देवरिया। बैतालपुर नगर पंचायत में अध्यक्ष और सभासदों के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव अब खुलकर कानूनी विवाद में बदल गया है। मंगलवार को जहां नगर पंचायत के कई सभासदों ने प्रेस वार्ता कर अध्यक्ष पर मनमानी, विकास कार्यों में भेदभाव और बाहरी हस्तक्षेप जैसे आरोप लगाए थे, वहीं बुधवार को नगर पंचायत अध्यक्ष सरिता प्रकाश पासवान ने गौरी बाजार थाने पहुंचकर वार्ड नंबर–4 शहीद भगत सिंह नगर के सभासद प्रतिनिधि ऋषिकेश उर्फ रिंकू मणि के खिलाफ तहरीर सौंपी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह विवाद अब केवल दो पक्षों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय स्वशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।
कार्यालय में ताला, कथित अपमान और धमकी का आरोप
नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार 22 दिसंबर 2025 को वह बैतालपुर स्थित नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं तो कार्यालय में ताला लटका मिला। ताला बंद होने का कारण पूछने पर वहां मौजूद सभासद प्रतिनिधि ऋषिकेश उर्फ रिंकू मणि ने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की। आरोप है कि जब अध्यक्ष ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। अध्यक्ष ने इसे न सिर्फ व्यक्तिगत अपमान बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताया है।
पुलिस का पक्ष: जांच के दायरे में क्या-क्या
गौरी बाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक राहुल सिंह ने बताया कि नगर पंचायत अध्यक्ष से प्राप्त तहरीर और घटना की तिथि के आधार पर सभासद प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और बयान, साक्ष्य व परिस्थितियों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच में किसी भी पक्ष को अनुचित लाभ या नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
एफआईआर से पहले गरमाई थी सियासत
गौरतलब है कि एफआईआर दर्ज होने से एक दिन पहले नगर पंचायत के कई सभासदों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे। सभासदों का कहना था कि विकास कार्यों में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और बाहरी लोगों के हस्तक्षेप से नगर पंचायत का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसी प्रेस वार्ता के बाद अध्यक्ष और सभासदों के बीच विवाद और गहरा गया।
आरोपी का बयान: विकास कार्यों को लेकर मतभेद
वार्ड नंबर–4 शहीद भगत सिंह नगर की सभासद निर्मला देवी के पुत्र एवं प्रतिनिधि ऋषिकेश मणि त्रिपाठी उर्फ रिंकू ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमे को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष से उनका विवाद केवल विकास कार्यों को लेकर है, जिसकी जानकारी अन्य सभासदों और अधिशासी अधिकारी को भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
सभासदों का विरोध, आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर कई सभासद खुलकर आरोपी प्रतिनिधि के समर्थन में सामने आ गए हैं। सभासद अजय पांडेय, बद्रीनाथ गुप्ता, वार्ड नंबर–2 के सभासद प्रतिनिधि लोहार पासवान, मनोज पासवान, मनसा देवी प्रतिनिधि अनूप कुमार, संगीता सिंह, अमरेंद्र सिंह, रामसूरत सिंह, अमित गुप्ता और योगेंद्र कुमार सहित अन्य ने एफआईआर को वापस लेने की मांग की है। सभासद अजय पांडेय ने चेतावनी दी है कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो सभासद सड़क तक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
वायरल वीडियो विवाद पर अध्यक्ष का इनकार
नगर पंचायत के सभासद मोनू से जुड़े वायरल वीडियो के आरोपों को अध्यक्ष ने सिरे से खारिज किया है। अध्यक्ष का कहना है कि कोई वीडियो वायरल नहीं हुआ था और मोनू प्रकरण पहले ही समाप्त हो चुका है। इस बयान के बाद विवाद का एक और पक्ष सामने आया है, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय राजनीति और प्रशासन पर असर
अध्यक्ष और सभासदों के बीच बढ़ते टकराव से बैतालपुर नगर पंचायत की राजनीति में भारी उथल-पुथल मच गई है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते संवाद और समाधान नहीं निकला तो इसका सीधा असर नगर पंचायत के प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। अब पूरे मामले में पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्ष पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
सवाल-जवाब
एफआईआर किस आधार पर दर्ज की गई है?
नगर पंचायत अध्यक्ष की तहरीर पर कार्यालय में ताला बंद होने, कथित जातिसूचक शब्दों के प्रयोग, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
आरोपी सभासद प्रतिनिधि का क्या कहना है?
आरोपी का कहना है कि विवाद केवल विकास कार्यों को लेकर है और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा राजनीतिक दबाव में कराया गया है।
क्या इस मामले में और धाराएं जुड़ सकती हैं?
जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
आगे क्या कार्रवाई संभव है?
पुलिस जांच, साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।










