कामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर कावड़ियों का जलाभिषेक, शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

महाशिवरात्रि के अवसर पर फूलों से सजे शिवलिंग, पूजा सामग्री और मंदिर के ऊँचे शिखर का लैंडस्केप कोलाज दृश्य

🖊️ हिमांशु मोदी की रिपोर्ट | कामां, ब्रज क्षेत्र
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कामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष भी कामां कस्बे और आसपास के ग्रामीण अंचलों में अद्भुत भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही कामेश्वर महादेव मंदिर सहित भवानी शंकर, काशी विश्वनाथ, चंद्रेश्वर, कोटेश्वर और त्रिकुटेश्वर महादेव के शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा। कावड़ियों ने हरिद्वार और सोरोंजी से लाया गया पवित्र गंगाजल विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भगवान भोलेनाथ को अर्पित किया।

भक्ति और उत्साह का संगम

महाशिवरात्रि के अवसर पर कामां क्षेत्र में सुबह से ही मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। कांवड़ यात्रा की शोभायात्राएं बैंड-बाजों और डीजे की धुनों के बीच निकाली गईं। श्रद्धालु भगवा वस्त्रों में सुसज्जित होकर गंगाजल लेकर मंदिरों तक पहुंचे। जगह-जगह सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर कावड़ियों का स्वागत किया तथा जलपान और विश्राम की व्यवस्था की। यह दृश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामुदायिक एकता और सेवा भाव का प्रतीक बन गया।

कामेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

ब्रजभूमि में स्थित कामेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर लगभग 4800 वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बृजनाभ ने की थी। बृजनाभ ने ब्रज में चार प्रमुख महादेवों की स्थापना की, जिनमें कामां के कामेश्वर महादेव का विशेष स्थान है। इन चारों शिवालयों को ब्रज मंडल का “कोतवाल” कहा जाता है, अर्थात ब्रज क्षेत्र के रक्षक।

ब्रज के चार प्रमुख महादेव

ब्रज क्षेत्र में वृंदावन के गोपेश्वर महादेव, मथुरा के भूतेश्वर महादेव, गोवर्धन के चकलेश्वर महादेव और कामां के कामेश्वर महादेव को प्रमुख चार शिवालय माना जाता है। इनका उल्लेख ब्रज भक्ति विलास तथा गर्ग संहिता में मिलता है। कामेश्वर महादेव का शिवलिंग लगभग ढाई फीट ऊंचा और एकमुखी है, जिसे शैव कालीन प्रतिमा माना जाता है। यह स्वयंभू महादेव माने जाते हैं और भक्तों की विशेष आस्था का केंद्र हैं।

क्यों कहलाते हैं ब्रज के कोतवाल

पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण नंदगांव आए, तब भगवान शिव साधु रूप में उनके दर्शन के लिए पहुंचे। माता यशोदा ने उन्हें साधु समझकर बालक कृष्ण के दर्शन कराने से मना कर दिया। शिवजी कामां के समीप धूनी रमाकर बैठ गए। तब बालक कृष्ण के रोने पर माता यशोदा शिवजी के पास पहुंचीं और दर्शन कराए। शिवजी ने ब्रज मंडल की रक्षा का आशीर्वाद दिया और सदैव उपस्थित रहने का वचन दिया। इसी कारण कामेश्वर महादेव को ब्रज का रक्षक और कोतवाल कहा जाता है।

मुगलकालीन क्षति और जीर्णोद्धार

इतिहास के कठिन दौर में कामेश्वर महादेव मंदिर को मुगलकाल में क्षतिग्रस्त किया गया। मंदिर के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया गया था, जिसके चिह्न आज भी देखे जा सकते हैं। 17वीं शताब्दी में जयपुर राजघराने ने इसका पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कराया। वर्ष 2002 में दिल्ली के हजारीलाल अग्रवाल द्वारा भी मंदिर का नवीनीकरण कराया गया। इसके बावजूद शिवलिंग की अलौकिकता और प्राचीन स्वरूप आज भी भक्तों को आकर्षित करता है।

महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन

महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, रात्रि जागरण और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ रात्रि तक भगवान शिव की आराधना की। माना जाता है कि ब्रज के चारों महादेवों में कांवड़ चढ़ाने पर ही शिवाभिषेक पूर्ण फलदायी होता है। इस कारण हजारों की संख्या में भक्त दूर-दूर से कामां पहुंचे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कामेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना किसने की?
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मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बृजनाभ ने लगभग 4800 वर्ष पूर्व कामेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की थी।

ब्रज के चार प्रमुख महादेव कौन-कौन हैं?

गोपेश्वर (वृंदावन), भूतेश्वर (मथुरा), चकलेश्वर (गोवर्धन) और कामेश्वर (कामां) महादेव ब्रज के चार प्रमुख शिवालय माने जाते हैं।

महाशिवरात्रि पर यहां क्या विशेष आयोजन होता है?

महाशिवरात्रि पर कावड़ियों द्वारा गंगाजल से जलाभिषेक, भजन-कीर्तन, रात्रि जागरण और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर कस्बे की छोटी सी बच्ची शिव मंदिर में शिव आराधना करती हुई
शिव आराधना

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