संविधान बचाओ संवाद सेवता से सियासी चेतावनी

संविधान बचाओ संवाद कार्यक्रम की सांकेतिक फीचर इमेज, जिसमें भारतीय संविधान, तिरंगा और जनसभा के माध्यम से लोकतंत्र व संविधान की रक्षा का संदेश दर्शाया गया है।

सुनील शुक्ला की रिपोर्ट
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संविधान बचाओ संवाद के तहत सीतापुर जनपद के सेवता क्षेत्र के मोइया गांव में आयोजित जनसभा ने स्थानीय राजनीति के साथ-साथ प्रदेश और राष्ट्रीय विमर्श में भी नई हलचल पैदा कर दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल सांसद राकेश राठौर ने तीखे शब्दों में कहा कि सेवता विधानसभा को जातीय विद्वेष, धार्मिक उन्माद और उत्पात की राजनीति का केंद्र बनाने वाले तानाशाही मंसूबों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। उन्होंने 24 जनवरी को होने वाले “संविधान बचाओ संवाद” को इस बदलाव का प्रस्थान बिंदु बताया।

“देश गहरे राजनीतिक संकट में, समाधान लोकतांत्रिक मूल्यों से”

जनसभा को संबोधित करते हुए सांसद राकेश राठौर ने कहा कि देश इस समय गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक समरसता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे समय में राहुल गांधी का नेतृत्व देश को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। राठौर ने कहा कि “राहुल गांधी ही आज के गांधी हैं” और उनके नेतृत्व में ही देश इस संकट से बाहर निकलने का रास्ता खोज सकता है।

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सेवता को उन्माद की प्रयोगशाला बनाने की साजिश का आरोप

सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें सेवता विधानसभा को गुजरात मॉडल की तर्ज पर साम्प्रदायिक उन्माद और सामाजिक तनाव की प्रयोगशाला बनाना चाहती हैं। राठौर ने कहा कि यह राजनीति न विकास देती है और न ही रोजगार, बल्कि समाज को बांटकर सत्ता साधने का काम करती है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को समझें और ऐसी राजनीति को नकारें।

“24 जनवरी बनेगा बदलाव की शुरुआत”

राकेश राठौर ने 24 जनवरी को होने वाले संविधान बचाओ संवाद को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि इसी दिन से सेवता की राजनीति में नया अध्याय शुरू होगा, जहां नफरत की जगह संवाद और डर की जगह विश्वास होगा। कार्यक्रम को उन्होंने “जन-जागरण का अभियान” बताया।

स्थानीय दौरों से मिला जनसमर्थन

जनसभा से पहले सांसद राठौर का मंगू चौराहा पर भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने भागूपुरवा, धनावा और कलिमापुर में आयोजित जनसभाओं को भी संबोधित किया। इन दौरों के दौरान स्थानीय लोगों ने संविधान बचाओ संवाद के प्रति उत्साह दिखाया और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई।

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संविधान और लोकतंत्र की रक्षा पर जोर

सभा में वक्ताओं ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। इसे कमजोर करने का अर्थ है नागरिक अधिकारों को कमजोर करना। राठौर ने कहा कि आज जरूरत है कि गांव-गांव, गली-गली संविधान के मूल्यों पर संवाद हो, ताकि समाज को बांटने वाली राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक चेतना से दिया जा सके।

युवा, किसान और वंचित वर्ग पर फोकस

संविधान बचाओ संवाद में युवाओं, किसानों और वंचित वर्गों की भागीदारी को खास महत्व दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा जरूरी है। राठौर ने कहा कि जब तक इन वर्गों की आवाज को सुना नहीं जाएगा, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।

राजनीतिक संदेश से आगे सामाजिक अपील

कार्यक्रम का संदेश केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि सामाजिक भी था। वक्ताओं ने जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और इसी समानता की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

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भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक विस्तार

सभा के अंत में संगठनात्मक मजबूती पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि संविधान बचाओ संवाद को एक सतत अभियान के रूप में चलाया जाएगा, जिसमें बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य केवल चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक लड़ाई को मजबूत करना है।

निष्कर्ष: सेवता से उठा संविधान का स्वर

मोइया गांव की यह जनसभा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का सार्वजनिक मंच बनकर उभरी। सांसद राकेश राठौर के तीखे भाषण और जनता की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि सेवता क्षेत्र में राजनीतिक विमर्श नई दिशा ले रहा है। 24 जनवरी का संविधान बचाओ संवाद इस बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

संविधान बचाओ संवाद क्या है?

यह एक जनसंवाद अभियान है, जिसका उद्देश्य संविधान के मूल्यों, लोकतंत्र और सामाजिक समरसता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

सेवता में यह कार्यक्रम क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

क्योंकि इसे जातीय और साम्प्रदायिक राजनीति के खिलाफ जन-जागरण के रूप में देखा जा रहा है।

24 जनवरी की तारीख का क्या महत्व है?

इसे संविधान बचाओ संवाद के औपचारिक प्रस्थान बिंदु के रूप में चिन्हित किया गया है।

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