बाराबंकी साइबर ठगी मामला : शेयर बाजार में निवेश के नाम पर नायब तहसीलदार से 16 लाख की ठगी

बाराबंकी आदर्श कोतवाली नगर का मुख्य द्वार, जहां साइबर ठगी मामले में शिकायत दर्ज की गई।

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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बाराबंकी साइबर ठगी मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि किस तरह ऑनलाइन शेयर बाजार में मोटे मुनाफे के लालच में पढ़े-लिखे और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी साइबर ठगों के जाल में फंस जाते हैं। इस मामले में ठगों ने नायब तहसीलदार का भरोसा जीतकर करीब तीन महीने में 16 लाख रुपये की रकम हड़प ली।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से सामने आया यह मामला केवल एक व्यक्ति की ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस तेजी से फैलते साइबर अपराध की तस्वीर पेश करता है, जो आज शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश के नाम पर आम लोगों को निशाना बना रहा है। यहां शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी निवासी नायब तहसीलदार राज बहादुर वर्मा साइबर ठगों के उस जाल में फंस गए, जिसमें मुनाफा पहले दिखाया जाता है और नुकसान का एहसास तब होता है, जब संपर्क पूरी तरह टूट चुका होता है।

व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुई ठगी की कहानी

पीड़ित के अनुसार, उनका संपर्क व्हाट्सऐप के माध्यम से “कोटक लर्निंग एंड कम्युनिकेशन” नामक एक ग्रुप से हुआ। इस ग्रुप में शेयर मार्केट में निवेश पर 5 से 20 प्रतिशत तक के आकर्षक लाभ का दावा किया जा रहा था। ग्रुप में मौजूद पोस्ट, स्क्रीनशॉट और तथाकथित एक्सपर्ट सलाह ने ऐसा माहौल बनाया कि निवेश करना पूरी तरह सुरक्षित और फायदे का सौदा प्रतीत हो रहा था।

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इसी ग्रुप से जुड़ी एक महिला, जिसने अपना नाम कंगना शर्मा बताया और खुद को कंपनी की असिस्टेंट बताया, ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार संपर्क किया। उसने खुद को प्रोफेशनल बताते हुए निवेश की प्रक्रिया, ऐप डाउनलोड कराने और डैशबोर्ड दिखाने तक की पूरी व्यवस्था कर दी, जिससे पीड़ित का भरोसा और गहराता चला गया।

तीन महीने में 16 लाख रुपये ट्रांसफर

ठगों ने कस्टमर सर्विस और टेक्निकल सपोर्ट का हवाला देते हुए अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी दी। अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न तिथियों में नायब तहसीलदार के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, मेन ब्रांच स्थित खाते से कई बार रकम ट्रांसफर कराई गई। कुछ मामलों में उनके बेटे के खाते का भी इस्तेमाल कराया गया। कुल मिलाकर लगभग 16 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेज दिए गए।

इस दौरान पीड़ित को एक खास ऐप और डैशबोर्ड के जरिए यह दिखाया जाता रहा कि उनका निवेश लगातार बढ़ रहा है और उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा हो रहा है। हर बार आंकड़े ऐसे पेश किए जाते रहे कि किसी भी सामान्य निवेशक को लगे कि उसका पैसा सुरक्षित हाथों में है।

आईपीओ और फर्जी मुनाफे से बढ़ाया भरोसा

तहरीर में उल्लेख है कि 15 अक्टूबर 2025 को कैन एच लाइफ कंपनी के 19 हजार आईपीओ शेयर पीड़ित के पुत्र के नाम से आवंटित दिखाए गए। इन शेयरों की कीमत और कथित मुनाफा बढ़ाकर करीब 60 लाख 83 हजार रुपये दर्शाया गया। यह आंकड़ा देखकर पीड़ित को लगा कि उनका फैसला सही है और वे जल्द ही भारी मुनाफे के साथ रकम निकाल सकेंगे।

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यही वह मोड़ था, जहां ठगों ने मनोवैज्ञानिक तरीके से पीड़ित की सोच को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया। फर्जी मुनाफे के ये आंकड़े असल में एक डिजिटल छलावा थे, जिनका मकसद सिर्फ और सिर्फ और ज्यादा पैसे निकलवाना था।

रकम मांगते ही संपर्क खत्म

जब पीड़ित ने निवेश की गई रकम और मुनाफे की निकासी की बात कही, तो ठगों का रवैया बदलने लगा। कभी तकनीकी दिक्कत, कभी टैक्स तो कभी प्रोसेसिंग फीस के नाम पर टालमटोल किया जाने लगा। नए-नए बहाने बनाए जाते रहे और भुगतान को आगे खिसकाया जाता रहा।

आखिरकार 4 दिसंबर 2025 के बाद अचानक सभी व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज पूरी तरह बंद हो गए। न कोई जवाब, न कोई संपर्क। यहीं पर पीड़ित को यह एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

साइबर सेल में दर्ज हुई शिकायत

पीड़ित नायब तहसीलदार ने मामले की लिखित शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सऐप चैट, ऐप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी गई है। साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी विश्लेषण के जरिए ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस का मानना है कि यह गिरोह किसी एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके तार अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं, जैसा कि हाल के कई मामलों में सामने आया है।

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आम लोगों के लिए चेतावनी

इस बाराबंकी साइबर ठगी मामला के बाद पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आम लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन निवेश करते समय बेहद सतर्क रहें। किसी भी अनजान व्हाट्सऐप ग्रुप, लिंक या ऐप पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। शेयर बाजार में निवेश से पहले संबंधित कंपनी, सेबी पंजीकरण और आधिकारिक वेबसाइट की अच्छी तरह जांच जरूर करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कहीं गारंटीड या असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे का दावा किया जा रहा है, तो वह अपने आप में खतरे की घंटी है। असली निवेश में जोखिम होता है, जबकि ठग इसी लालच का फायदा उठाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

बाराबंकी साइबर ठगी मामला क्या है?

यह मामला शेयर बाजार में निवेश के नाम पर नायब तहसीलदार से करीब 16 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़ा है, जिसमें व्हाट्सऐप ग्रुप और फर्जी ऐप का इस्तेमाल किया गया।

ठगों ने भरोसा कैसे जीता?

शुरुआत में मुनाफा दिखाने, फर्जी डैशबोर्ड और आईपीओ आवंटन जैसे दावों से ठगों ने पीड़ित का भरोसा जीता।

ऑनलाइन निवेश में कैसे बचें?

हमेशा सेबी पंजीकृत प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें, अनजान ग्रुप से दूर रहें और गारंटीड मुनाफे के दावों पर भरोसा न करें।

शिकायत कहां करें?

किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत स्थानीय साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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