देवरिया जनपद के नगर पंचायत तरकुलवा क्षेत्र में रमजान की रौनक उस समय और भी बढ़ गई, जब बंजरिया मोड़ पर आयोजित एक इफ्तार पार्टी ने केवल रोज़ा खोलने की परंपरा को ही नहीं निभाया, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का जीवंत संदेश भी दिया। यह आयोजन स्थानीय समाजसेवी फिरोज़ अहमद के नेतृत्व में किया गया, जहां रोज़ेदारों के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इफ्तार की इस दावत ने यह संदेश दिया कि धर्म और संस्कृति भले अलग-अलग हों, लेकिन इंसानियत की डोर सबको एक साथ जोड़ती है।
दरअसल, रमजान का महीना केवल रोज़ा रखने और इबादत करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आत्मसंयम, सेवा और सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक माना जाता है। इसी भावना को साकार रूप देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम ढलते ही बंजरिया मोड़ का माहौल आध्यात्मिकता और अपनत्व की खुशबू से भर उठा। रोज़ेदारों के साथ मौजूद लोगों ने इफ्तार से पहले आपसी बातचीत में समाज में बढ़ती एकता और भाईचारे की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
कुरआन की तिलावत से शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन शरीफ की तिलावत से हुई। तिलावत की मधुर आवाज़ ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। इसके बाद रमजान के महत्व और उसकी फजीलत पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि यह महीना इंसान को अपने भीतर झांकने का अवसर देता है और उसे संयम, दया तथा परोपकार की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि रमजान का असली संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करने का भी अवसर है।
इफ्तार की घड़ी में दिखी एकता की तस्वीर
जैसे ही अज़ान की आवाज़ गूंजी, रोज़ेदारों ने खजूर और पानी के साथ रोज़ा खोला। इफ्तार की इस घड़ी में उपस्थित लोगों के चेहरों पर संतोष और श्रद्धा साफ दिखाई दे रही थी। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि हिंदू समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने एक साथ बैठकर इफ्तार किया और आपसी भाईचारे का उदाहरण प्रस्तुत किया।
स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का माध्यम बनते हैं। जब विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और संवाद करते हैं, तो गलतफहमियों की दीवारें स्वतः ही टूट जाती हैं।
मगरिब की नमाज़ के बाद अमन-चैन की दुआ
इफ्तार के बाद रोज़ेदारों ने मगरिब की नमाज़ जमाअत के साथ अदा की। नमाज़ के दौरान देश में शांति, तरक्की और सामाजिक सद्भाव के लिए विशेष दुआएं की गईं। नमाज़ के बाद मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि देश की असली ताकत उसकी विविधता और आपसी सम्मान में निहित है।
लोगों ने कहा कि रमजान का महीना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर देता है। जब लोग एक साथ बैठकर दुआ करते हैं, तो दिलों के बीच की दूरियां कम हो जाती हैं।
आयोजकों ने दिया सामाजिक एकता का संदेश
इफ्तार कार्यक्रम के आयोजक फिरोज़ अहमद और सुहेल सिद्दीकी ने सभी रोज़ेदारों और मेहमानों का दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव और पारस्परिक सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। उनका कहना था कि आज के दौर में जब समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को धार्मिक और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराना भी समय की जरूरत है। जब युवा इस तरह के आयोजनों में शामिल होते हैं, तो वे केवल परंपराओं को ही नहीं सीखते, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी समझते हैं।
गांव के लोगों की रही बड़ी भागीदारी
कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इसमें फरहान, अरशद सिद्दीकी, परवेज आलम, मोहम्मद जाहिद, मोहम्मद सकील, शमशाद, सुरेंद्र यादव, उमेश यादव, धनंजय कुशवाहा, शैलेश यादव, खुशरुद्दीन अहमद, डॉ. नसीम खान, मुन्ना वारसी, नसरुल्लाह सिद्दीकी, हसनैन सिद्दीकी, सराफत अली, फरहान, अबू सलीम, जावेद अख्तर एडवोकेट (अफरोज), सोनू सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।
स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से क्षेत्र में आपसी विश्वास और सौहार्द का माहौल मजबूत होता है। गांवों में जब सामूहिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और सहयोग की भावना भी बढ़ती है।
समरसता का संदेश बन गया इफ्तार आयोजन
तरकुलवा के बंजरिया मोड़ पर आयोजित यह इफ्तार पार्टी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गई। यहां उपस्थित लोगों ने यह साबित किया कि जब इंसानियत और भाईचारे की भावना मजबूत होती है, तब समाज में शांति और विकास का रास्ता स्वतः ही बन जाता है।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि गांवों और कस्बों में आज भी वह सामाजिक ताकत मौजूद है, जो लोगों को जोड़कर रखती है। ऐसे आयोजनों से यह संदेश मिलता है कि समाज की असली पहचान उसकी एकता और परस्पर सम्मान में निहित होती है।
FAQ
तरकुलवा में इफ्तार पार्टी का आयोजन किस उद्देश्य से किया गया?
इस इफ्तार पार्टी का मुख्य उद्देश्य समाज में भाईचारा, आपसी सद्भाव और इंसानियत का संदेश देना था।
कार्यक्रम में किन लोगों ने भाग लिया?
रोज़ेदारों के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के लोग, स्थानीय गणमान्य नागरिक, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
इफ्तार कार्यक्रम में क्या-क्या गतिविधियां हुईं?
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई, उसके बाद रमजान की फजीलत पर चर्चा, इफ्तार और मगरिब की नमाज़ अदा की गई।
ऐसे आयोजनों का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?
इस तरह के आयोजन समाज में आपसी विश्वास, भाईचारा और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।










