गुरुटोला में रोज़ा इफ्तार का आयोजन, सभासद मोहम्मद अफजल ने दिया भाईचारे और एकता का संदेश

आजमगढ़ के गुरुटोला क्षेत्र में रमज़ान के दौरान लंबी पंक्ति में बैठकर रोज़ा इफ्तार करते स्थानीय लोग

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🖊️ जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट

रमज़ान की बरकतों के बीच आयोजित हुआ इफ्तार कार्यक्रम

आजमगढ़ शहर के गुरुटोला क्षेत्र में रमज़ान के मुक़द्दस महीने के अवसर पर एक विशेष रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन गुरुटोला के सभासद मोहम्मद अफजल द्वारा कराया गया, जिसमें मोहल्ले ही नहीं बल्कि नगर के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर बड़े-बुज़ुर्ग, नौजवान और बच्चे सभी एक साथ बैठकर रोज़ा इफ्तार करते दिखाई दिए, जिससे पूरे वातावरण में भाईचारे और आपसी सौहार्द की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

रमज़ान का महीना इस्लाम धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे इबादत, सब्र और इंसानियत का महीना माना जाता है। इसी भावना के साथ गुरुटोला में आयोजित इस इफ्तार कार्यक्रम ने लोगों को एक साथ बैठकर रोज़ा खोलने का अवसर प्रदान किया, जिससे सामाजिक एकता और आपसी प्रेम का संदेश भी मजबूत हुआ।

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एक साथ बैठकर इफ्तार करने की परंपरा

रमज़ान के महीने में सामूहिक रूप से इफ्तार करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में आपसी मेलजोल और भाईचारे को बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। गुरुटोला में आयोजित इस कार्यक्रम में भी यही भावना देखने को मिली, जहां अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोग एक ही पंक्ति में बैठकर रोज़ा खोलते नजर आए।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और लोगों के बीच प्रेम व विश्वास को मजबूत करते हैं। रमज़ान के पवित्र महीने में इस तरह का आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक बन जाता है।

सभासद अफजल ने जताया आभार

कार्यक्रम के आयोजक और गुरुटोला के सभासद मोहम्मद अफजल ने इफ्तार कार्यक्रम में शामिल हुए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रमज़ान का महीना बरकतों और रहमतों का महीना होता है और इस महीने में एक-दूसरे के साथ बैठकर इफ्तार करना केवल एक परंपरा नहीं बल्कि मोहब्बत और भाईचारे का खूबसूरत पैगाम भी है।

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उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में नगर के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों की मौजूदगी ने इस इफ्तार को और भी खास और यादगार बना दिया। अफजल ने सभी साथियों और सहयोगियों का धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति से इस आयोजन की रौनक और भी बढ़ गई।

अमन और भाईचारे की दुआ

इफ्तार के दौरान लोगों ने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह सभी रोजेदारों के रोज़े, इबादत और दुआओं को कबूल फरमाए। साथ ही नगर और पूरे समाज में अमन, शांति और भाईचारा कायम रखने की भी प्रार्थना की गई। रमज़ान का महीना इंसान को आत्मसंयम और आध्यात्मिकता की राह पर चलने की प्रेरणा देता है और यही संदेश इस आयोजन में भी देखने को मिला।

कार्यक्रम में मौजूद बुजुर्गों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं तो आपसी दूरी कम होती है और विश्वास बढ़ता है।

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सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बना आयोजन

गुरुटोला में आयोजित यह इफ्तार कार्यक्रम सामाजिक सौहार्द और सामुदायिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। रमज़ान के इस पवित्र अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर यह संदेश दिया कि समाज की मजबूती आपसी प्रेम और सहयोग से ही संभव है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं होते बल्कि समाज को जोड़ने वाले अवसर भी होते हैं। इससे लोगों के बीच संवाद बढ़ता है और सामाजिक रिश्ते मजबूत होते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

इफ्तार क्या होता है?

इफ्तार वह समय होता है जब रमज़ान के दौरान रोज़ा रखने वाले मुसलमान सूर्यास्त के बाद अपना रोज़ा खोलते हैं। आमतौर पर खजूर और पानी से रोज़ा खोला जाता है।

रमज़ान का महीना क्यों महत्वपूर्ण है?

रमज़ान इस्लाम धर्म में इबादत, आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति का महीना माना जाता है, जिसमें मुसलमान रोज़ा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं।

सामूहिक इफ्तार का महत्व क्या है?

सामूहिक इफ्तार समाज में भाईचारे, एकता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करता है तथा लोगों को एक साथ जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।

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