ग्राम प्रधान चंद्रा मारा में फर्जीवाड़े की हद! विकास कार्यों के नाम पर लाखों का खेल, प्रधान–सचिव की मिलीभगत उजागर

📝 संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

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चित्रकूट के मानिकपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चंद्रा मारा में सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है, जहां बिना काम कराए और घटिया कार्य दिखाकर फर्जी भुगतान किए जाने के आरोप लगे हैं।

चित्रकूट। मानिकपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चंद्रा मारा में विकास कार्यों के नाम पर खुलेआम फर्जीवाड़ा किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की आपसी मिलीभगत से सरकारी धन को योजनाबद्ध तरीके से ठिकाने लगाया जा रहा है। कहीं गुणवत्ता विहीन कार्य कराकर सरकारी पैसे का बंदरबाट किया गया, तो कहीं बिना कोई कार्य कराए ही कागजों में भुगतान दर्शा दिया गया।

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सूत्रों के मुताबिक पंचायत में सोमनाथ ट्रेडर्स और अग्रहरि एंड संस के नाम पर सबसे अधिक भुगतान दिखाया गया है। हैरानी की बात यह है कि अग्रहरि एंड संस की कथित दुकान से किसी भी प्रकार की सामग्री क्रय किए जाने के कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसके बावजूद भुगतान की फाइलें पास कर दी गईं।

इतना ही नहीं, पंचायत भवन में बैटरी खरीद के नाम पर भी बड़ा खेल किया गया। आरोप है कि पुरानी बैटरी को ही नई बैटरी दर्शाकर दुर्गा इंटरप्राइजेज के नाम से भुगतान कर दिया गया। जमीनी हकीकत यह है कि न तो नई बैटरी लगाई गई और न ही कोई वास्तविक खरीद हुई।

इसके अतिरिक्त कंप्यूटर कार्टेज, इंक और स्टेशनरी की खरीद में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। कागजों में महंगी स्टेशनरी और तकनीकी सामग्री की खरीद दिखाई गई, जबकि पंचायत कार्यालय में उसका कोई अस्तित्व नजर नहीं आता। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है।

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स्थानीय लोगों में इस पूरे मामले को लेकर गहरा रोष है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब विकास कार्यों के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये भेज रही है, तो फिर जमीनी स्तर पर हालात जस के तस क्यों हैं? जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं या फिर पूरे खेल में उनकी भी मौन सहमति है?

⚠️ ग्राम पंचायत चंद्रा मारा में विकास कार्यों के नाम पर हुए फर्जी भुगतानों की विस्तृत और दस्तावेज़ी रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित की जाएगी।


📌 सवाल–जवाब (पढ़ने के लिए सवाल पर क्लिक करें)

❓ ग्राम पंचायत चंद्रा मारा में मुख्य आरोप क्या हैं?

ग्राम प्रधान और सचिव पर बिना कार्य कराए फर्जी भुगतान करने, घटिया निर्माण दिखाकर सरकारी धन निकालने और फर्जी फर्मों के नाम से भुगतान करने के आरोप हैं।

❓ किन फर्मों के नाम पर सबसे अधिक भुगतान दिखाया गया?

सोमनाथ ट्रेडर्स, अग्रहरि एंड संस, दुर्गा इंटरप्राइजेज और कंप्यूटर कार्टेज/स्टेशनरी आपूर्तिकर्ताओं के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं।

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❓ ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?

ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और पंचायत के सभी विकास कार्यों का सामाजिक ऑडिट कराया जाए।

❓ आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो ग्राम प्रधान, सचिव और संबंधित फर्मों के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और निलंबन जैसी कार्रवाई संभव है।

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