उत्तर प्रदेश कोहरा हादसा शनिवार सुबह उस वक्त भयावह त्रासदी में बदल गया, जब घने कोहरे और बेहद कम दृश्यता ने सड़कों को खतरनाक बना दिया। उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में एक के बाद एक हुए हादसों में 40 से अधिक वाहन आपस में टकरा गए। इन दुर्घटनाओं में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए। मृतकों में डेढ़ साल की एक मासूम बच्ची भी शामिल है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। कोहरे का असर सिर्फ सड़क यातायात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेलवे संचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और 100 से ज्यादा ट्रेनें देरी से चलीं।
सुबह की शुरुआत, जो मातम में बदल गई
शनिवार तड़के से ही प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में घना कोहरा छाया रहा। कई स्थानों पर दृश्यता 20 से 30 मीटर तक सिमट गई थी। जैसे ही सुबह दफ्तरों, बाजारों और लंबी दूरी के यात्रियों की आवाजाही शुरू हुई, वैसे ही राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख संपर्क मार्ग दुर्घटनाओं के केंद्र बनते चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक सामने आए वाहनों को पहचानने का समय तक नहीं मिला और तेज रफ्तार के कारण टक्करें एक श्रृंखला में बदलती चली गईं।
चेन टक्कर और बिखरता यातायात
कई जिलों में ट्रक, बस, कार और दोपहिया वाहन एक-दूसरे से भिड़ गए। कुछ स्थानों पर चेन टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन सड़क पर पलट गए और उनमें सवार लोग दूर जा गिरे। हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस को कई जगहों पर घंटों तक यातायात रोकना पड़ा, ताकि क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया जा सके और घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।
डेढ़ साल की बच्ची की मौत ने झकझोरा
इन हादसों में सबसे मार्मिक घटना डेढ़ साल की बच्ची की मौत रही। वह अपने परिजनों के साथ यात्रा कर रही थी। कोहरे में हुए टकराव ने परिवार की खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची को गंभीर अंदरूनी चोटें आई थीं और तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। यह घटना सड़क सुरक्षा और कोहरे में सावधानी बरतने की जरूरत को फिर से रेखांकित करती है।
किन जिलों में हालात रहे सबसे ज्यादा खराब
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी, सीतापुर, रायबरेली, फतेहपुर, एटा, इटावा, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, फिरोजाबाद और प्रयागराज जैसे जिलों में हादसों की संख्या अधिक रही। इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम रही, जिससे वाहन चालकों को समय पर प्रतिक्रिया देने का मौका नहीं मिला।
घायलों की हालत और अस्पतालों पर दबाव
हादसों में घायल लोगों को नजदीकी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ट्रॉमा सेंटरों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश घायलों को सिर, सीने और हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं। कुछ मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। एक साथ बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने से अस्पतालों पर दबाव बढ़ा, हालांकि आपात सेवाओं को सक्रिय कर स्थिति संभाली गई।
प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
दुर्घटनाओं की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और राहत दल मौके पर पहुंचे। हाईवे पेट्रोलिंग टीमों को अलर्ट किया गया और यातायात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया। कई जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए और वाहनों की गति सीमित कराई गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि जब तक कोहरा बना रहे, अनावश्यक यात्रा से बचें।
रेलवे पर भी कोहरे की मार
कोहरे का असर रेलवे संचालन पर भी साफ दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश से गुजरने वाली 100 से अधिक ट्रेनें घंटों देरी से चलीं। रेलवे प्रशासन के मुताबिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई प्रमुख ट्रेनों को फरवरी-मार्च तक के लिए रद्द कर दिया गया है। लंबी दूरी की कई ट्रेनें 5 से 10 घंटे तक विलंबित रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्टेशनों पर यात्रियों की परेशानी
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे बड़े स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। बच्चे और बुजुर्ग ठंड में प्लेटफॉर्म पर इंतजार करते नजर आए। कई यात्रियों का कहना था कि ट्रेन रद्द या विलंब की सूचना समय पर नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ गई। रेलवे ने घोषणाओं और डिजिटल बोर्ड के माध्यम से जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के आगे व्यवस्थाएं कम पड़ती दिखीं।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि पश्चिमी विक्षोभ और ठंडी हवाओं के कारण घना कोहरा कई दिनों तक बना रह सकता है। विभाग के अनुसार सुबह और देर रात दृश्यता बेहद कम रहेगी और कुछ इलाकों में शीतलहर भी चल सकती है। लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और सुरक्षित यात्रा के निर्देश दिए गए हैं।
कोहरे में हादसे क्यों बढ़ जाते हैं
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कोहरे में दुर्घटनाओं की मुख्य वजहें दृश्यता में कमी, तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग की आदत और फॉग लाइट का सही उपयोग न होना है। कई हाईवे पर रिफ्लेक्टिव संकेतों की कमी भी हादसों को बढ़ावा देती है। थोड़ी-सी चूक भी ऐसे हालात में बड़े नुकसान का कारण बन जाती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरे में वाहन चलाते समय रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है। अचानक ब्रेक लगाने से बचें और जरूरत पड़ने पर हैजर्ड लाइट का सीमित उपयोग करें। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट और रिफ्लेक्टिव जैकेट पहनने की सलाह दी जाती है।
निष्कर्ष: हर साल वही सवाल
उत्तर प्रदेश कोहरा हादसा सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तैयारी, सड़क सुरक्षा और नागरिक सतर्कता से जुड़े सवालों को सामने लाता है। हर साल सर्दियों में कोहरा जानलेवा साबित होता है, फिर भी हादसों का सिलसिला थमता नहीं। सात जिंदगियां, जिनमें एक मासूम बच्ची भी शामिल है, हमसे जवाब मांगती हैं। सवाल यही है कि क्या इस बार हम सबक लेंगे और आने वाले दिनों में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कोहरे में वाहन चलाते समय सबसे जरूरी सावधानी क्या है?
कोहरे में वाहन चलाते समय रफ्तार कम रखना, फॉग लाइट का सही उपयोग करना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है।
कोहरे के कारण ट्रेनें क्यों रद्द या लेट होती हैं?
कम दृश्यता में ट्रेनों की सुरक्षित संचालन गति कम करनी पड़ती है, जिससे विलंब होता है और कई बार सुरक्षा कारणों से ट्रेनें रद्द करनी पड़ती हैं।
क्या कोहरे में यात्रा से बचना चाहिए?
यदि बहुत जरूरी न हो तो कोहरे में लंबी दूरी की यात्रा से बचना चाहिए और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करना चाहिए।










