फर्नीचर आपूर्तिकर्ता से मांगे सवा 2 करोड़, लिए 30 लाख रुपये एडवांस, पढिए, क्या हुआ बीएसए का हाल








📝 चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

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लखनऊ/गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है। गोंडा बीएसए अतुल कुमार तिवारी को फर्नीचर आपूर्ति में रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप में शासन ने निलंबित कर दिया है। उन पर 2.25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने और 30 लाख रुपये एडवांस लेने का आरोप है। यह मामला अब पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा रहा है।

क्या है पूरा रिश्वत कांड?

दरअसल, गोंडा बीएसए रिश्वत मामला तब शुरू हुआ जब जिले में सरकारी स्कूलों के लिए क्लासरूम फर्नीचर की आपूर्ति का टेंडर निकाला गया। इस टेंडर में हरियाणा की कंपनी नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्रा. लि. ने सबसे कम बोली (एल-1) लगाई थी। कंपनी के एमडी मनोज पांडेय ने आरोप लगाया कि बीएसए अतुल तिवारी ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर 15% कमीशन यानी करीब 2.25 करोड़ रुपये रिश्वत की मांग की।

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आरोपों के मुताबिक, 4 जनवरी 2025 को बीएसए ने कंपनी के एमडी को अपने आवास पर बुलाया और वहां पर 22 लाख रुपये नकद लिए। इसके अलावा दोनों जिला समन्वयकों — प्रेमशंकर मिश्र (जेम कोऑर्डिनेटर) और विद्याभूषण मिश्र (सिविल कोऑर्डिनेटर) — ने 4-4 लाख रुपये लिए। लेकिन जब कंपनी ने शेष रकम देने से इनकार किया, तो उनका 50.38 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट रद्द कर दिया गया और कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

कंपनी ने किया कोर्ट में मामला दर्ज

कंपनी के एमडी मनोज पांडेय ने इस पूरे मामले की शिकायत अदालत में की। कोर्ट के आदेश पर नगर कोतवाली गोंडा में मुकदमा दर्ज किया गया। इस शिकायत के बाद शासन ने तत्काल जांच शुरू कराई और डीएम गोंडाआयुक्त देवीपाटन मंडल की संयुक्त रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में बीएसए की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

शासन की सख्त कार्रवाई

रिपोर्ट में पाया गया कि बीएसए अतुल तिवारी ने टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं कीं। उन्होंने 10 लाख रुपये की वसूली कर विशेष कैटलॉग पर बिड प्रकाशित की, मॉक बिड से अलग तकनीकी स्पेसिफिकेशन रखे, और जेम नियमों का उल्लंघन किया।

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इसके आधार पर संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने आदेश जारी कर बीएसए अतुल तिवारी को तत्काल निलंबित कर दिया। उन्हें लखनऊ मंडल के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक से संबद्ध करते हुए विभागीय जांच सौंपी गई है। जांच की जिम्मेदारी लखनऊ मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक को दी गई है।

बीएसए अतुल तिवारी पहले भी विवादों में रहे

यह पहली बार नहीं है जब बीएसए अतुल तिवारी पर घूसखोरी के आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ पहले भी फर्जी नियुक्तियों और अवैध वसूली से जुड़े दो मामले दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद वे पद पर बने रहे, लेकिन अब इस नए खुलासे ने गोंडा फर्नीचर घोटाले को और गंभीर बना दिया है।

शिक्षा विभाग में सन्नाटा, जांच तेज

जैसे ही बीएसए निलंबन की खबर आई, पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। विभागीय अधिकारियों ने फिलहाल जांच में सहयोग करने की बात कही है। वहीं, पुलिस ने भी अब भ्रष्टाचार की जांच को तेज कर दिया है। शासन के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अन्य अधिकारियों की भी भूमिका की जांच की जा रही है।

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🟢 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ बीएसए अतुल तिवारी पर क्या आरोप हैं?

बीएसए अतुल तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने फर्नीचर आपूर्तिकर्ता कंपनी से 2.25 करोड़ रुपये रिश्वत मांगी और 30 लाख रुपये एडवांस लिए।

❓ यह मामला किस कंपनी से जुड़ा है?

यह मामला हरियाणा की नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ा है जिसने गोंडा में फर्नीचर आपूर्ति का टेंडर जीता था।

❓ बीएसए के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?

शासन ने बीएसए अतुल तिवारी को निलंबित कर लखनऊ मंडल में विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

❓ जांच की जिम्मेदारी किसे दी गई है?

जांच की जिम्मेदारी लखनऊ मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक को सौंपी गई है।


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