भरतपुर में घी कारोबारी पर आयकर विभाग की रेड — मकान और दुकान पर एक साथ कार्रवाई, दस्तावेजों की गहन जांच

भरतपुर में आयकर विभाग की रेड के दौरान बंद पड़ी दाऊ जी मिल्क फूड प्राइवेट लिमिटेड की दुकान का दृश्य।


हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
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भरतपुर में घी कारोबारी पर आयकर विभाग की रेड से शुक्रवार अपरान्ह शहर में हड़कंप मच गया। आयकर विभाग की टीम ने एक साथ घी कारोबारी के आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर छापेमारी कर दस्तावेजों की सघन जांच शुरू की। कार्रवाई की भनक लगते ही इलाके में भीड़ जमा हो गई और प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

राजस्थान के भरतपुर जिले में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब आयकर विभाग की अलग-अलग टीमों ने शहर के प्रमुख इलाकों में एक प्रसिद्ध घी कारोबारी के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही वित्तीय जांच और पूर्व में सामने आए खाद्य पदार्थों से जुड़े गंभीर आरोपों की कड़ी में की गई है। आयकर विभाग की इस रेड को हाल के वर्षों की सबसे अहम आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है।

शहर के दो प्रमुख ठिकानों पर एक साथ दबिश

प्राप्त जानकारी के अनुसार आयकर विभाग की एक टीम भरतपुर शहर के बिजली घर चौराहे पर स्थित घी कारोबारी प्रेमचंद की दाऊ जी मिल्क फूड प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्म पर पहुंची, जहां व्यावसायिक रिकॉर्ड, लेखा-जोखा, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डाटा की गहन जांच की जा रही है। वहीं दूसरी टीम गोलबाग रोड स्थित उनके आवास पर पहुंची, जहां मकान को अंदर से बंद कर सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

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सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी, लेकिन जैसे ही आसपास के लोगों को इसकी भनक लगी, मौके पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी। सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय पुलिस बल भी तैनात किया गया, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

पिछली छापेमारी से जुड़ते हैं मौजूदा तार

इस आयकर रेड को पिछले वर्ष हुई बड़ी कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि गत वर्ष 3 नवंबर को महुआ क्षेत्र में स्थित घी कारोबारी के मिल्क फूड प्रोसेसिंग प्लांट पर नकली देशी घी और वटर बनाए जाने की शिकायत पर छापेमारी की गई थी। उस दौरान कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा स्वयं मौके पर पहुंचे थे और खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

बताया जाता है कि उस कार्रवाई के बाद विभिन्न विभागों की जांच रिपोर्ट्स तैयार हुईं और उन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर आयकर विभाग ने वित्तीय अनियमितताओं की अलग से पड़ताल शुरू की। मौजूदा रेड को उसी जांच प्रक्रिया का अगला और निर्णायक चरण माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के आगरा तक फैली जांच

सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि घी कारोबारी प्रेमचंद की उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित फर्म पर भी आयकर विभाग द्वारा समानांतर कार्रवाई की जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि कारोबारी नेटवर्क और लेन-देन की व्यापक श्रृंखला को खंगाला जा रहा है।

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आयकर विभाग की यह रणनीति दर्शाती है कि जांच एजेंसियां अब अंतरराज्यीय व्यापारिक गतिविधियों को भी एकीकृत दृष्टि से देख रही हैं, ताकि किसी भी तरह की कर चोरी या अवैध वित्तीय प्रवाह को उजागर किया जा सके।

दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और लेन-देन पर फोकस

जानकारी के अनुसार आयकर विभाग की टीमें बैंक खातों, कैश ट्रांजैक्शन, निवेश, संपत्तियों के दस्तावेज और डिजिटल अकाउंटिंग सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही हैं। इसके साथ ही पिछले कई वर्षों के आय-व्यय विवरण और टैक्स रिटर्न का भी मिलान किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई आमतौर पर तब होती है, जब विभाग को आय से अधिक संपत्ति, टैक्स चोरी या फर्जी लेन-देन के ठोस संकेत मिलते हैं। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक हलचल

भरतपुर में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हैं। खाद्य पदार्थों की शुद्धता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला होने के कारण यह विषय पहले से ही संवेदनशील रहा है। अब आयकर विभाग की रेड ने पूरे प्रकरण को आर्थिक अपराध के दायरे में भी ला खड़ा किया है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से ईमानदार कारोबारियों को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो नियमों को ताक पर रखकर मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं।

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आगे क्या हो सकता है?

आयकर विभाग की जांच पूरी होने के बाद यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो भारी जुर्माना, टैक्स रिकवरी और कानूनी कार्रवाई संभव है। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो कारोबारी को क्लीन चिट भी मिल सकती है। फिलहाल विभागीय अधिकारी किसी भी तरह की आधिकारिक टिप्पणी से बच रहे हैं।

स्पष्ट है कि भरतपुर में घी कारोबारी पर आयकर विभाग की रेड केवल एक छापेमारी नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, आर्थिक पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती से जुड़ा एक व्यापक संदेश है, जिसका असर आने वाले दिनों में और साफ नजर आएगा।

पाठकों के सवाल (FAQ)

आयकर विभाग की रेड क्यों डाली जाती है?

जब आयकर विभाग को टैक्स चोरी, आय से अधिक संपत्ति या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के संकेत मिलते हैं, तब वह जांच के लिए रेड करता है।

क्या यह कार्रवाई पिछली नकली घी जांच से जुड़ी है?

सूत्रों के अनुसार मौजूदा रेड का संबंध पिछले वर्ष हुई खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई और उसके बाद की जांच रिपोर्ट्स से है।

रेड के बाद क्या परिणाम हो सकते हैं?

जांच में अनियमितता मिलने पर जुर्माना, टैक्स रिकवरी और कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जबकि आरोप गलत पाए जाने पर क्लीन चिट भी संभव है।


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