गोसाईगंज समारोह पर उठे पारदर्शिता के सवाल

लखनऊ के गोसाईगंज में आयोजित यज्ञसेनी वैश्य समाज के समारोह में चंदे और आर्थिक पारदर्शिता को लेकर उठे विवाद को दर्शाती प्रतीकात्मक फीचर इमेज

✍️अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट

लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र में आयोजित यज्ञसेनी वैश्य समाज के एक सामुदायिक समारोह को लेकर इन दिनों समाज के भीतर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कार्यक्रम के बाद समाज के कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि समारोह में एकत्रित किए गए चंदे और दान की पूरी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इस मुद्दे ने अब समाज के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा को तेज कर दिया है।

सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार समारोह के दौरान समाज के लोगों से बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग लिया गया था। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुल मिलाकर लगभग पांच लाख रुपये के लेनदेन को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी कारण अब समाज के कई लोग जिम्मेदार पदाधिकारियों से खुलकर हिसाब देने की मांग कर रहे हैं।

समारोह के बाद क्यों उठे आर्थिक सवाल

बताया जा रहा है कि गोसाईगंज में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के लोगों को जोड़ना, सामूहिक सहयोग बढ़ाना और कन्या विवाह जैसे सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना था। कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों से खुले तौर पर चंदा लिया गया। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कई लोगों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि कुल कितनी राशि एकत्र हुई और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।

समाज के कुछ लोगों का कहना है कि कार्यक्रम के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता के पास लगभग पांच लाख रुपये होने की चर्चा सामने आ रही है। हालांकि अध्यक्ष द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि उनके पास लगभग एक लाख अठासी हजार रुपये ही हैं। इसके बावजूद समाज के कुछ लोगों का कहना है कि इस राशि का विस्तृत हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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पदाधिकारियों से सार्वजनिक हिसाब की मांग

इस पूरे विवाद के बीच समाज के कई लोगों ने यह मांग उठाई है कि कार्यक्रम से जुड़े सभी पदाधिकारी समाज के सामने स्पष्ट बैलेंस शीट प्रस्तुत करें। समाज के लोगों का कहना है कि जब चंदा समाज के नाम पर लिया गया है तो उसका पूरा हिसाब भी समाज के सामने होना चाहिए।

इस मामले में उपाध्यक्ष अभिषेक गुप्ता बीकेटी और हिमांशु यज्ञ सैनी शाहजहांपुर के नाम भी चर्चा में आए हैं। समाज के कुछ लोगों का कहना है कि यदि कार्यक्रम समाज के नाम पर आयोजित किया गया था तो आयोजन समिति को स्वाभाविक रूप से पूरा वित्तीय विवरण जारी करना चाहिए।

दूसरी टीम ने पेश किया पारदर्शिता का उदाहरण

इस विवाद के बीच समाज के ही कुछ अन्य पदाधिकारियों का उदाहरण भी सामने आया है जिसे लोग पारदर्शिता की मिसाल बता रहे हैं। जानकारी के अनुसार महामंत्री रहे शुभम गुप्ता, उपाध्यक्ष शरद कुमार गुप्ता, मंत्री विष्णु गुप्ता और महिला अध्यक्ष स्नेह लता गुप्ता बाराबंकी ने अपने हिस्से में आए चंदे और दान का पूरा विवरण सार्वजनिक किया।

इन पदाधिकारियों ने समाज के सामने एक विस्तृत बैलेंस शीट जारी की जिसमें यह बताया गया कि किस व्यक्ति से कितनी राशि प्राप्त हुई और उस राशि का उपयोग किस कार्य में किया गया। इसके साथ ही जो भी धनराशि शेष बची उसे बाराबंकी कमेटी द्वारा धर्मशाला निर्माण के लिए दान कर दिया गया।

शुभम गुप्ता द्वारा जारी आर्थिक विवरण

महामंत्री रहे शुभम गुप्ता ने समाज के सामने दान की राशि का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार समाज से कुल 1,48,028 रुपये की राशि प्राप्त हुई थी। यह राशि विभिन्न रसीद पुस्तकों के माध्यम से एकत्र की गई थी।

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प्राप्त राशि का विवरण इस प्रकार बताया गया है:

कॉपी नंबर 1 – ₹79,846

कॉपी नंबर 2 – ₹33,350

कॉपी नंबर 3 – ₹22,775

कॉपी नंबर 4 – ₹12,057

कुल प्राप्त राशि – ₹1,48,028

इस राशि में से समाज के विभिन्न कार्यों में कुल 1,41,500 रुपये खर्च किए गए। इसके बाद 6,520 रुपये की राशि शेष बची जिसे समाज के नाम सुरक्षित रखने की जानकारी दी गई।

शुभम गुप्ता ने कहा कि समाज के लिए प्राप्त हर दान का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया गया है। यदि किसी समाज बंधु को किसी प्रकार की जानकारी चाहिए तो वे व्यक्तिगत रूप से पूरा विवरण दिखाने के लिए तैयार हैं।

समाज के भीतर उठ रहे तीखे सवाल

विवाद के बढ़ने के साथ समाज के लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। समाज के कुछ लोगों का कहना है कि यदि कार्यक्रम समाज के नाम पर आयोजित किया गया था तो उसकी आय और व्यय की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी है।

समाज के कुछ सदस्यों का कहना है कि यदि पारदर्शिता नहीं दिखाई गई तो इससे समाज की एकता और प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। उनका यह भी कहना है कि समाज के नाम पर लिए गए चंदे को लेकर किसी भी प्रकार की शंका नहीं रहनी चाहिए।

ब्लैकलिस्ट करने की भी चेतावनी

कुछ समाजसेवियों ने यह भी कहा है कि यदि गोसाईगंज कमेटी जल्द ही अपना पूरा हिसाब समाज के सामने नहीं रखती तो समाज के स्तर पर कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि यदि पारदर्शिता नहीं दिखाई गई तो संबंधित लोगों को बक्शी का तालाब क्षेत्र में पहले हुए विवाद की तरह ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

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हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन समाज के भीतर चर्चा लगातार तेज हो रही है।

समाज की ओर से पारदर्शिता की अपील

समाज के कई वरिष्ठ लोगों का कहना है कि इस पूरे विवाद का समाधान केवल एक ही है और वह है पूरी पारदर्शिता। यदि आयोजन समिति खुलकर कुल आय और व्यय का पूरा विवरण समाज के सामने रख दे तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है और विवाद भी समाप्त हो सकता है।

समाज के लोगों का कहना है कि यह मामला केवल पैसों का नहीं बल्कि समाज के विश्वास और एकता का है। इसलिए सभी पदाधिकारियों को खुलकर हिसाब देना चाहिए ताकि समाज के भीतर विश्वास बना रहे।

FAQ

गोसाईगंज समारोह विवाद क्या है?

लखनऊ के गोसाईगंज में आयोजित यज्ञसेनी वैश्य समाज के समारोह के बाद चंदे और दान की राशि के हिसाब को लेकर समाज के कुछ लोगों ने पारदर्शिता की मांग उठाई है।

समारोह में कितनी राशि को लेकर विवाद बताया जा रहा है?

सूत्रों के अनुसार लगभग पांच लाख रुपये के लेनदेन को लेकर समाज के कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं और उसका स्पष्ट हिसाब मांगा है।

शुभम गुप्ता द्वारा क्या विवरण दिया गया?

महामंत्री रहे शुभम गुप्ता ने बताया कि उनके पास कुल 1,48,028 रुपये प्राप्त हुए थे, जिसमें से 1,41,500 रुपये खर्च किए गए और 6,520 रुपये शेष रहे जिन्हें समाज के नाम सुरक्षित रखा गया।

समाज की मुख्य मांग क्या है?

समाज के लोगों की मुख्य मांग है कि समारोह से जुड़े सभी पदाधिकारी समाज के सामने आय और व्यय का पूरा और पारदर्शी विवरण प्रस्तुत करें।

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