तहसील मुख्यालय पर खड़ी बदहाली की तस्वीर
चित्रकूट जिले के मानिकपुर तहसील मुख्यालय में स्थित मान्यवर कांशीराम आवास योजना की मौजूदा स्थिति किसी भी संवेदनशील समाज और जिम्मेदार प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकारी धन से निर्मित ये आवास अब रहने योग्य नहीं बचे हैं। खिड़की-दरवाजे उखड़ चुके हैं, कई भवनों की छतों में दरारें हैं और दीवारों का प्लास्टर झड़ चुका है। वर्षों से खाली पड़े इन आवासों ने धीरे-धीरे खंडहर का रूप ले लिया है।
योजना का उद्देश्य और सामाजिक महत्व
मान्यवर कांशीराम आवास योजना की शुरुआत पूर्ववर्ती बसपा सरकार के कार्यकाल में गरीब, दलित और वंचित वर्गों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के पीछे विचार यह था कि जिन परिवारों के पास सिर छुपाने के लिए पक्की छत नहीं है, उन्हें सरकारी सहायता से सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके। तहसील मुख्यालय जैसे स्थानों पर आवास बनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान करने की मंशा थी।
आज की स्थिति: वीरानी, टूट-फूट और लापरवाही
समय बीतने के साथ इन आवासों की देखरेख लगभग समाप्त हो गई। न तो किसी विभाग ने नियमित निरीक्षण किया और न ही मरम्मत पर ध्यान दिया गया। परिणामस्वरूप, कॉलोनी में न कोई परिवार रहता है और न ही सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। असामाजिक तत्वों ने मौका पाकर खिड़की-दरवाजे और अन्य उपयोगी सामग्री निकाल ली। मैदान में कचरे का अंबार लगा है और चारों ओर ऊंची-ऊंची घास व झाड़ियां उगी हुई हैं, जो यह बताती हैं कि यहां लंबे समय से किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ी।
70वें जन्मदिन पर निरीक्षण, जमीनी हकीकत उजागर
बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती के 70वें जन्मदिन के अवसर पर “जीत आपकी चलो गांव की ओर” जागरूकता अभियान के संस्थापक अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने मानिकपुर तहसील मुख्यालय पहुंचकर मान्यवर कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत बने आवासों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आई तस्वीरें बेहद चिंताजनक थीं। कई इमारतें जर्जर हालत में थीं और कुछ तो गिरने की कगार पर खड़ी नजर आईं।
गरीबों के हक पर सवाल
निरीक्षण के बाद संजय सिंह राणा ने कहा कि यदि इन आवासों का समय रहते कायाकल्प कर दिया जाए और उन्हें पात्र लाभार्थियों को आवंटित किया जाए, तो अनेक गरीब परिवारों को रहने के लिए सुरक्षित आवास मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल भवनों का मामला नहीं है, बल्कि गरीबों के अधिकार और सामाजिक न्याय का सवाल है। सरकारी योजनाओं पर खर्च हुआ धन जनता का पैसा है और उसका सही उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रशासनिक अनदेखी या नीति की कमी?
यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण योजना की अनदेखी क्यों हुई। क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर बदलती प्राथमिकताओं का परिणाम? यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव किया जाता, तो आज यह कॉलोनी उजाड़ नहीं होती। सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद यह संपत्ति धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है, जो सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी का उदाहरण है।
स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी
तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसी सरकारी संपत्तियों की नियमित निगरानी करे। आवासों की स्थिति का आकलन कर मरम्मत, सुरक्षा और आवंटन की प्रक्रिया को सक्रिय रखा जाए। लेकिन मानिकपुर के मामले में यह जिम्मेदारी कहीं न कहीं निभाई नहीं गई। परिणामस्वरूप, सरकारी योजना बदहाली की भेंट चढ़ गई।
क्या हो सकता है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे पहले इन आवासों का तकनीकी सर्वे कराया जाना चाहिए। जो भवन मरम्मत योग्य हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कर पात्र लाभार्थियों को आवंटित किया जाए। जो संरचनाएं अत्यधिक जर्जर हो चुकी हैं, उनके पुनर्निर्माण की योजना बनाई जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए रखरखाव और सुरक्षा की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सरकार के लिए चेतावनी और अवसर
मान्यवर कांशीराम आवास योजना की यह स्थिति सरकार के लिए चेतावनी भी है और अवसर भी। चेतावनी इसलिए कि यदि योजनाओं की अनदेखी जारी रही तो जनता का भरोसा कमजोर होगा, और अवसर इसलिए कि समय रहते सुधार कर सरकार गरीबों के बीच सकारात्मक संदेश दे सकती है। यह कॉलोनी फिर से आबाद हो सकती है, यदि इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी दिखाई जाए।
निष्कर्ष: सवाल खुले हैं
मानिकपुर तहसील मुख्यालय में खड़ी जर्जर इमारतें केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं हैं, बल्कि उन सपनों की कहानी कहती हैं जो कभी गरीब परिवारों की आंखों में बसे थे। आज सवाल यह है कि क्या यह कहानी यूं ही खंडहर बनकर रह जाएगी, या फिर सरकार और प्रशासन मिलकर इसे फिर से उम्मीद में बदल पाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मान्यवर कांशीराम आवास योजना का उद्देश्य क्या था?
इस योजना का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्गों को सरकारी सहायता से सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराना था।
मानिकपुर के आवास आज खाली क्यों हैं?
उचित रखरखाव, सुरक्षा और पुनः आवंटन न होने के कारण ये आवास जर्जर हो गए और खाली पड़े हैं।
क्या इन आवासों का पुनर्विकास संभव है?
हां, तकनीकी सर्वे और सरकारी इच्छाशक्ति के साथ इन आवासों का कायाकल्प कर उन्हें फिर से उपयोग में लाया जा सकता है।










