनुमति लोड बढ़ाना क्या नियमसंगत है?
नहीं, उपभोक्ता की लिखित सहमति के बिना लोड बढ़ाना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
उपभोक्ता अपनी शिकायत कहां दर्ज करा सकते हैं?
उपभोक्ता बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों, उपभोक्ता फोरम और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।










