खैराबाद बिजली कटौती ने सीतापुर के ग्रामीण इलाकों में सामान्य जनजीवन को ठप कर दिया है। विद्युत उपकेंद्र बरई जलालपुर से जुड़े बनका जलालपुर, दहेलिया निरंजन और चंदीपुर गांवों में लगातार दो दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है। करीब तीन हजार की आबादी अंधेरे में है, जबकि शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हो सका।
अचानक गुल हुई आपूर्ति, बढ़ती गई परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, दो दिन पहले अचानक बिजली चली गई। शुरुआत में इसे सामान्य फॉल्ट समझकर इंतजार किया गया, लेकिन समय बीतने के साथ परेशानी बढ़ती गई। शाम ढलते ही गांवों में अंधेरा पसर गया और घरेलू कामकाज से लेकर आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने लगीं।
तीन गांव, तीन हजार लोग और ठप होती दिनचर्या
बनका जलालपुर, दहेलिया निरंजन और चंदीपुर गांवों की संयुक्त आबादी लगभग तीन हजार है। इन गांवों में पानी की आपूर्ति मोटरों पर निर्भर है, जो बिजली न होने से बंद पड़ी हैं। मोबाइल चार्जिंग, पंखे, रोशनी और संचार—सब कुछ प्रभावित है। खैराबाद बिजली कटौती ने ग्रामीण जीवन की बुनियादी जरूरतों को संकट में डाल दिया है।
खेती, छोटे व्यवसाय और पढ़ाई पर असर
किसानों को सिंचाई में दिक्कतें आ रही हैं। आटा चक्की, दूध संग्रहण, किराना दुकानें और छोटे कारीगरों का काम ठप पड़ गया है। विद्यार्थियों के लिए रात में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। लगातार कटौती से आर्थिक नुकसान भी बढ़ रहा है।
शिकायतें दर्ज, लेकिन जवाब नदारद
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन फोन नहीं उठाए गए। स्थानीय स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, फिर भी न तो कोई तकनीकी टीम पहुंची और न ही आपूर्ति बहाल होने की समयसीमा बताई गई। यह उदासीनता आक्रोश को और बढ़ा रही है।
ग्रामीणों की आवाज़: जवाबदेही तय हो
अखिलेश यादव, विक्रम पाल, तेजपाल, धर्मेंद्र, चंद्रकेत, अरुण तिवारी और मौजीराम सहित अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि खैराबाद बिजली कटौती का तत्काल समाधान हो और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाए।
तकनीकी कारण या प्रबंधन की लापरवाही?
जानकारों के मुताबिक, फीडर ओवरलोड, जर्जर तार, ट्रांसफॉर्मर फॉल्ट या नियमित रखरखाव की कमी ऐसे संकट की वजह बनती है। यदि समस्या गंभीर है, तो विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह स्पष्ट सूचना दे और समयबद्ध मरम्मत कराए।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की दरकार
जिले में बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए तंत्र मौजूद है, इसके बावजूद दो दिनों तक अंधेरा रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द संज्ञान लेकर आपूर्ति बहाल कराएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन-कौन से गांव प्रभावित हैं?
बरई जलालपुर फीडर से जुड़े बनका जलालपुर, दहेलिया निरंजन और चंदीपुर गांव।
कितने समय से बिजली गुल है?
लगातार दो दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है।
ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
तत्काल बिजली बहाली और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
कुल मिलाकर, खैराबाद बिजली कटौती ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं की नाजुक स्थिति उजागर की है। अब देखना होगा कि प्रशासन और विद्युत विभाग कब तक अंधेरे में फंसी इन बस्तियों को राहत दे पाते हैं।










