19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि 27 मार्च को होगा पर्व का समापन

सलेमपुर देवरिया के आचार्य अजय शुक्ल धार्मिक ग्रंथ के साथ बैठे हुए, चैत्र नवरात्रि और मां दुर्गा पूजा की जानकारी देते हुए

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया जनपद के सलेमपुर क्षेत्र में चैत्र नवरात्रि को लेकर धार्मिक उत्साह का वातावरण बनने लगा है। सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व माना जाता है और इसे शक्ति की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं तथा व्रत रखकर आध्यात्मिक साधना करते हैं। धार्मिक विद्वान आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होगी और इसका समापन 27 मार्च को पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।

आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। इसी कारण इस पर्व को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान लोग अपने घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा करते हैं और पूरे नौ दिनों तक भक्ति भाव में लीन रहते हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले व्रत और पूजा का शुभारंभ होता है। इस वर्ष 19 मार्च को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस समय में श्रद्धालु अपने घरों या मंदिरों में घट स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा प्रारंभ कर सकते हैं।

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उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी कारणवश इस समय कलश स्थापना नहीं हो पाती है तो अभिजीत मुहूर्त में भी घट स्थापना की जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस समय में भी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

नौ दिनों तक होती है मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व होता है और उस दिन देवी के एक विशेष रूप की आराधना की जाती है। आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा और चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है।

इसी प्रकार पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठवें दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में भक्तगण पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी की आराधना करते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना करते हैं।

व्रत और पूजा के नियम

नवरात्रि के दौरान भक्तगण विशेष नियमों का पालन करते हैं। आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि पूरे नवरात्रि पर्व के दौरान तामसी भोजन से दूर रहना चाहिए और सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार करते हैं और दिनभर मां दुर्गा के भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना में समय बिताते हैं।

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उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल बाहरी पूजा का पर्व नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि और साधना का समय भी है। इसलिए इस दौरान मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना आवश्यक माना जाता है।

कन्या पूजन और व्रत पारण का महत्व

नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि कन्या पूजन करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस कारण देशभर में नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन की परंपरा बड़े श्रद्धा भाव से निभाई जाती है।

नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि नवरात्रि पर्व का मुख्य उद्देश्य मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल को जागृत करना है। मां दुर्गा शक्ति और साहस का प्रतीक हैं और उनकी पूजा से व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

उन्होंने कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्रि के नौ दिन आत्मशुद्धि, साधना और भक्ति के माध्यम से जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर प्रदान करते हैं।

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क्षेत्र में बढ़ा धार्मिक उत्साह

चैत्र नवरात्रि के आगमन को लेकर सलेमपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का कार्य शुरू हो गया है तथा लोग अपने घरों में भी पूजा की तैयारियां कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस पर्व को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।

FAQ

चैत्र नवरात्रि 2026 कब से शुरू हो रही है?

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को समाप्त होगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:53 बजे तक रहेगा। यदि इस समय स्थापना संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त 12:05 से 12:53 बजे तक भी घट स्थापना की जा सकती है।

नवरात्रि में किस देवी के रूपों की पूजा की जाती है?

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की पूजा की जाती है।

नवरात्रि में क्या खाना चाहिए?

नवरात्रि के दौरान तामसी भोजन से दूर रहकर सात्विक भोजन करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोग फलाहार और हल्के सात्विक आहार का सेवन करते हैं।

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