आस्था पर वार: दुर्गेश्वर नाथ मंदिर से अष्टधातु की शनि देव मूर्ति चोरी, देवरिया में उबाल

देवरिया के सलेमपुर स्थित प्रसिद्ध दुर्गेश्वर नाथ मंदिर, जहां से अष्टधातु की शनि देव मूर्ति चोरी हुई।

इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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आस्था पर वार की यह घटना देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र में स्थित दुर्गेश्वर नाथ मंदिर से सामने आई है, जहां मध्य रात्रि अज्ञात चोरों ने मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए अष्टधातु से निर्मित प्राचीन शनि देव प्रतिमा चोरी कर ली, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश और असुरक्षा का माहौल बन गया।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र में स्थित दुर्गेश्वर नाथ मंदिर वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। रविवार की मध्य रात्रि जब पूरा क्षेत्र नींद में था, उसी दौरान अज्ञात चोरों ने मंदिर परिसर में घुसकर सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए अष्टधातु की बहुमूल्य शनि देव प्रतिमा चोरी कर ली। सुबह जब पुजारी और श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, तो गर्भगृह में प्रतिमा के स्थान पर खाली चौकी देखकर हड़कंप मच गया।

मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता

दुर्गेश्वर नाथ मंदिर न केवल स्थानीय बल्कि आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां स्थापित शनि देव की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन थी और अष्टधातु से निर्मित होने के कारण इसका धार्मिक और ऐतिहासिक मूल्य अत्यधिक था। हर शनिवार और अमावस्या को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में इस प्रतिमा की चोरी को श्रद्धालु केवल अपराध नहीं, बल्कि आस्था पर सीधा आघात मान रहे हैं।

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महंत बाबा जगन्नाथ जी महाराज का गंभीर आरोप

मंदिर के महंत बाबा जगन्नाथ जी महाराज ने घटना को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर की सुरक्षा के लिए पहले पुलिस के दो जवान दिन-रात तैनात रहते थे। लेकिन कुछ दिन पहले ही क्षेत्राधिकारी सलेमपुर द्वारा उनकी ड्यूटी समाप्त कर दी गई। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे हो गई थी। महंत का कहना है कि सुरक्षा हटते ही चोरों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने इस वारदात को अंजाम दे डाला।

सुरक्षा हटने के बाद पहली बड़ी वारदात

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती हटने के बाद से मंदिर परिसर में असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ गई थी। रात के समय मंदिर क्षेत्र पूरी तरह सुनसान रहता है, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने इस घटना को अंजाम दिया। यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक स्थल की सुरक्षा में ढिलाई सामने आई हो, लेकिन इस बार नुकसान न केवल आर्थिक है, बल्कि धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा है।

कोतवाली पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस को अवगत कराया गया। सूचना पर कोतवाली प्रभारी मयफोर्स मौके पर पहुंचे और मंदिर परिसर का गहन निरीक्षण किया। फोरेंसिक जांच के साथ-साथ आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस किसी ठोस सुराग तक नहीं पहुंच सकी थी और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो पाई थी।

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श्रद्धालुओं में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

इस घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते देखे गए। कांग्रेस नेता अखिलेश मिश्रा ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द से जल्द चोरों की गिरफ्तारी और मूर्ति की बरामदगी नहीं होती है, तो जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया।

प्रशासनिक लापरवाही या संगठित गिरोह?

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चोरी किसी सामान्य चोर का काम नहीं हो सकती। अष्टधातु की मूर्ति का वजन, उसे सुरक्षित तरीके से निकालना और बिना किसी शोर-शराबे के ले जाना किसी संगठित गिरोह की ओर इशारा करता है। पहले भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों से मूर्तियों की चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय पाए गए हैं।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। जब एक प्रसिद्ध मंदिर से इतनी आसानी से बहुमूल्य मूर्ति चोरी हो सकती है, तो छोटे धार्मिक स्थलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस दिशा में ठोस नीति बनानी चाहिए।

क्या कहता है जनमानस

स्थानीय दुकानदारों, पुजारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र होता है। ऐसी घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं। लोगों ने मांग की है कि मंदिर में फिर से स्थायी पुलिस सुरक्षा बहाल की जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।

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आगे की राह: भरोसा बहाली की चुनौती

अब सबसे बड़ी चुनौती पुलिस और प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं का टूटा हुआ भरोसा बहाल करने की है। मूर्ति की शीघ्र बरामदगी, आरोपियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना ही इस आक्रोश को शांत कर सकता है। अन्यथा यह मामला आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दुर्गेश्वर नाथ मंदिर से क्या चोरी हुआ है?

मंदिर परिसर से अष्टधातु से निर्मित शनि देव की प्राचीन और बहुमूल्य मूर्ति चोरी हुई है।

चोरी कब हुई?

यह चोरी रविवार की मध्य रात्रि को अज्ञात चोरों द्वारा की गई।

क्या मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था थी?

पहले मंदिर में पुलिस के दो जवान तैनात थे, लेकिन कुछ दिन पहले उनकी ड्यूटी समाप्त कर दी गई थी।

पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है?

कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

आंदोलन की चेतावनी किसने दी है?

कांग्रेस नेता अखिलेश मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

देवरिया सदर से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी की फाइल फोटो।
देवरिया सदर से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, जिनकी शिकायत पर सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की।

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  1. दुर्गेश्वर राय

    दुखद घटना

    कुछ दिन पहले थावे मंदिर से चोरी हुई है
    और अब ये

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