
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था अब उपभोक्ताओं के लिए सुविधा से अधिक संकट का कारण बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश भर में लाखों बिजली उपभोक्ता इन दिनों ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां पैसे जमा करने के बावजूद उनके घरों की बिजली बहाल नहीं हो पा रही है। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि व्यापक जन असंतोष का रूप ले चुकी है, जिससे आम जनता में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
नेगेटिव बैलेंस में कनेक्शन कटे
स्मार्ट प्रीपेड मीटर के तहत जैसे ही उपभोक्ताओं का बैलेंस शून्य या नेगेटिव में गया, बड़ी संख्या में उनके बिजली कनेक्शन स्वतः काट दिए गए। बताया जा रहा है कि 14 मार्च को पूरे प्रदेश में 50 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन इस प्रक्रिया के तहत प्रभावित हुए।
हालांकि इसके बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपने बकाया बिलों का भुगतान भी किया, लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। भुगतान के बावजूद बिजली कनेक्शन बहाल नहीं हो सके, जिससे लोगों को अंधेरे और परेशानी का सामना करना पड़ा।
रिचार्ज हुआ, लेकिन सिस्टम ने नहीं माना
उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि उन्होंने समय पर भुगतान किया, लेकिन रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम (आरएमएस) में रिचार्ज सिंक न होने के कारण उनके कनेक्शन दोबारा चालू नहीं हुए। कई उपभोक्ताओं के मोबाइल पर भुगतान की पुष्टि होने के बावजूद बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई।
इस तकनीकी गड़बड़ी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। लोग न तो दोबारा भुगतान कर पा रहे हैं और न ही बिजली प्राप्त कर पा रहे हैं, जिससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
प्रदेश भर में आक्रोश
इस समस्या को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी एयर कंडीशन कमरों में बैठकर जमीनी समस्याओं से अनजान बने हुए हैं, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। कई जगहों पर लोग बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिल पा रहा है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाई आवाज
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रदेश में फैले जन आक्रोश की जानकारी दी और तत्काल समाधान की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि बरेली में आयोजित होने वाली बिजली दर की सुनवाई में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा और सरकार से इस दिशा में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
नियामक आयोग से हस्तक्षेप की मांग
अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात कर इस विषय पर लोक महत्व का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम भी है, जिसे तुरंत सुधारा जाना आवश्यक है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मांग की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली को तत्काल दुरुस्त कराएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
मुआवजे की मांग तेज
उपभोक्ता परिषद ने यह भी मांग उठाई है कि जिन उपभोक्ताओं को इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा है, उन्हें मुआवजा दिया जाए। इसके लिए विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस कानून-2019 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही यह सुझाव भी दिया गया है कि जिन उपभोक्ताओं का बैलेंस माइनस में चला गया है, उन्हें पोस्टपेड उपभोक्ता मानते हुए किस्तों में भुगतान की सुविधा दी जाए, ताकि उन पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े।
तकनीकी व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस व्यवस्था को पारदर्शिता और सुविधा के लिए लागू किया गया था, वही अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी ढांचा मजबूत नहीं किया गया और समय पर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इस प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है।
अंत में…
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उत्पन्न यह संकट केवल बिजली आपूर्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और तकनीकी दक्षता की भी परीक्षा है। जब भुगतान के बाद भी उपभोक्ता अंधेरे में रहने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कितनी तेजी और प्रभावशीलता से करते हैं, ताकि जनता का विश्वास दोबारा स्थापित हो सके।
FAQ
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में समस्या क्या है?
रिचार्ज के बाद भी आरएमएस सिस्टम में डेटा सिंक न होने के कारण बिजली कनेक्शन बहाल नहीं हो पा रहे हैं।
कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं?
लगभग 50 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन प्रभावित होने की बात सामने आई है।
उपभोक्ताओं की क्या मांग है?
उपभोक्ता मुआवजा, तकनीकी सुधार और किस्तों में भुगतान की सुविधा की मांग कर रहे हैं।










