
यह वीडियो चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो प्रकरण से जुड़ा है, जिसकी पुष्टि ग्रामीण स्तर पर हो चुकी है।
वीडियो की पुष्टि से प्रशासनिक हलकों में हलचल
मऊ ब्लॉक की ग्राम पंचायत करही स्थित गौशाला से जुड़ा चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो अब केवल सोशल मीडिया की पोस्ट नहीं रहा, बल्कि इसकी पुष्टि होने के बाद यह एक गंभीर प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। गांव निवासी अचल सिंह ने स्वयं वीडियो बनाने और उसे वायरल करने की बात स्वीकार की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वीडियो हालिया है और गौशाला की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
“मजबूरी में वीडियो बनाना पड़ा” — अचल सिंह
अचल सिंह का कहना है कि गौशाला में लंबे समय से चारा-भूसा नहीं मिल रहा था, जिसके चलते गौवंशों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना उनकी मजबूरी बन गया, ताकि प्रशासन तक सच्चाई पहुंचे।
गौवंशों की मौत और बदहाल व्यवस्था
ग्रामीणों के अनुसार करही गौशाला में बीते समय से गौवंशों की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं। वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि न तो पर्याप्त चारा उपलब्ध है और न ही नियमित देखभाल। चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो ने उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें गौशालाओं को सुव्यवस्थित बताया जाता है।
विकास खंड अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीणों ने विकास खंड अधिकारी मऊ ओम प्रकाश यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी न केवल भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, बल्कि ऐसी खबरों को दबाने का भी प्रयास करते हैं। यदि समय रहते निगरानी और कार्रवाई होती, तो चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो जैसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
गौरक्षा विभाग और गौरक्षक दल पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में गौरक्षा विभाग और गौरक्षक दल की भूमिका भी कटघरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौरक्षक दल अक्सर केवल फोटो और सेल्फी तक सीमित दिखाई देता है, जबकि जमीनी स्तर पर गौवंशों की मौत, कुपोषण और शवों को ट्रैक्टर से घसीटने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो ने इन दावों को और मजबूत किया है।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चित्रकूट से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच केवल कागजी न होकर जमीनी होनी चाहिए, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट हो सके। चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो को साक्ष्य मानते हुए कठोर कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
सरकारी योजनाएं बनाम जमीनी हकीकत
गौवंश संरक्षण के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन करही गौशाला की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो ने यह दिखा दिया है कि योजनाओं और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच कितना बड़ा अंतर है।
निष्कर्ष: वीडियो नहीं, व्यवस्था की चेतावनी
कुल मिलाकर चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो केवल एक वायरल कंटेंट नहीं, बल्कि गौवंश संरक्षण व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इसे गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
चित्रकूट गौशाला वायरल वीडियो क्या दिखाता है?
यह वीडियो करही गौशाला में गौवंशों की बदहाल स्थिति, चारा-भूसा की कमी और अव्यवस्था को दर्शाता है।
वीडियो किसने बनाया?
गांव निवासी अचल सिंह ने यह वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया।
ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और गौशाला व्यवस्था में तत्काल सुधार।










