सीतापुर बरमबाबा चबूतरा विवाद — निर्माणाधीन नींव को लेकर उधवापुर गांव में बढ़ा तनाव

सीतापुर के उधवापुर गांव में निर्माणाधीन बरमबाबा चबूतरे की क्षतिग्रस्त नींव, पैमाइश करते अधिकारी और विरोध में खड़े ग्रामीणों का कोलाज दृश्य।

रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
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सीतापुर बरमबाबा चबूतरा विवाद उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब ऐलिया विकास खंड के मलिकापुर ग्राम पंचायत अंतर्गत उधवापुर गांव में एक निर्माणाधीन धार्मिक चबूतरे की नींव को लेकर ग्रामीणों और राजस्व विभाग के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। आरोप है कि राजस्व टीम के साथ पहुंचे स्थानीय लेखपाल ने बरमबाबा के चबूतरे की नींव को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश फैल गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

ग्रामीण सहयोग से हो रहा था निर्माण

उधवापुर गांव में बरमबाबा का स्थान वर्षों से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से यहां एक स्थायी चबूतरे के निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से गांव के लोगों ने आपसी सहयोग और चंदे से चबूतरे की नींव भरने का कार्य शुरू कराया था। निर्माण कार्य शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था और किसी प्रकार का विरोध सामने नहीं आया था।

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राजस्व टीम के पहुंचते ही बदला माहौल

ग्रामीणों के अनुसार, इसी दौरान राजस्व टीम के साथ लेखपाल राजीव कुमार यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने जमीन की पैमाइश का हवाला देते हुए निर्माण को अवैध बताया और कार्य रोकने के निर्देश दिए। अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर मौजूद ग्रामीणों में असमंजस और नाराजगी दोनों देखी गई।

नींव क्षतिग्रस्त करने का आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि बातचीत के दौरान लेखपाल राजीव कुमार यादव आवेश में आ गए और उन्होंने जूते पहने हुए ही निर्माणाधीन चबूतरे की नींव पर पैर चला दिए, जिससे ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए और माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।

लेखपाल का पक्ष: आरोपों से इनकार

जब इस संबंध में लेखपाल राजीव कुमार यादव से बात की गई, तो उन्होंने नींव को पैरों से तोड़े जाने के आरोप से इनकार किया। उनका कहना है कि उन्होंने अवैध निर्माण को हटाने के लिए हाथों से मिट्टी हटाई थी और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन के तहत ही मौके पर पहुंचे थे।

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ग्रामीणों का आरोप: आस्था पर प्रहार

ग्रामीण आयुष राठौर, जयराम राठौर, रामगोपाल, सुचित्र और प्रभुदयाल सहित अन्य लोगों का कहना है कि यदि जमीन को लेकर कोई विवाद था, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि चबूतरे की नींव को पैरों से क्षतिग्रस्त करना न केवल सरकारी पद का दुरुपयोग है, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार भी है।

नारेबाजी और कार्रवाई की मांग

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी और जिला प्रशासन से लेखपाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने तत्काल निलंबन, निष्पक्ष जांच और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई। कुछ समय के लिए गांव में तनाव का माहौल बना रहा।

प्रशासन के लिए चुनौती बना मामला

सीतापुर बरमबाबा चबूतरा विवाद ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की वैधानिक स्थिति का प्रश्न है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे मामलों में संतुलित और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

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आगे क्या? निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर

फिलहाल ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, गांव में शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर समझाइश के प्रयास भी किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।

विवाद किस गांव से जुड़ा है?

ऐलिया विकास खंड के मलिकापुर ग्राम पंचायत अंतर्गत उधवापुर गांव से।

ग्रामीणों ने किस पर आरोप लगाया है?

स्थानीय लेखपाल राजीव कुमार यादव पर निर्माणाधीन चबूतरे की नींव क्षतिग्रस्त करने का आरोप है।

लेखपाल का क्या कहना है?

उन्होंने पैरों से नींव तोड़ने के आरोप से इनकार किया है।

ग्रामीण क्या मांग कर रहे हैं?

लेखपाल के निलंबन, निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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