विधायक की साख पर बट्टा लगाने में जुटे ठेकेदार! निर्माण कार्यों में घोर अनियमितताओं से उठे गंभीर सवाल

📝 संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

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चित्रकूट की मऊ–मानिकपुर विधानसभा में विकास कार्यों की रफ्तार तेज है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में गुणवत्ता की अनदेखी और ठेकेदारों की मनमानी जनविश्वास को ठेस पहुंचा रही है। सवाल यह है कि क्या विकास की चमक के पीछे भ्रष्टाचार की परछाईं छिपी है?


चित्रकूट। मऊ–मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र इन दिनों विकास कार्यों को लेकर चर्चा में है। सड़क, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों का शिलान्यास और निर्माण तेज़ी से हुआ है। क्षेत्रीय लोग मानते हैं कि विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी की कार्यशैली अपेक्षाकृत सक्रिय और जनोन्मुखी रही है। हालांकि, इन विकास कार्यों की आड़ में ठेकेदारों द्वारा बरती जा रही घोर अनियमितताओं ने पूरे तंत्र पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीण अंचलों में कराए जा रहे इंटरलॉकिंग खड़ंजा, नाली और संपर्क मार्ग जैसे कार्यों में गुणवत्ता के मानकों को ताक पर रखने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर कार्य केवल काग़ज़ों में मानक पूरे दिखाए गए, जबकि ज़मीनी स्तर पर सामग्री और तकनीकी प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई।

टेढ़वा से गुरदरी तक—एक जैसी तस्वीर, अलग-अलग गांव

मानिकपुर विकासखंड के ग्राम टेढ़वा में बुंदेलखंड निधि से कराए गए इंटरलॉकिंग खड़ंजा निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। आरोप है कि बेस तैयार किए बिना ही ऊपरी सतह पर इंटरलॉकिंग बिछा दी गई, जिससे बरसात या हल्के भार में भी सड़क के धंसने की आशंका बनी हुई है।

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इसी तरह मऊ गुरदरी गांव में विधायक निधि से कराए गए खड़ंजा निर्माण में भी मानकों की अनदेखी सामने आई है। यहां ईंटों को बिना समुचित फाउंडेशन के ऊपर-ऊपर बिछाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों में सतह उखड़ने लगी, जो निर्माण गुणवत्ता पर सीधा प्रश्नचिह्न है।

गढ़चपा ग्राम पंचायत: चार काम, चारों में सवाल

ग्राम पंचायत गढ़चपा के कटहा पुरवा और पतेरिया में विधायक निधि से स्वीकृत कार्यों की संख्या लगभग चार बताई जा रही है। इन सभी कार्यों में एक जैसी शिकायतें सामने आई हैं—कमज़ोर सामग्री, तकनीकी निरीक्षण का अभाव और जल्दबाज़ी में काम निपटाने की प्रवृत्ति। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने लागत बचाने के नाम पर गुणवत्ता से समझौता किया, जिसका खामियाज़ा भविष्य में गांव वालों को भुगतना पड़ेगा।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि निगरानी तंत्र की ढिलाई का लाभ उठाकर ठेकेदारों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया। कई स्थानों पर कार्य पूर्ण होने के प्रमाण-पत्र जारी हो गए, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे इतर बताई जा रही है।

सरैया का मुस्लिम पुरवा: समय से पहले ध्वस्तीकरण की आशंका

मानिकपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत सरैया के मजरे मुस्लिम पुरवा में ईदगाह के पास बनाए गए इंटरलॉकिंग खड़ंजा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण प्रक्रिया में न तो मानक मोटाई का ध्यान रखा गया और न ही समुचित लेवलिंग की गई। नतीजतन, यह सड़क समयावधि पूरी होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो सकती है।

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यह स्थिति न केवल सरकारी धन की बर्बादी की ओर इशारा करती है, बल्कि भविष्य में पुनर्निर्माण का अतिरिक्त बोझ भी प्रशासन पर डालती है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही?

विधायक की छवि बनाम ठेकेदारों की मनमानी

मऊ–मानिकपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी सत्ताधारी दल की सहयोगी पार्टी से आते हैं और क्षेत्र में उनकी छवि अपेक्षाकृत साफ़-सुथरी मानी जाती है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधायक स्तर पर कमीशनखोरी या दबाव की शिकायतें सामने नहीं आई हैं। इसके बावजूद, ठेकेदारों द्वारा गुणवत्ता विहीन कार्य कराया जाना कई तरह के संदेह पैदा करता है।

यही कारण है कि अब यह सवाल मुखर हो रहा है—जब शीर्ष स्तर पर कथित रूप से ईमानदारी है, तो फिर ज़मीनी स्तर पर गड़बड़ियां कैसे हो रही हैं? क्या यह प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी है या फिर ठेकेदारों का संगठित खेल?

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। लोगों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो विकास कार्यों पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

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अब देखना यह होगा कि विधायक स्तर पर इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और क्या ज़मीनी सच्चाई सामने लाकर ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाता है या फिर सरकारी धन की इस कथित बंदरबांट पर पर्दा पड़ा ही रहता है।


पाठकों के सवाल — जवाब (क्लिक करें)

❓ किन गांवों में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं?

टेढ़वा, मऊ गुरदरी, गढ़चपा (कटहा पुरवा, पतेरिया) और सरैया के मुस्लिम पुरवा सहित कई गांवों में निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

❓ अनियमितताओं का मुख्य स्वरूप क्या है?

बिना मजबूत बेस के इंटरलॉकिंग बिछाना, मानक सामग्री का उपयोग न करना, लेवलिंग और मोटाई में कमी जैसी शिकायतें प्रमुख हैं।

❓ विधायक पर सीधे आरोप क्यों नहीं हैं?

स्थानीय स्तर पर विधायक पर कमीशनखोरी के आरोप नहीं हैं, लेकिन निगरानी तंत्र की कमजोरी के कारण ठेकेदारों की मनमानी सामने आ रही है।

❓ आगे क्या कार्रवाई अपेक्षित है?

तकनीकी जांच, दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई और पारदर्शी निगरानी प्रणाली लागू किए जाने की मांग की जा रही है।

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