परिवार की रहस्यमय मौत से हर कोई रह गया सन्न

अब्दुल मोबीन सिद्दीकी की रिपोर्ट

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श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत का यह मामला जिले के इकौना थाना क्षेत्र के ग्राम कैलाशपुर के मजरा लियाकतपुरवा का है, जहां शुक्रवार सुबह एक ही परिवार के कई सदस्यों की लाशें मिलने से पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा छा गया। रोज की तरह हलचल भरी पगडंडियां अचानक पुलिस और एंबुलेंस के सायरन से भर गईं और श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत की खबर देखते ही देखते पूरे जिले में फैल गई।

सुबह के करीब आठ बजे कैलाशपुर के लियाकतपुरवा में सब कुछ सामान्य दिख रहा था। किसान खेतों की ओर जा रहे थे, महिलाएं रोजमर्रा के कामों में लगी थीं। लेकिन इसी बीच गांव के एक घर में बंद पड़े एक हिस्से की चौखट ने बुजुर्ग मां फातिमा के मन में अजीब आशंका जगा दी। बार-बार दस्तक देने के बाद भी अंदर से कोई आवाज न आने पर उनकी चिंता बढ़ती गई और कुछ ही देर में यही चिंता श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत की दर्दनाक कहानी में बदल गई।

मां फातिमा ने पहले हल्की-फुल्की आवाज में आवाज लगाई, फिर जोर से चीखकर बेटे रोजअली, बहू और बच्चों को पुकारा। जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं दिखी तो पास-पड़ोस के लोग भी जुटने लगे। पड़ोसियों ने खिड़की से भीतर झांकने की कोशिश की तो कमरे के भीतर का जो दृश्य दिखा, वह किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मां की चीख सुनकर पूरा गांव दौड़ा चला आया और देखते ही देखते यह घर श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत के ताजे हादसे का केंद्र बन गया।

मुंबई से लौटा बेटा, बहन के निकाह की खुशियां बनीं मातम की वजह

जानकारी के मुताबिक रोजअली पांच नवंबर को मुंबई से पत्नी और बच्चों के साथ गांव लौटा था। मां फातिमा की दिली ख्वाहिश थी कि बेटे की मौजूदगी में बेटी रूबीना का निकाह तय हो और वह खुद दूल्हा देखकर बहन की शादी की जिम्मेदारी निभाए। इसी खुशी में घर के टूटे-फूटे हिस्सों की मरम्मत भी करवाई जा रही थी, ताकि निकाह से पहले घर की सूरत संवर जाए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि बहन के निकाह की तैयारियों के बीच ही श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत जैसी त्रासदी पूरे घर को उजाड़ देगी।

परिवार के लोग बताते हैं कि रोजअली मुंबई में रहकर मजदूरी करता था और लंबे समय बाद वह पत्नी और बच्चों को लेकर गांव आया था। बहन के निकाह की बात चलते-चलते वह कई बार घर के उस हिस्से में अकेले बैठा भी दिखा, जहां बाद में लाशें बरामद हुईं। गांव के लोग अब यही याद कर रहे हैं कि क्या तभी से कहीं भीतर ही भीतर कोई तूफान चल रहा था, जिसने बाद में श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत का रूप ले लिया।

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रोजअली की मां फातिमा उस सुबह को याद कर बार-बार बेहोश हो जाती हैं। उनके अनुसार, बेटा रात में सामान्य दिख रहा था, किसी तरह का झगड़ा या विवाद घर के बाहर तो किसी ने नहीं सुना। लेकिन सुबह बंद कमरे ने जैसे अनहोनी का संकेत दे दिया। लोगों का कहना है कि जिस सहजता से शादी की योजनाएं बन रही थीं, उन्हें देखकर कभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था कि वही घर अगले ही कुछ घंटों में श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत की खबरों में सुर्खियां बन जाएगा।

कमरे में जो दिखा, उससे थम गईं सांसें, पुलिस ने घेरा पूरा मकान

पड़ोसियों ने मिलकर दरवाजे को धक्का देकर खोला तो भीतर का मंजर देख सबकी सांसें थम गईं। कमरे में रोजअली, उसकी पत्नी और बच्चों के निर्जीव शरीर पड़े थे। चीख-पुकार के बीच किसी ने पुलिस को सूचना दी और कुछ ही देर में इकौना थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घर को चारों ओर से घेरकर जांच शुरू की और श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत के इस मामले को प्राथमिक दृष्टि से संदिग्ध मानते हुए फोरेंसिक टीम को भी बुला लिया।

प्रभारी निरीक्षक इकौना अखिलेश पांडेय के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि रोजअली ने पहले पत्नी और बच्चों को मौत के घाट उतारा और उसके बाद खुद भी फांसी लगाकर या किसी अन्य तरीके से जान दे दी। हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत के पीछे असल वजह क्या है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रोजअली के शरीर के दाहिने हिस्से पर दांत के निशान जैसे कई निशान पाए गए हैं। इससे यह आशंका भी उठ रही है कि बंद कमरे के अंदर किसी तरह की झड़प या प्रतिरोध की स्थिति बनी होगी। ठीक इसी कारण श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं—आखिर उस रात कमरे के भीतर क्या-क्या हुआ होगा, कौन पहले मारा गया और अंतिम सांस किसने सबसे बाद में ली?

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आत्महत्या या कुछ और? कई सवालों से घिरा श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत कांड

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को संदिग्ध मानते हुए हर पहलू से जांच कर रही है। आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव, रिश्तों में अनबन या मानसिक अवसाद—ये सभी कोण जांच के दायरे में हैं। श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत के इस मामले में पुलिस गांव वालों से भी बातचीत कर रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि रोजअली के व्यवहार में पिछले कुछ दिनों से कोई बदलाव दिख रहा था या नहीं।

गांव के लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। कुछ इसे सीधी आत्महत्या मान रहे हैं, तो कुछ के मन में शंका है कि कहीं किसी बाहरी दबाव या धमकी ने रोजअली को इस चरम कदम के लिए मजबूर तो नहीं कर दिया। यही वजह है कि श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत अब केवल एक पुलिस केस नहीं, बल्कि सामाजिक बहस का विषय भी बन गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मौत का तरीका क्या था, शरीर पर मिले निशान कितने पुराने हैं और क्या उन्हें किसी विषैले पदार्थ, फंदे या किसी अन्य हथियार से जोड़ा जा सकता है। पुलिस फोरेंसिक एंगल से भी जांच कर रही है, ताकि श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत की हर कड़ी एक-दूसरे से जुड़ सके और सच सामने आ सके।

टूटा घर, टूटा परिवार और सवालों से टूटा समाज

इस पूरे प्रकरण का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि बहन रूबीना की शादी देखने की जिम्मेदारी उठाकर आया भाई अब खुद नहीं रहा। टूटे घर को ठीक कराने की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन उससे पहले ही पूरा परिवार हमेशा के लिए बिखर गया। गांव के बुजुर्ग कह रहे हैं कि श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत ने केवल एक परिवार को नहीं, पूरे गांव के मनोबल को तोड़ दिया है।

समाजशास्त्र की दृष्टि से देखें तो ऐसे मामले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव किस तरह परिवारों को भीतर ही भीतर खोखला कर देते हैं। अगर वाकई यहां आत्महत्या जैसा कदम उठाया गया है, तो यह घटना चेतावनी है कि समय रहते परिवारों और पड़ोसियों को भी एक-दूसरे की पीड़ा को समझना होगा। इसी संदर्भ में श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत केवल एक केस फाइल नहीं, बल्कि समाज के लिए एक दर्दनाक सबक बनकर सामने आई है।

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पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी तरह की जानकारी हो तो सीधे थाने को अवगत कराएं। अधिकारी मानते हैं कि सच तक पहुंचने के लिए जनसहयोग बेहद जरूरी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत से जुड़े हर दावे को संदेह की नजर से देखा जाना चाहिए और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए।

फिलहाल गांव में चूल्हे ठंडे हैं, लोग धीरे-धीरे घरों से बाहर निकल तो रहे हैं, लेकिन हर बातचीत की शुरुआत और अंत श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत पर आकर रुक जाता है। मां फातिमा की सूनी आंखें, रूबीना का अधूरा निकाह और रोजअली की अधूरी जिम्मेदारियां—ये सभी मिलकर उस मौन की गवाही दे रहे हैं, जिसे कोई शब्द नहीं भर पा रहा।

सवाल–जवाब (FAQ): श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत से जुड़े प्रमुख प्रश्न

प्रश्न 1: श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत का मामला कहाँ का है और कब सामने आया?

उत्तर: श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत का यह मामला इकौना थाना क्षेत्र के ग्राम कैलाशपुर के मजरा लियाकतपुरवा का है। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे जब मां फातिमा ने बंद कमरे की चौखट पर बार-बार दस्तक दी और अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, तब पड़ोसियों के साथ मिलकर दरवाजा तोड़ा गया और पूरे परिवार के मृत मिलने के बाद यह घटना सामने आई।

प्रश्न 2: क्या यह साफ हो गया है कि श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत आत्महत्या है या कुछ और?

उत्तर: अभी तक पुलिस ने श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत को संदिग्ध मानकर जांच शुरू की है। प्राथमिक जांच के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि रोजअली ने पहले पत्नी और बच्चों को मौत की नींद सुलाया और फिर खुद भी जान दे दी, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

प्रश्न 3: श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत मामले में पुलिस किन-किन कोणों से जांच कर रही है?

उत्तर: पुलिस इस मामले में आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव, मानसिक अवसाद और किसी बाहरी दबाव जैसे सभी संभावित कारणों की पड़ताल कर रही है। श्रावस्ती में परिवार की रहस्यमय मौत की हर कड़ी जोड़ने के लिए गांव वालों से पूछताछ, रोजअली के व्यवहार का विश्लेषण, कमरे की फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट—इन सभी के आधार पर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

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