सीतापुर में नकली नोट के खिलाफ चल रही सतत निगरानी को रविवार को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब थाना बिसवां पुलिस ने गुलजारशाह मेले के दौरान 77,500 रुपये के जाली नोटों के साथ एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। भीड़-भाड़ वाले आयोजनों को निशाना बनाकर नकली मुद्रा खपाने की इस साजिश का पर्दाफाश पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का परिणाम बताया जा रहा है।
मेले की रौनक के बीच संदिग्ध हरकतें
रविवार को गुलजारशाह मेले में दूर-दराज़ से आए लोगों की भीड़ उमड़ी थी। खरीदारी, झूले और खानपान के बीच कुछ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहुंची। बताया गया कि कुछ पुरुष और महिलाएं छोटे-छोटे लेन-देन में नकली नोट चला रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मेले के आसपास निगरानी बढ़ाई और संदिग्धों की पहचान के लिए रणनीति बनाई।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुई पुलिस टीम
एएसपी उत्तरी आलोक सिंह और सीओ बिसवां अमन सिंह के नेतृत्व में थाना बिसवां की पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ग्राम सत्तिनपुरवा के पास घेराबंदी की। पुलिस ने भीड़ में घुल-मिलकर संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी और उचित समय पर दबिश देकर एक पुरुष और एक महिला को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अमित भार्गव पुत्र रामनरायन निवासी ग्राम शंकरपुर मजरा कन्दुनी, थाना रामपुरकलां और सोनेश्वरी भार्गव पत्नी सुशील कुमार निवासी ग्राम हथिया मल्हपुर, थाना इमलिया सुल्तानपुर के रूप में हुई। दोनों के खिलाफ नकली मुद्रा चलाने और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है।
बरामदगी: नकली और असली नोट, मोबाइल फोन
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 77,500 रुपये के नकली नोट बरामद किए। इसके साथ ही 5,000 रुपये के असली नोट और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। पुलिस का मानना है कि मोबाइल फोन के माध्यम से नेटवर्क और सप्लाई चेन से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।
पूछताछ में नेटवर्क का खुलासा
प्रारंभिक पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे काफी समय से नकली नोट प्राप्त कर भीड़-भाड़ वाले बाजारों और मेलों में उन्हें चलाते आ रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि गिरोह का एक सरगना जनपद देवरिया का रहने वाला है, जो लखनऊ और दिल्ली में भी रहता है और पेशे से डॉक्टर बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
भीड़-भाड़ वाले आयोजनों को क्यों बनाया जाता है निशाना?
विशेषज्ञों के अनुसार, मेलों और बाजारों में लेन-देन तेज़ होता है और दुकानदार अक्सर जल्दबाज़ी में नोटों की बारीकी से जांच नहीं कर पाते। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर नकली नोट चलाने वाले गिरोह सक्रिय रहते हैं। पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे नेटवर्क के लिए स्पष्ट संदेश मानी जा रही है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने अभियुक्तों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चालान न्यायालय भेज दिया है। एएसपी आलोक सिंह के अनुसार, अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाकर आगे निरोधात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। सरगना और अन्य सहयोगियों की तलाश के लिए टीमों को सक्रिय किया गया है।
आम लोगों के लिए चेतावनी और पुलिस की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों और दुकानदारों से अपील की है कि बड़े आयोजनों और मेलों में लेन-देन के दौरान नोटों की जांच अवश्य करें। संदिग्ध नोट मिलने पर तुरंत नज़दीकी थाना या पुलिस हेल्पलाइन को सूचित करें, ताकि नकली मुद्रा के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
कितनी राशि के नकली नोट बरामद हुए?
पुलिस ने 77,500 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
अमित भार्गव और सोनेश्वरी भार्गव, दोनों अलग-अलग थाना क्षेत्रों के निवासी हैं।
क्या नेटवर्क के सरगना का पता चला है?
पूछताछ में एक सरगना का उल्लेख हुआ है, जिसकी तलाश जारी है।
आगे क्या कार्रवाई होगी?
न्यायालय में चालान पेश किया गया है और नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।










