कामां में रामलीला मंचन का अद्भुत संगम : शरभंग ऋषि संवाद से लेकर सूर्पनखा अभिनय तक दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

IMG_COM_202603020511552780
previous arrow
next arrow

कामां। कला, आस्था और परंपरा से सराबोर रामलीला मंचन का नवम दिन दर्शकों के लिए यादगार रहा। मंच पर एक के बाद एक प्रस्तुत हुए प्रसंगों ने न केवल दर्शकों को बांधे रखा, बल्कि यह भी साबित किया कि कामां की रामलीला मंचन परंपरा आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे हुए है। इस बार के रामलीला मंचन में शरभंग ऋषि संवाद, अत्रि-अनसूया प्रसंग, सुतीक्ष्ण संवाद, सूर्पणखा संवाद और खर-दूषण-त्रिशरा वध जैसे रमणीय व रोचक प्रसंगों ने कार्यक्रम की शोभा कई गुना बढ़ा दी। पूरे कार्यक्रम में रामलीला मंचन की परंपरा और अभिनय का ऐसा सम्मिलन देखने को मिला कि दर्शक देर तक ताली बजाते रहे।

शरभंग प्रसंग में हरिओम खंडेलवाल के अभिनय ने लूटी वाहवाही

नवम दिवस के रामलीला मंचन की शुरुआत शरभंग ऋषि संवाद से हुई। शरभंग के रूप में हरिओम खंडेलवाल का अद्भुत अभिनय दर्शकों के दिल में उतर गया। उनके संवादों की गंभीरता, ऋषि का तेज और मंच पर उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। यह दृश्य रामलीला मंचन की भव्यता को और अधिक जीवंत कर रहा था, जिसे देख लोग अभिभूत हुए बिना नहीं रहे।

सुतीक्ष्ण प्रसंग और अत्रि-अनसूया संवाद ने बढ़ाई धार्मिक गरिमा

इसके बाद रामलीला मंचन में सुतीक्ष्ण संवाद प्रस्तुत हुआ, जिसमें ओमकार बजाज ने सुतीक्ष्ण ऋषि का अभिनय किया। उनके द्वारा प्रस्तुत भक्ति, श्रद्धा और भगवान राम के प्रति समर्पण ने दर्शकों में भावपूर्ण माहौल उत्पन्न कर दिया। फिर अत्रि-अनसूया प्रसंग में हरीश सैनी और पवन पाराशर की अद्वितीय जोड़ी ने रामलीला मंचन को एक नया आयाम प्रदान किया।

इसे भी पढें  रात्रि का तीसरा पहर: अपनाघर कामवन की टीम ने बेसहारा महिला को पुनर्वास आश्रम भेजकर निभाई मानवता की मिसाल

अनसूया द्वारा सीता को दिए गए संदेश, स्त्री धैर्य, विनम्रता और त्याग की महत्ता पर आधारित संवादों ने विशेष प्रभाव छोड़ा। दर्शकों का कहना था कि इस तरह का सांस्कृतिक रामलीला मंचन बच्चों और युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति आस्था जगाता है।

सूर्पणखा के दो रूप—दामोदर राज और अशोक सोनी का अभिनय दर्शकों को खूब भाया

नवम दिवस के रामलीला मंचन का सबसे आकर्षक दृश्य रहा—सूर्पणखा संवाद। इसमें दो कलाकारों के दो रूपों ने लोगों को रोमांचित कर दिया। सुंदरी सूर्पणखा के रूप में दामोदर राज की मोहक अभिव्यक्ति और भयानक सूर्पणखा के रूप में अशोक सोनी का दमदार प्रदर्शन—दोनों ने मिलकर रामलीला मंचन को जीवंत बना दिया। मंच पर भावनाओं का ऐसा संयोजन देखने को मिला कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।

सूर्पणखा संवाद का यह दृश्य इतना प्रभावी रहा कि लोग इसे इस वर्ष के रामलीला मंचन के सबसे उत्कृष्ट दृश्यों में से एक बता रहे हैं।

खर-दूषण-त्रिशरा वध ने बढ़ाया उत्साह—मंच पर गूंजा जयघोष

जैसे-जैसे रामलीला मंचन आगे बढ़ा, दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुँच गया। खर के रूप में मोहन, दूषण के रूप में विशाल सोनी और त्रिशरा के रूप में राजेंद्र शर्मा ने खलनायकों की भूमिका को इतनी वास्तविकता से निभाया कि दृश्य पूरी तरह जीवंत हो उठा। इनके वध के समय मंच पर जो युद्धाभ्यास हुआ, उसने रामलीला मंचन के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया।

इसे भी पढें  जैन धर्म के जयकारों के साथ आचार्य विनीत सागर का कामवन में हुआ मंगल प्रवेश

दर्शकों ने जयघोष करते हुए इस अद्भुत प्रस्तुति को लंबे समय तक याद रखने योग्य बताया। इस वध दृश्य ने रामलीला मंचन की लोकप्रियता को और मजबूती दी।

राम, लक्ष्मण और सीता के रूप में कलाकारों की अद्भुत तिकड़ी

रामलीला मंचन के मुख्य पात्र भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के रूप में भुवनेश्वर, डिंपू और ईशांत ने अपनी भूमिका को पूर्णता के साथ निभाया। मंच पर राम-लक्ष्मण-सीता की तिकड़ी की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रामलीला मंचन में उनका संयमित अभिनय और भावों की गहराई दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ गई।

आरती, स्वागत और मंच परंपरा—सामूहिक आस्था का अद्भुत दृश्य

रामलीला मंचन से पहले राम-लक्ष्मण-जानकी की आरती व्यापार महासंघ के अध्यक्ष कमल अरोड़ा व कैलाश लोहिया ने की। इसके बाद समिति के उपाध्यक्ष हेतराम पटवारी और संयोजक प्रदीप गोयल ने उत्तरीय पहनाकर अतिथियों का स्वागत किया। यह दृश्य रामलीला मंचन की सामूहिक आस्था और सामाजिक एकता का सशक्त परिचय था।

इस दौरान कथा व्यास विजय कृष्ण शर्मा, पात्र प्रधान डॉ. भगवान मकरन्द, सह पात्र प्रधान अरुण पाराशर और सह कथा व्यास प्रियांशु ने अपनी-अपनी भूमिकाओं से रामलीला मंचन में ज्ञान, भक्ति और साहित्यिक शुद्धता का संगम प्रस्तुत किया।

इसे भी पढें  लखनऊ में सरकारी ज़मीनों की खुली लूट :भूमाफिया–खनन माफिया गठजोड़, प्रशासनिक संरक्षण और न्याय से वंचित ग्रामीण

दृश्य संयोजन और साज-सज्जा की टीम रही मजबूत

रामलीला मंचन को सफल बनाने में दृश्य संयोजक शंकर शर्मा और साज-सज्जा प्रभारी संतोष का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। भव्य मंच, आकर्षक सेट और पात्रों की वेशभूषा ने कार्यक्रम को और अधिक दर्शनीय बना दिया। मंचन की प्रत्येक लीला में यह साफ झलकता रहा कि रामलीला मंचन को हर वर्ष अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए टीम कितनी मेहनत करती है।

कुल मिलाकर नवम दिवस का रामलीला मंचन कला, संस्कृति, धर्म और अभिनय का अद्भुत मिश्रण रहा, जिसने कामां के हजारों दर्शकों को भावविभोर कर दिया।


क्लिक करें और पढ़ें – महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

कामां में इस वर्ष के रामलीला मंचन की सबसे खास लीला कौन-सी रही?

इस वर्ष सूर्पणखा संवाद और खर-दूषण-त्रिशरा वध को दर्शकों ने सबसे प्रभावी और खास दृश्य बताया।

शरभंग ऋषि संवाद में कौन अभिनेता सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा?

शरभंग के रूप में हरिओम खंडेलवाल के अभिनय को सबसे अधिक सराहा गया।

राम, सीता और लक्ष्मण की भूमिकाएँ किसने निभाईं?

राम—भुवनेश्वर, सीता—डिंपू और लक्ष्मण—ईशांत ने निभाया।

रामलीला मंचन की साज-सज्जा की जिम्मेदारी किसके पास थी?

साज-सज्जा प्रभारी संतोष और दृश्य संयोजक शंकर शर्मा ने बेहतरीन व्यवस्थाएँ कीं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top