“72 करोड़ की फोर-लेन सड़क” पर श्रेय-युद्ध, गुटबाजी और जनहित का सवाल उठता रहा सालभर


अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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हरदोई फोर लेन सड़क विवाद 2025

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की राजनीति में वर्ष 2025 की सबसे ज्यादा चर्चा जिस एक घटनाक्रम ने पैदा की, वह किसी चुनावी नतीजे, किसी बड़े दल-बदल या किसी सनसनीखेज बयान तक सीमित नहीं था—बल्कि वह “विकास” के प्रतीक माने जाने वाले एक सड़क-परियोजना के इर्द-गिर्द खड़ा हुआ श्रेय-संघर्ष था। पिहानी चुंगी से लखनऊ रोड पर खेतुई तक सड़क को चौड़ा/फोर-लेन कराने के प्रस्तावित कार्य को लेकर स्थानीय राजनीति में जो उबाल आया, उसने हरदोई में सत्ता-तंत्र, संगठन, जनप्रतिनिधियों की प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया-राजनीति—चारों को एक साथ बेनकाब कर दिया।

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यह घटना इसलिए “चर्चित” बनी क्योंकि इसमें विकास की जरूरत, प्रशासनिक प्रक्रिया, बजट-मंजूरी की वास्तविक स्थिति और नेताओं के समर्थक-तंत्र द्वारा चलाए गए नैरेटिव—सब कुछ एक ही समय में सामने आया। और सबसे अहम बात: जिस काम की स्वीकृति/बजट अभी औपचारिक रूप से अंतिम चरण में था, उसके श्रेय की लड़ाई उसी वक्त शुरू हो गई—यही इस पूरे प्रकरण का मूल राजनीतिक अर्थ है।

सड़क नहीं, “सियासी अखाड़ा”: घटना का केंद्र क्या था?

हरदोई शहर में पिहानी चुंगी से खेतुई तक का हिस्सा (लगभग 10–10.5 किमी के आसपास बताया गया) लंबे समय से यातायात, जाम और बदहाल सड़क-स्थिति को लेकर स्थानीय असंतोष का विषय रहा। इसी हिस्से के चौड़ीकरण/डिवाइडर/फोर-लेन जैसे काम की चर्चा 2025 में अचानक “राजनीतिक अखाड़े” में बदल गई।

एक तरफ सदर विधायक और प्रदेश सरकार में आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल का पक्ष/समर्थक-नैरेटिव था, दूसरी तरफ हरदोई के सांसद जय प्रकाश रावत का पक्ष/समर्थक-नैरेटिव। दोनों ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद/आभार जताते हुए अपने-अपने तरीके से यह संदेश दिया कि यह कार्य उनकी पहल/प्रयास का नतीजा है—और यहीं से समर्थकों के बीच “कौन लाया—कौन दिलाया” की लड़ाई भड़क उठी।

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इस प्रकरण की खास बात यह रही कि बहस सड़क से शुरू होकर “राजनीतिक वर्चस्व” और “स्थानीय नियंत्रण” के मुद्दे तक पहुंच गई—और हरदोई की सत्ता-राजनीति में गुटों का तापमान बढ़ गया।

टाइमलाइन: कैसे चढ़ा 2025 में विवाद का पारा?

(क) 16 अक्टूबर 2024 – दिशा बैठक में सवाल-जवाब और प्रशासनिक संकेत।

(ख) 23 जनवरी 2025 – सड़क का हिस्सा पीडब्ल्यूडी को वापस सौंपा गया।

(ग) मार्च 2025 – आगणन भेजा गया, EFC से मंजूरी का उल्लेख, बजट रिलीज लंबित।

(घ) 31 जुलाई–2 अगस्त 2025 – सोशल मीडिया पर समर्थकों की भिड़ंत।

(ङ) 5 अगस्त 2025 – संगठन को हस्तक्षेप कर डैमेज कंट्रोल करना पड़ा।

इस प्रकरण का राजनीतिक अर्थ

यह विवाद दिखाता है कि विकास कार्य अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि विजिबिलिटी और नैरेटिव की राजनीति बन चुके हैं। मंजूरी और बजट से पहले ही श्रेय की होड़ इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा विरोधाभास है।

हरदोई की राजनीति के लिए सबक

यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है कि क्या विकास का उद्देश्य जनता की सुविधा है या नेताओं की ब्रांडिंग। 2025 में हरदोई ने जिस राजनीति को देखा, वह काम से पहले प्रचार और बजट से पहले बधाई का संकेत देती है।

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पाठकों के सवाल

क्या फोर-लेन सड़क को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है?

रिपोर्टों के अनुसार EFC स्तर की प्रक्रिया पूरी हुई है, लेकिन शासनादेश और बजट रिलीज की प्रतीक्षा बनी हुई है।

विवाद का असली कारण क्या है?

असल कारण सड़क से ज्यादा उसका श्रेय है, जिसे लेकर मंत्री और सांसद समर्थकों के बीच टकराव हुआ।

जनता के लिए सबसे अहम सवाल क्या है?

सबसे अहम सवाल यही है कि सड़क निर्माण कब शुरू होगा और कब पूरा होगा।

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