“योगी का सर्टिफिकेट किसने दिया?”
SIR पर बोलते हुए अखिलेश का मुख्यमंत्री पर तंज

उन्नाव में कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव समर्थकों और सुरक्षा कर्मियों के साथ चलते हुए

✍️कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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उन्नाव में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और फॉर्म-7 को लेकर चुनाव आयोग तथा प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी और निष्पक्ष थी तो फिर बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 क्यों भरवाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा—“योगी का सर्टिफिकेट किसने दिया?” यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

SIR पर विरोध नहीं, लेकिन प्रक्रिया पर सवाल

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी ने एसआईआर का विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जो भी गाइडलाइन थी, उसका पालन किया गया। लेकिन अब जिस तरह से फॉर्म-7 के जरिए नाम कटवाने और जुड़वाने की प्रक्रिया चल रही है, वह संदेह पैदा करती है। उनके अनुसार चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि हर पात्र नागरिक का वोट बने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

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उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और “उनकी अदृश्य कंपनियां” वोट काटने के लिए काम कर रही हैं। यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री ने भी स्वीकार किया है कि उनके वोट सबसे अधिक कटे हैं, तो फिर यह प्रक्रिया किस दिशा में जा रही है?

फॉर्म-7 पर उठे गंभीर सवाल

अखिलेश यादव ने कहा कि जब एसआईआर पूरा हो चुका है तो फॉर्म-7 की जरूरत क्यों पड़ी? इसका अर्थ है कि या तो एसआईआर ठीक से नहीं हुआ या फिर उस पर भरोसा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक लाख से ज्यादा अनजान लोगों के नाम से फॉर्म-7 भरवाए गए हैं। उनके अनुसार किसी अगड़े वर्ग का वोट नहीं काटा गया, बल्कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग फर्जी तरीके से फॉर्म-7 बनवा रहे हैं। चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यदि आयोग निष्पक्ष नहीं है तो उसे भाजपा का झंडा अपने कार्यालय में लगा लेना चाहिए। यह बयान सीधे तौर पर आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

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द्वापर और त्रेता युग का जिक्र

अखिलेश यादव ने अपने बयान में पौराणिक संदर्भ भी जोड़े। उन्होंने द्वापर और त्रेता युग का उल्लेख करते हुए कहा कि दशरथ और नंदलाल जैसे नामों से सैकड़ों फॉर्म पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जबकि जिन लोगों के नाम लिए जा रहे हैं, वे अंगूठा छाप बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नंदलाल स्वयं पार्टी कार्यालय आए और इस बात की जानकारी दी।

इस संदर्भ के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। उनका यह बयान सत्ता और आयोग के रिश्तों पर भी कटाक्ष माना जा रहा है।

“अब बुलडोजर नहीं, नई मिसाइल”

प्रदेश की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अब केवल बुलडोजर की बात नहीं हो रही, बल्कि एक नई “मिसाइल” बनाई गई है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं के जरिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने केंद्र और प्रदेश के रिश्तों पर भी तंज कसते हुए कहा कि अब तो नमस्कार करना भी बंद कर दिया गया है। यह टिप्पणी राजनीतिक शिष्टाचार और सत्ता के व्यवहार पर सवाल के रूप में देखी जा रही है।

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राजनीतिक तापमान बढ़ा

उन्नाव से दिया गया यह बयान आने वाले चुनावी समीकरणों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसआईआर और फॉर्म-7 की प्रक्रिया पहले ही विवादों में रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का यह हमला राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और भाजपा इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

❓अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

SIR क्या है?

SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण अभियान है, जिसके तहत वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है।

फॉर्म-7 का उपयोग किसलिए होता है?

फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है।

अखिलेश यादव ने क्या आरोप लगाए?

उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के जरिए पीडीए वर्ग के वोट काटने की साजिश की जा रही है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।


समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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