चकिया कोठी में आयोजन, भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण
मंगलवार को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंचीय कार्यक्रमों के साथ सम्मेलन में अनुशासन, सहभागिता और सांस्कृतिक चेतना का स्पष्ट संदेश दिखाई दिया।
विशेष वर्ष का संदर्भ: इतिहास और स्मृतियां
मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक अनिल ने कहा कि यह वर्ष कई ऐतिहासिक स्मृतियों का साक्षी है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष सिखों के नवें गुरु गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान दिवस का स्मरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने धर्म और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने और आदिवासी समाज के महान नायक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कालखंड सामाजिक चेतना को पुनर्स्मरण कराने वाला है। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को संगठनात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताया।
‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और सामाजिक जिम्मेदारी
अनिल ने सनातन परंपरा के मूल उद्घोष ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विचार संपूर्ण धरती को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार, सह-अस्तित्व, करुणा और परस्पर सम्मान सनातन चेतना की आधारशिला हैं, जिन्हें व्यवहार में उतारना समय की आवश्यकता है।
समकालीन चुनौतियां और सतर्कता का आह्वान
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समाज को विभिन्न आधारों पर विभाजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने और अपने गांव-समाज में सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
हिंदू एकता ही शक्ति: राघवेंद्र दास
दांडी बालक राघवेंद्र दास ने कहा कि सनातन परंपरा कभी अनावश्यक आक्रामकता का मार्ग नहीं अपनाती, लेकिन जब उस पर आघात होता है तो वह अपने मूल्यों की रक्षा करना जानती है। उन्होंने हिंदू एकता पर जोर देते हुए कहा कि जहां एकता होती है, वहीं वास्तविक शक्ति जन्म लेती है।
युवतियों की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता
वक्ता गायत्री ने समाज में जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कुछ अराजक तत्व नाम बदलकर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवतियों से सतर्क रहने और परिवार-संवाद को मजबूत रखने की अपील की।
आयोजन समिति और सहभागिता
आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा के क्षेत्रीय मंत्री हरि चरण कुशवाहा ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता छट्ठू प्रसाद ने की, जबकि संचालन वीरेंद्र मिश्र ने किया। सम्मेलन में आरएसएस के जिला व विभाग प्रचारक, विधायक सभा कुंवर कुशवाहा, पूर्व विधायक सत्य प्रकाश मणि, पूर्व जिला अध्यक्ष विजय कुमार दुबे सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
संगठन, संवाद और संतुलन का संदेश
सम्मेलन का समग्र संदेश संगठन, संवाद और सामाजिक संतुलन पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास से प्रेरणा लेते हुए वर्तमान चुनौतियों का समाधान जागरूकता, संवाद और सहभागिता से ही संभव है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विराट हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य क्या रहा?
सनातन परंपरा की समझ को मजबूत करना, सामाजिक एकता को बढ़ावा देना और समकालीन चुनौतियों पर संवाद स्थापित करना।
सम्मेलन में किन ऐतिहासिक अवसरों का उल्लेख हुआ?
गुरु तेग बहादुर का 350वां बलिदान दिवस, वंदे मातरम् के 150 वर्ष, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और आरएसएस का शताब्दी वर्ष।
वक्ताओं का प्रमुख संदेश क्या था?
संगठन, सतर्कता, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों के अनुरूप जीवन।










