सीतापुर सरायन नदी पर पीपा पुल निर्माण की तैयारी तेज, 59 गांवों को मिलेगा राहत का रास्ता

सीतापुर के मछरेहटा क्षेत्र में सरायन नदी पर बना बांस-बल्ली का अस्थायी पुल, जिस पर स्कूली बच्चे और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं
रितेश गुप्ता की रिपोर्ट
IMG-20260116-WA0015
previous arrow
next arrow
सीतापुर सरायन नदी पर पीपा पुल —
सीतापुर के मछरेहटा क्षेत्र में सरायन नदी पर पीपा पुल के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। बांस-बल्ली के अस्थायी पुल के टूटने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन ने मौके पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कराया है और जल्द वैकल्पिक पीपा पुल बनाने का भरोसा दिया है, जिससे 59 गांवों के हजारों लोगों को राहत मिलेगी।

सीतापुर जिले के मछरेहटा विकासखंड अंतर्गत मिरचौड़ी ग्राम पंचायत के मजरा हरैया धाम के पास सरायन नदी पर लंबे समय से लोगों की आवाजाही का मुख्य सहारा बना बांस-बल्ली का पुल बुधवार को अचानक टूट गया। यह हादसा उस समय हुआ, जब कई ग्रामीण रोजमर्रा के कामों से नदी पार कर रहे थे। पुल टूटते ही अफरा-तफरी मच गई और कुछ लोग नदी में गिर पड़े। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और हालात को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए।

डीएम के निर्देश पर प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने तुरंत मातहत अधिकारियों को निर्देश जारी किए। गुरुवार सुबह से ही स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। उपजिलाधिकारी मिश्रिख शैलेन्द्र मिश्रा ने राजस्व, पुलिस और संबंधित विभागों की टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बांस-बल्ली का पुल अब किसी भी स्थिति में सुरक्षित नहीं है, इसलिए इसे पूरी तरह हटाना ही एकमात्र विकल्प था।

इसे भी पढें  स्कूल जाती छात्रा के अपहरण की कोशिशवैन रोककर जबरन बैठाने का आरोप, इलाके में हड़कंप

एसडीएम के निर्देश पर जेसीबी और मजदूरों की मदद से टूटे हुए पुल के अवशेष हटवाए गए। इसके साथ ही नदी के दोनों किनारों पर बल्ली और तार से मजबूत बैरिकेडिंग कराई गई, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर नदी पार करने की कोशिश न करे। प्रशासन ने साफ संदेश दिया कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

दो थाना क्षेत्रों की पुलिस तैनात, हालात पर कड़ी नजर

सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए नदी के एक किनारे मछरेहटा पुलिस और दूसरे किनारे खैराबाद थाना क्षेत्र की पुलिस को तैनात किया गया। पुलिसकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं और लोगों को समझाइश दी जा रही है कि वे बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश न करें। प्रशासन का मानना है कि किसी भी तरह की लापरवाही दोबारा बड़े हादसे को जन्म दे सकती है, इसलिए सख्ती जरूरी है।

पीपा पुल निर्माण का निर्णय, ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत

उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र मिश्रा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जल्द ही सरायन नदी पर पीपा पुल का निर्माण कराया जाएगा। यह पुल अस्थायी जरूर होगा, लेकिन मजबूत और सुरक्षित होगा, ताकि बरसात और बढ़ते जलस्तर के बावजूद आवागमन सुचारु रूप से चल सके। पीपा पुल बनने से क्षेत्र के ग्रामीणों को न केवल सुविधा मिलेगी, बल्कि उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

फिलहाल पुल टूटने के बाद ग्रामीणों को खैराबाद थाना क्षेत्र में जाने के लिए करीब 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बर्बादी हो रही है। खासकर मरीजों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसे भी पढें  सेवा, सम्मान और संवेदना का संगम :इंडियन रोटी बैंक का भव्य जन बाज़ार

59 गांवों की जीवनरेखा है यह मार्ग

सरायन नदी पर बनने वाला यह पीपा पुल हरिपालपुर, भिठौरा, धरहटी, मिरचौड़ी, मदनापुर, जमालापुर, पहाड़पुर, बनियामऊ, सूरजपुर, सेनपुर सहित करीब 59 गांवों के लिए किसी जीवनरेखा से कम नहीं है। इन गांवों के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक कार्यों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर रहते हैं। पुल टूटने से इन गांवों का संपर्क सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि बांस-बल्ली का पुल वर्षों से अस्थायी समाधान के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। हर बरसात में इसके टूटने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता था। अब पीपा पुल के निर्माण की घोषणा से लोगों में उम्मीद जगी है कि कम से कम मौसमी परेशानियों से राहत मिलेगी।

प्रशासनिक तैयारी और आगे की रणनीति

प्रशासन के अनुसार पीपा पुल के निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री और तकनीकी टीम की व्यवस्था की जा रही है। जलस्तर, बहाव और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पुल की डिजाइन तैयार की जाएगी। स्थानीय स्तर पर राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी समन्वय में लगाया गया है, ताकि निर्माण कार्य में किसी तरह की देरी न हो।

इसके साथ ही प्रशासन भविष्य में स्थायी समाधान की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। हालांकि इसके लिए बजट और तकनीकी स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं लंबी हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता लोगों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करना है।

इसे भी पढें  पति-पत्नी के रिश्ते की असलियत : करवा चौथ, नीला ड्रम और बदलते समय का सच

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: राहत के साथ उम्मीद

घटना के बाद से ही ग्रामीणों में डर और नाराजगी दोनों देखने को मिली, लेकिन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और पीपा पुल निर्माण के आश्वासन से माहौल कुछ हद तक शांत हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण हो जाता है, तो उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ी राहत मिलेगी।

कई ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि भविष्य में स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल अस्थायी व्यवस्था के सहारे न रहना पड़े। उनका कहना है कि 59 गांवों की आबादी और जरूरतों को देखते हुए अब पक्के पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सरायन नदी पर पीपा पुल क्यों बनाया जा रहा है?

बांस-बल्ली का अस्थायी पुल टूट जाने के बाद आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया था। लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पीपा पुल बनाने का निर्णय लिया है।

पीपा पुल बनने से किन गांवों को लाभ मिलेगा?

हरिपालपुर, भिठौरा, धरहटी, मिरचौड़ी, मदनापुर, जमालापुर, पहाड़पुर, बनियामऊ, सूरजपुर, सेनपुर सहित करीब 59 गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

क्या फिलहाल नदी पार करना पूरी तरह बंद है?

हां, सुरक्षा कारणों से नदी के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है और पुलिस तैनात है।

क्या भविष्य में स्थायी पुल बनेगा?

प्रशासन स्तर पर भविष्य में स्थायी समाधान पर विचार की बात कही गई है, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता पीपा पुल के त्वरित निर्माण की है।

युद्ध के दौरान बचाओ कार्य का रिहर्सल, हरदोई में 23 जनवरी को ब्लैक आउट मॉक ड्रिल के दौरान सायरन, राहत और बचाव अभ्यास करते नागरिक सुरक्षा व प्रशासन
हरदोई में आयोजित युद्ध के दौरान बचाओ कार्य के रिहर्सल के तहत ब्लैक आउट मॉक ड्रिल—सायरन बजते ही राहत, बचाव और प्राथमिक चिकित्सा का अभ्यास करते नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक व प्रशासनिक टीमें।एआई इमेज।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top