रसोई पर मंडराया गैस संकट एलपीजी की किल्लत से बदली घरों की रफ्तार, इंडक्शन चूल्हों की मांग में आया अचानक उछाल

एलपीजी गैस एजेंसी के बाहर सिलेंडरों के साथ बैठे लोग और लगी लंबी कतार

✍️हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
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देश के कई हिस्सों में इन दिनों एलपीजी गैस की किल्लत आम लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। यह संकट केवल बाजार या वितरण व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे आम परिवारों की रसोई तक पहुंच गया है। कई घरों में सिलेंडर खत्म होने के कारण भोजन बनाना मुश्किल हो गया है, तो कई लोग गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन चूल्हों और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं। हालात इस कदर गंभीर हो गए हैं कि कई स्थानों पर गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ और विवाद की आशंका को देखते हुए पुलिस बल तक तैनात करना पड़ा है।

गैस संकट का असर राजस्थान के भरतपुर शहर में सबसे अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जहां पिछले कुछ दिनों से एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। प्रशासन को गैस वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी करनी पड़ रही है। एजेंसियों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि सिलेंडर वितरण के दौरान किसी तरह का विवाद या अव्यवस्था न हो। साथ ही प्रशासन कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर भी नजर बनाए हुए है।

गैस एजेंसियों पर बढ़ी भीड़, पुलिस की तैनाती

भरतपुर शहर में गैस की कमी के कारण गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग सुबह से ही सिलेंडर लेने के लिए पहुंचने लगे हैं ताकि समय रहते उन्हें गैस मिल सके। बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई एजेंसियों के बाहर पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस वितरण शांतिपूर्ण तरीके से हो और किसी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

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शुक्रवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब गैस की कमी के कारण दोपहर तक अन्नपूर्णा रसोई में भी भोजन नहीं बन पाया। अन्नपूर्णा रसोई जैसी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करती हैं। लेकिन गैस की कमी के कारण यहां भी भोजन बनाने में बाधा उत्पन्न हो गई। बाद में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद भोजन तैयार किया जा सका।

गैस की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति

गैस की कमी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कॉमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता में कमी है। इसके कारण कई छोटे व्यवसायी और दुकानदार घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल करने लगे हैं। शहर के कई फूड स्टॉल, चाय की दुकानों और छोटे रेस्टोरेंट में घरेलू गैस सिलेंडर से खाना बनाते हुए देखा जा रहा है। इससे घरेलू गैस की मांग अचानक बढ़ गई है।

प्रशासन और गैस एजेंसियों के अनुसार पहले शहर में रोजाना लगभग 5300 घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई होती थी। लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 5800 सिलेंडर प्रतिदिन कर दिया गया है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर खत्म नहीं हो पाया है। यही कारण है कि कई लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा।

कालाबाजारी और अवैध भंडारण की शिकायतें

गैस की कमी के बीच कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। कई स्थानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण किए जाने और ऊंचे दामों पर बेचने की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति या एजेंसी गैस की कालाबाजारी या अवैध भंडारण करते हुए पकड़ी जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे गैस का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों के लिए करें और किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें।

इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में आया बड़ा उछाल

गैस संकट का असर अब इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भी दिखाई देने लगा है। लोग गैस के विकल्प तलाश रहे हैं और इसी वजह से इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों के अनुसार पहले जहां रोजाना एक या दो इंडक्शन चूल्हे ही बिकते थे, वहीं अब उनकी बिक्री कई गुना बढ़ गई है।

चौबुर्जा क्षेत्र के एक इलेक्ट्रॉनिक्स विक्रेता प्रदीप सिंघल के अनुसार गैस संकट के बाद इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में लगभग दस गुना तक वृद्धि हुई है। पहले जहां मुश्किल से एक-दो चूल्हे बिकते थे, वहीं अब उनकी दुकान से रोजाना 20 से 25 इंडक्शन चूल्हे बिक रहे हैं।

जिलेभर में प्रतिदिन लगभग 150 से 200 इंडक्शन चूल्हों की बिक्री हो रही है। इनकी कीमत लगभग दो हजार से चार हजार रुपए के बीच है। कई परिवारों ने गैस संकट को देखते हुए इंडक्शन चूल्हों को स्थायी विकल्प के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है।

सरकार ने जारी किया अतिरिक्त केरोसिन कोटा

गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त केरोसिन का विशेष कोटा जारी किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की रसोई प्रभावित न हो। जिन परिवारों के पास गैस उपलब्ध नहीं है, वे केरोसिन के माध्यम से भोजन बना सकें।

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सरकार का कहना है कि स्थिति को जल्द सामान्य बनाने के लिए गैस आपूर्ति को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही वितरण व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

आम लोगों की चिंता बढ़ी

गैस संकट ने आम लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। कई परिवारों को रोजमर्रा के भोजन की व्यवस्था करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। खासकर उन परिवारों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है जिनके पास खाना बनाने का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं है।

हालांकि प्रशासन और सरकार स्थिति को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जब तक गैस की आपूर्ति पूरी तरह संतुलित नहीं होती, तब तक लोगों को वैकल्पिक उपायों का सहारा लेना पड़ सकता है।


FAQ

एलपीजी गैस की कमी क्यों हो रही है?

कॉमर्शियल सिलेंडरों की कमी और घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग बढ़ने के कारण मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे आपूर्ति पर दबाव पड़ा है।

क्या गैस एजेंसियों पर पुलिस तैनात की गई है?

हां, कई स्थानों पर गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ और विवाद की आशंका को देखते हुए पुलिस तैनात की गई है।

इंडक्शन चूल्हों की मांग क्यों बढ़ी?

गैस की कमी के कारण लोग खाना बनाने के वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इंडक्शन चूल्हों की बिक्री तेजी से बढ़ गई है।

सरकार ने गैस संकट को लेकर क्या कदम उठाए हैं?

केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त केरोसिन कोटा जारी किया है और गैस आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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