
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एटीएस ने बलरामपुर से धर्मांतरण का संगठित सिंडिकेट चलाने वाले छांगुर उर्फ जलालुद्दीन के करीबी और सक्रिय सदस्य ईदुल इस्लाम को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है, जहां उससे लंबी और गहन पूछताछ की तैयारी है।
लंबे समय से निगरानी में था आरोपी
एटीएस सूत्रों के अनुसार, ईदुल इस्लाम पर लंबे समय से खुफिया नजर रखी जा रही थी। उसके खिलाफ माननीय विशेष न्यायालय एटीएस/एनआईए, लखनऊ से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी हो चुका था। इसके बाद से वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। तकनीकी सर्विलांस और इनपुट के आधार पर जब उसकी लोकेशन नागपुर में ट्रेस हुई, तो एटीएस की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे दबोच लिया।
गंभीर धाराओं में दर्ज है मुकदमा
ईदुल इस्लाम नागपुर के आसी नगर क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। उसके खिलाफ एटीएस थाने में दर्ज मुकदमे में कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 121A (देशद्रोह की साजिश), धारा 153A (सांप्रदायिक विद्वेष फैलाना), धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि-विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 की धाराएं शामिल हैं। इन धाराओं के तहत सख्त सजा का प्रावधान है।
‘भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ’ की आड़ में फैलाया नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि ईदुल इस्लाम नागपुर में ‘भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ’ नामक एक संगठन संचालित कर रहा था। इसी संगठन की आड़ में अवैध धर्मांतरण गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। एटीएस का दावा है कि संगठन की आंतरिक संरचना, पदों का बंटवारा और कथित सामाजिक कार्यों के नाम पर लोगों को प्रभाव में लेकर धर्मांतरण कराया जाता था।
छांगुर को बनाया गया अवध प्रांत का अध्यक्ष
एटीएस जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि ईदुल इस्लाम ने ही ‘भारत प्रतीकार्थ सेवा संघ’ के तहत छांगुर उर्फ जलालुद्दीन को अवध प्रांत का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण नेटवर्क को संगठित और मजबूत करना था। इसी माध्यम से बलरामपुर सहित कई जिलों में नेटवर्क फैलाने की योजना पर काम किया गया।
सिर्फ पदाधिकारी नहीं, सक्रिय संचालक
एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, ईदुल इस्लाम केवल नाममात्र का पदाधिकारी नहीं था। वह छांगुर के अवैध धर्मांतरण गिरोह का सक्रिय सदस्य और रणनीतिक सहयोगी था। जांच में यह भी सामने आया है कि वह सीधे तौर पर धर्मांतरण अभियानों की योजना, संपर्क और संसाधन उपलब्ध कराने में शामिल था।
बैंक लेन-देन से फंडिंग की पुष्टि
जांच एजेंसी को ईदुल इस्लाम और छांगुर उर्फ जलालुद्दीन के बीच हुए बैंक लेन-देन के ठोस सबूत मिले हैं। इन लेन-देन से नेटवर्क की फंडिंग, संसाधनों के हस्तांतरण और विस्तार की पुष्टि होती है। एटीएस अब इन वित्तीय कड़ियों के जरिए पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
NBW के बाद तेज हुई तलाश
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद एटीएस ने ईदुल इस्लाम की तलाश को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा था। कई राज्यों में संभावित ठिकानों की पहचान की गई। अंततः नागपुर में उसकी मौजूदगी की पुष्टि होते ही एटीएस ने बिना देरी किए कार्रवाई की।
पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े राज
एटीएस अधिकारियों का मानना है कि ईदुल इस्लाम से पूछताछ के दौरान अवैध धर्मांतरण नेटवर्क की फंडिंग, विदेशी या अंतरराज्यीय संपर्क, सक्रिय एजेंटों और संभावित नए ठिकानों के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। एजेंसियों को उम्मीद है कि इस गिरफ्तारी से छांगुर सिंडिकेट की बची-खुची कड़ियों तक पहुंच आसान होगी।
आगे और गिरफ्तारियों के संकेत
एजेंसियों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। ईदुल इस्लाम की गिरफ्तारी से मिले सुरागों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं। एटीएस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के दृष्टिकोण से देख रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ईदुल इस्लाम की गिरफ्तारी कहां से हुई?
ईदुल इस्लाम को महाराष्ट्र के नागपुर शहर से एटीएस ने गिरफ्तार किया है।
उस पर कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं?
उस पर देशद्रोह की साजिश, सांप्रदायिक विद्वेष, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और उत्तर प्रदेश विधि-विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 के तहत धाराएं लगी हैं।
छांगुर उर्फ जलालुद्दीन से उसका क्या संबंध है?
ईदुल इस्लाम छांगुर उर्फ जलालुद्दीन के अवैध धर्मांतरण गिरोह का सक्रिय सदस्य और सहयोगी बताया गया है।
इस गिरफ्तारी का आगे क्या असर होगा?
एजेंसियों के अनुसार, इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और आगे और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।










